चुनाव के बीच बंगाल में 77 मुस्लिम जातियों का OBC दर्जा खत्म, 17 सीटों पर बदलेंगे समीकरण

May 23, 2024 10:12 am ISTSurya Prakash लाइव हिन्दुस्तान, कोलकाता
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उच्च न्यायालय ने पश्चिम बंगाल की 77 मुस्लिम जातियों का ओबीसी दर्जा समाप्त कर दिया। उच्च न्यायालय ने इन मुस्लिम जातियों को ओबीसी दर्जा देने के आधार को अवैध करार देते हुए यह अहम निर्णय दिया है।

चुनाव के बीच बंगाल में 77 मुस्लिम जातियों का OBC दर्जा खत्म, 17 सीटों पर बदलेंगे समीकरण

लोकसभा चुनाव के छठे चरण की वोटिंग 25 जून को होने वाली है और फिर आखिरी राउंड का मतदान 1 जून को होगा। इस तरह करीब एक सप्ताह का चुनाव बचा है और उससे पहले कलकत्ता हाई कोर्ट के अहम फैसले की चर्चा तेज है। बुधवार को उच्च न्यायालय ने पश्चिम बंगाल की 77 मुस्लिम जातियों का ओबीसी दर्जा समाप्त कर दिया। उच्च न्यायालय ने इन मुस्लिम जातियों को ओबीसी दर्जा देने के आधार को अवैध करार देते हुए यह अहम निर्णय दिया। इन 77 जातियों में से 42 को ओबीसी दर्जा 2010 में तत्कालीन वामपंथी सरकार ने दिया था। इसके बाद बाकी जातियों को ममता बनर्जी सरकार के दौर में जोड़ा गया। 

अदालत ने अपने फैसले में कहा कि इन समुदायों को ओबीसी कोटे के तहत नियुक्ति मिलने पर तत्काल रोक लगाई जाए। इसके साथ ही एक राहत की खबर भी दी कि जिन लोगों को ओबीसी कोटे के तहत अब जॉब मिली हैं या एडमिशन हुए हैं, उनके खिलाफ कोई ऐक्शन न लिया जाए। हाई कोर्ट का फैसला यूं तो देश के अन्य राज्यों के लिए भी नजीर है, लेकिन बंगाल में इसका चुनावी असर भी दिख सकता है। राज्य में मुस्लिमों की आबादी करीब 30 फीसदी है, जो तकरीबन पूरे राज्य में असर रखते हैं। 

छठे और सातवें चरण में जिन 17 सीटों पर चुनाव है, उन पर तो मुस्लिम आबादी अच्छी खासी है। ऐसे में यदि चुनाव में ध्रुवीकरण की स्थिति बन जाए तो हैरानी नहीं होगी। अदालत ने ओबीसी दर्जा खारिज करते हुए कहा, 'अदालत का यह विचार है कि 77 मुस्लिम जातियों को ओबीसी का दर्जा दिए जाने के लिए गलत मापदंड अपनाए गए। यह संदेह भी होता है कि इन लोगों को वोटबैंक के तौर पर इस्तेमाल करने की कोशिश हुई। जिस तरह से इन लोगों को ओबीसी सूची में शामिल किया गया, उससे ऐसा ही लगता है कि वोटबैंक के तौर पर इन्हें ट्रीट किया गया।'

किन लोगों ने दाखिल की थी अर्जी और क्या थी दलील

अदालत ने यह आदेश तीन लोगों की ओर से दाखिल अर्जी पर लंबी सुनवाई के बाद दिया है। इन अर्जियों में कहा गया था कि ओबीसी-ए और ओबीसी-बी सूची में कई जातियों को बिना किसी आर्थिक सामाजिक अध्ययन के ही शामिल कर लिया गया। ऐसा 2011 के बाद से हुआ, जब से तृणमूल कांग्रेस सत्ता में आई है।

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