
याचिका के विरोध में सरकारी वकील ने याचिकाकर्ताओं का आपराधिक इतिहास बताया, साथ ही कहा कि इन प्रार्थना सभाओं के लिए उन्होंने सक्षम अधिकारियों से पूर्व अनुमति नहीं ली थी, जिसके कारण पुलिस को कार्रवाई करनी पड़ी।

छत्तीसगढ़ में बिलासपुर स्थित एक अदालत ने तोरवा क्षेत्र में साढ़े 3 साल पहले एक मासूम बच्ची की निर्मम हत्या करने के मामले में उसके पिता को दोषी ठहराते हुए आजीवन कारावास की सजा सुनायी है। तृतीय अपर सत्र न्यायाधीश किरण त्रिपाठी ने यह फैसला सुनाया है।

छत्तीसगढ़ के बिलासपुर जिले के कोनी स्थित सरकारी पोल्ट्री फार्म में बर्ड फ्लू के प्रकोप से हड़कंप मच गया है। बीते 19 से 24 मार्च के बीच यहां करीब 4,400 मुर्गियों की मौत हो गई। फार्म में कुल 5,037 मुर्गियां मौजूद थीं। प्रशासन ने इस फार्म के 10 किलोमीटर रेंज में अलर्ट घोषित कर दिया है।

घटना के बाद आरोपी अंतिम संस्कार की तैयारी कर रहा था, तभी युवती के रिश्तेदार वहां आ पहुंचे। शव की स्थिति देखकर उन्हें शक हुआ और उन्होंने पुलिस को सूचना दे दी। पोस्टमॉर्टम में खुलासा हुआ कि युवती के गर्भ में लगभग तीन किलो का नवजात शिशु था, जो बाहर आते समय फंसा हुआ था।
मामले में फैसला सुनाते हुए अदालत ने कहा कि पत्नी का बिना पर्याप्त कारण पति का घर छोड़ना और परिवार को सूचना दिए बिना किसी अन्य पुरुष के साथ बाहर रहना स्वैच्छिक परित्याग की श्रेणी में आता है।
छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने पिछली कांग्रेस सरकार में मुख्यमंत्री कार्यालय में पूर्व डिप्टी सेक्रेटरी सौम्या चौरसिया को कथित शराब घोटाले से जुड़े ईडी और ईओडब्ल्यू द्वारा दर्ज दो मामलों में जमानत दे दी। दोनों मामले एक ही शराब घोटाले से जुड़े हैं।
छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय को बम से उड़ाने की धमकी मिलने की सूचना से बुधवार को न्यायिक और प्रशासनिक हलकों में हड़कंप मच गया। सूचना मिलते ही उच्च न्यायालय परिसर की सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी गई है।
छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने 2004 के दुष्कर्म के एक मामले में महत्वपूर्ण फैसला दिया है। कोर्ट ने कहा कि महिला के प्राइवेट पार्ट में पेनिट्रेशन के बिना ही अगर इजैक्युलेशन हो जाए तो ऐसे अपराध को दुष्कर्म नहीं बल्कि ‘दुष्कर्म का प्रयास’ माना जाएगा।
छत्तीसगढ़ के बिलासपुर में एक घर में अचानक जमीन फटी और चारो तरफ पानी ही पानी फैल गया। इस घटना का सीसीटीवी वीडियो भी सामने आया है।
छावई ने कहा कि कोई भी कोर्ट केस लंबित न होने के बावजूद उन्हें जूनियर एडमिनिस्ट्रेटिव ग्रेड (JAG) पे-स्केल से वंचित किया गया है और यह संविधान के अनुच्छेद 16 का उल्लंघन है जो सार्वजनिक रोजगार में अवसर की समानता की गारंटी देता है।