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Hindi News बिहारFather Day 2024: पिता ने पान बेचकर बच्चों को बनाया काबिल, दो बेटे रेलवे में लोको पायलट, बेटी आरपीएफ जवान

Father Day 2024: पिता ने पान बेचकर बच्चों को बनाया काबिल, दो बेटे रेलवे में लोको पायलट, बेटी आरपीएफ जवान

गया जिले में रहने वाले भोला प्रसाद ने खूब मेहनत करी। उन्होंनें स्टेशन और ट्रेनों में पान बेचकर अपने बच्चों को इस काबिल बना दिया कि एक बेटी आरपीएफ में जवान तथा दो बेटे रेलवे में लोको पायलट हैं।

Father Day 2024: पिता ने पान बेचकर बच्चों को बनाया काबिल, दो बेटे रेलवे में लोको पायलट, बेटी आरपीएफ जवान
bhola prasad with his elder brother
Ratanराजेश कुमार,गयाSun, 16 Jun 2024 11:36 AM
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पिता जमीर है, पिता जागीर है। जिसके पास ये है वह सबसे अमीर है। रविवार को लोग पिता के सम्मान में फादर्स डे मना रहे है। ऐसे में एक पिता के संघर्ष की कहानी जिन्होंने खुद दिव्यांग होते हुए भी अपने बच्चे व परिवार के लिए प्लेटफार्म व ट्रेनों में पान बेचा, लेकिन बच्चों की परवरिश में कोई कमी नही होने दी। खरखुरा बैरागी मोहल्ले के रेलवे क्वार्टर में रहने वाले 78 वर्षीय भोला प्रसाद ने अपने तीन बच्चों को पान बेचकर काबिल बनाया।

पिता के सपनें बच्चों ने किए पूरे

पिता के सपनों को बेटों और बेटी ने किया पूरा। भोला प्रसाद का सपना था कि वह जिस आर्थिक तंगी से गुजरे हैं, उनके बच्चे ऐसी परिस्थिति को ना देखें। वे लोग सरकारी नौकरी करें और समाज में इज्जत से सर उठाकर जिंदगी जिएं। उनका यह सपना पूरा हो गया है। उनके दो बेटे रेलवे में ड्राइवर व एक बेटी आरपीएफ जवान है। भोला प्रसाद ने बेटों की नौकरी लगने के बाद पान बेचना छोड़ दिया है।

भोला प्रसाद शून्य की तरफ देखते हुए बताते हैं कि उन्होंने 25 साल से अधिक समय तक प्लेटफार्म व ट्रेनों में पान बेचकर अपने परिवार का पालन पोषण कियाहै। जब बड़े बेटे सोनू कुमार की रेलवे में ड्राइवर की नौकरी लगी, तो बेटे ने जिद करी कि पापा अब आप पान नहीं बेचेंगे। इसलिए साल 2011 से उन्होंने पान बेचना छोड़ दिया है। 

भोला प्रसाद बताते हैं कि उसके बाद घर बैठे-बेठे उनका मन नहीं लगता था तो उन्होंने गौ पालन करना शुरू कर दिया। इस समय उनके पास दो गाय हैं। जिनका दूध बेचने का काम वो करते हैं। वहीं दूसरे बेटे सतीश कुमार की साल 2013 में रेलवे में नौकरी लग गई। इसके बाद उनके घर खुशियों ने लगातार अपनी दस्तक दी। साल 2015 में बेटी ज्योति कुमारी आरपीएफ जवान के पद पर बहाल हुयी।

15 से 20 घंटे प्लेटफार्म पर ही गुजर जाता

भोला प्रसाद बताते है कि वह जिस समय स्टेशन पर पान बेचते थे। उस समय पान की कीमत मात्र दो रूपये थी। बच्चों के स्कूल व ट्यूशन फी समय पर जमा हो इसके लिए वह 15 से 20 घंटा स्टेशन पर गुजारते और प्लेटफार्म से लेकर ट्रेनों में पान बेच अपने परिवार का जीवनयापन करते थे।

पत्नी यशोदा ने भी दिया भोला प्रसाद का साथ

भोला ने बताया कि घर की स्थिति सुधारने व बच्चों के पढाई में परेशानी ना हो इसके लिए पत्नी यशोदा ने कदम से कदम मिलाकर साथ दिया है। उन्होंने बच्चों की परवरिश अच्छे से हो इसके लिए घर में ही अगरबत्ती बनाने का काम भी किया है। इस तरह आज उनके तीनों बच्चें काबिल बन गये। यशोदा बहुत फक्र के साथ कहती हैं कि हमें अपने तीनों बच्चों पर नाज है। बेटा सोनू कुमार भी अपने माता-पिता की तारीफ में कहते हैं कि हमे अपने पिता पर गर्व है कि उन्होंने इतना संघर्ष करके हम लोगों को इस काबिल बनाया।