आज का राशिफल पढ़ने के लिए अपनी राशि चुनें

अंक राशि

राशिफल से जुड़े सवाल

  • राशिफल क्या होता है?

    राशिफल एक ज्योतिषीय भविष्यवाणी होती है, जो ग्रहों और नक्षत्रों की चाल के आधार पर बताती है कि किसी व्यक्ति का दिन, सप्ताह या महीना कैसा रहेगा।

  • आज का राशिफल (Aaj ka Rashifal) क्यों पढ़ना चाहिए?

    आज का राशिफल पढ़ने से आप अपने दिन की सही शुरुआत कर सकते हैं और जान सकते हैं कि कौन से काम शुभ हैं और किनसे बचना चाहिए।

  • राशिफल कैसे तैयार किया जाता है?

    राशिफल ग्रहों और नक्षत्रों की गणना पर आधारित होता है, जिसे कुंडली (Birth Chart) के माध्यम से तैयार किया जाता है। ज्योतिषाचार्य सूर्य, चंद्र, मंगल, बुध, गुरु, शुक्र, शनि, राहु और केतु जैसे नौ ग्रहों की स्थिति का विश्लेषण करते हैं और यह देखते हैं कि वे किस राशि में हैं और किस भाव में बैठें हैं।

  • अपनी राशि का पता कैसे करें?

    अगर आपको अपनी राशि नहीं पता या अपनी राशि जानना चाहते हैं तो इसके लिए आप अपनी जन्मतिथि, जन्म का समय और जन्म स्थान ज्योतिष को बताना होगा। वह इसकी गणना कर आपको आपकी जन्म की राशि बताएगा।

आज 17 अगस्त 2026 को ग्रहों की चाल आपकी राशि के लिए क्या बदलाव लेकर आ रही है। ग्रहों के आंकलन से आपकी राशि


Aries : आज के दिन करियर तौर पर मोटिवेटेड और प्रोडक्टिव फील करेंगे। आज का आपका दिन फायदेमंद माना जा रहा है। आज के दिन आपको सेल्फ लव पर फोकस करना चाहिए। 30 मिनट की एक्सरसाइज आपके लिए अच्छी रहेगी।


Sagittarius : आज का दिन आपके लिए लाभकारी साबित हो सकता है। आपका कैरेक्टर ही आपकी सबसे बड़ी उपलब्धी है। काम के प्रेशर से बचें और बेवजह की टेंशन न लें। आर्थिक जीवन स्टेबल रहेगा। आपने खाने-पीने पर आज ध्यान दें।


Leo : आज पॉजिटिव रहने की सलाह दी जाती है। कोई गुड न्यूज भी मिल सकती है। अपनी फाइनेंशियल सिचुएशन पर फोकस करें। अपनी फीलिंग्स को पार्टनर के साथ शेयर करना अच्छा रहता है।


कालचक्र का अर्थ है समय का चक्र । राशिफल चंद्र राशि और लग्न की राशि दोनों से देखा जाता है। आपके जन्म के समय जिस राशि का उदय पूर्वी क्षितिज में हो रहा होता है वही राशि लग्न की राशि मानी जाती है, जिससे आपकी कुंडली का पहला भाव बनता है। वहीं आपके जन्म के समय चंद्रमा जिस राशि में होता है, वह आपकी चंद्र राशि मानी जाती है। आप दोनों से अपना राशिफल पढ़ सकते हैं। ज्योतिषी ग्रहों की चाल और आपकी चंद्र या सूर्य राशि के बीच क्या योग और संबंध बन रहे हैं, इसके अनुसार राशि को देखा जाता है। इसको आपका रोज का राशिफल, वीकली राशिफल, महीने भर का राशिफल और वार्षिक राशिफल में विभाजित कर सकते हैं। किस राशि का स्वामी कौन है? कुल 12 राशियां होती हैं। हर राशि का अपना अलग स्वभाव और प्रभाव माना जाता है। हर राशि के अपने अलग स्वामी हैं। ज्योतिष में विशेष रूप से विचार किया जाता है। क्योंकि इससे राशि के बारे में काफी कुछ पता चलता है। अलग-अलग राशियों के अलग-अलग ग्रह स्वामी माने गए हैं। कौन-सी राशि का कौन-सा ग्रह स्वामी है, इसे इस तरह समझ सकते हैं। मेष एवं वृश्चिक- इन दोनों राशियों के स्वामी मंगल ग्रह हैं। वृषभ एवं तुला- इन दोनों राशियों के स्वामी शुक्र ग्रह हैं। मिथुन एवं कन्या- इन दोनों राशियों के स्वामी बुध ग्रह हैं। कर्क- इस राशि का स्वामी चंद्रमा है। सिंह-इस राशि का स्वामी सूर्य है।आपकी कुंडली के 12 भाव होते हैं। हर भाव क्या कहता है, यहां पढ़ें पहला भाव चिह्न, जाति, मस्तिष्क, विवेक, शील, सुख-दुःख मादि के विषय में विचार किया जाता है। दूसरा भाव आंख, नाक, कान, कुस, कुटुंब मित्र, रत्न, स्वर्ण-चांदी, धन, संचित पूजी आदि के विषय में विचार किया जाता है। तीसरा भाव पराक्रम, शौर्य, धैर्य, साहस, कर्मे, सहोदरं, सेवक, आयुष्य, काम, योग आदि के बारे में विचार किया जाता है। चौथा भाव पिता का सुख, अन्तःकरण, चर, गांव, उपवन, चतुष्पद, संपत्ति, वाहन, निधि, दयालुता, उदारता, छलकपट उदर रोग आदि से जुड़ा होता है। पांचवां भाव विद्या, बुद्धि, सन्तान, विनय, नीति, कुशलता, देवभक्त, धन प्राप्ति के उपाय, आकस्मिक-धन को प्राप्ति, नौकरी कूदना, भामा का सुख, हाथ का यश, गर्भाशय आदि से जुड़ा होता है। छठा भाव शत्रु, चिन्ता, सन्देह, जागीर, यश, मामा को स्थिति, गुदा तथा पीड़ा, तन, रोग आदि के विषय सें विचार किया जाता है । सांतवा भाव स्त्री, कामेच्छा, काम चिता, रमणशक्ति, विवाह, व्यवसाय, झगडे-अंझट, जननेन्द्रिय, बवासीर की बीमारी आदि से जुड़ा होता है। आठवां भाव आय, जीवन, मृत्यु, मृत्यु के कारण, मानसिक चिन्ताएं, पुरातत्त्व, संकट, ऋण, जननेन्द्रियों के रोग आदि से जुड़ा होता है। नवां भाग दान, प्रवास विद्या, मानसिक वृत्ति, पिता का सुख एवं भाग्योदय आदि के संबंध में विवार किया जाता है। दसवां भाग ऐश्वर्य-भोग, नेतृत्व, प्रभुत्व, सम्मान, राज्य, व्यवसाय, नौकरी, अधिकार तथा पिता के संबंध से जुडा होता है। ग्यारहवां भाव, लाभ, आय, सम्पत्ति, ऐश्वर्य, रत्न, वाहन, मांगलिक-कार्य से जुड़ा होता है। बारहवां भाव व्यसन, दान, माता, रोग, दण्ड, हानि आदि से जुड़ा होता है।


Author : Pandit Narendra Upadhyay

Hindi NewsAstrologyAaj Ka Rashifal