दो घरों में करती हैं झाड़ूू-पोछा, जानें कौन हैं बंगाल में बीजेपी की प्रत्याशी कलिता माझी
बीजेपी ने बंगाल की औसग्राम विधानसभा सीट से कलिता माझी को उतारा है। कलिता माझी दो घरों में घरेलू सहायिका का काम करती हैं और महीने में चार हजार रुपये कमाती हैं। पिछले विधानसभा चुनाव में वह 12 हजार वोट से हार गई थीं।

पश्चिम बंगाल में विधानसभा चुनाव का प्रचार जोर पकड़ चुका है। सभी दलों के प्रत्याशी जनता को रिझाने के लिए एड़ी-चोटी का जोर लगा रहे हैं। इनमें एक ऐसी प्रत्याशी भी हैं जो कि घरेलू सहायिका का काम करती हैं और आजकल अपने मालिक से छुट्टी लेकर प्रचार में जुटी हैं। औसग्राम विधानसभा सीट से बीजेपी प्रत्याशी कलिता माझी दो घरों में सहायिका का काम करती हैं और महीने में 4 हजार रुपये कमाती हैं। चुनाव प्रचार करने के लिए उन्होंने एक महीने की छुट्टी ले ली है।
पहले भी लड़ चुकी हैं चुनाव
इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक माझी ने कहा, मुझे नहीं लगता कि ऐसा अवसर दोबारा आएगा। बीजेपी ने मुझपर विश्वास किया है। यह बहुत बड़ी जिम्मेदारी है जिसका मुझे निर्वहन करना है। मैं जिनके घर में काम करती हूं उनका भी पूरा सहयोग मिल रहा है और उन्होंने कहा है कि जाकर प्रचार करो। कलिता माझी कोई पहली बार चुनाव नहीं लड़ रही हैं। पिछली बार भी विधानसभा चुनाव में कलिता माझी मैदान में थीं। उन्होंने टीएमसी के अबेदानंद के सामने 12 वोटों से हार का सामना करना पड़ा था। कलिता माझी माझपुकुर परी की रहने वाली हैं और उनके पति का नाम सुब्रत माझी है। वह प्लंबर का काम करते हैं। उनका एक बेटा है जो कि इस बार 12वीं में था।
बीजेपी ने क्यो जताया भरोसा
जानकारों का कहना है कि बीजेपी का विचार है कि कलिता माझी का सामाजिक बैकग्राउंड उनके पक्ष में जनता को खड़ा कर देगा। माझी ने कहा, मेरे परिवार और आसपास के लोगों को भरोसा है कि इस बार जीत जरूर होगी। हमारे इलाके में कई समस्याएं हैं। जैसे कि सड़कें, पीने का पानी, हमारे घर, जिनका निदान जरूरी है। अगर मैं विजयी होती हूं तो आम लोगों की समस्याओं का निराकरण किया जाएगा। मैं केंद्र सरकार की योजनाओं को भी लागू करवाऊंगी। यहां के लोग केंद्र की योजनाओं का लाभ नहीं ले पा रहे हैं।
माझी ने कहा कि समाज के निचले स्तर से होने की वजह से उन्हें आम लोगों की स्थिति की जानकारी है और वह जानती हैं कि कौन सी समस्याएं लोगों को सबसे ज्यादा परेशान करती हैं। माझी ने कहा कि वह चाहती हैं कि उनके गांव में अच्छा अस्पताल बने। अब तक लोगों को इलाज के लिए बर्धमान जाना पड़ता है।
माझी ने कहा कि अब भी कई ऐसे गांव हैं जहां बिजली नहीं है। हम सबका अधिकार है कि बिजली और पानी की सुविधा मिले और रहने के लिए सिर पर छत हो। उन्होंने महिलाओं की सुरक्षा को लेकर कहा कि आरजी कर अस्पताल में डॉक्टर बहन के साथ जो कुछ हुआ, उस तरह की घटनाओं का समजा में स्थान नहीं होना चाहिए। एक महिला मुख्यमंत्री के होते हुए अगर महिलाओँ पर अत्याचार होता है तो यह शर्म की बात है।
लेखक के बारे में
Ankit Ojhaविद्यालयी जीवन से ही कलात्मक अभिव्यक्ति, विचारशील स्वभाव और मिलनसार व्यक्तित्व और सामान्य के अंदर डुबकी लगाकर कुछ खास खोज लाने का कौशल पत्रकारिता के लिए अनुकूल साबित हुआ। अंकित ओझा एक दशक से डिजिटल पत्रकारिता के क्षेत्र में लगातार सक्रिय हैं। उत्तर प्रदेश के बाराबंकी के रहने वाले अंकित ओझा समाचारों की दुनिया में तथ्यों के महत्व के साथ ही संवेदनशीलता के पक्ष को साधने में निपुण हैं। पिछले चार साल से हिन्दुस्तान टाइम्स ग्रुप के 'लाइव हिन्दुस्तान' के लिए चीफ कॉन्टेंट प्रड्यूसर पद पर कार्य कर रहे हैं। इससे पहले 'टाइम्स ऑफ इंडिया' और 'इंडियन एक्सप्रेस' ग्रुप के साथ भी कार्य कर चुके हैं।
राष्ट्रीय, अंतरराष्ट्रीय, राज्य और सामाजिक सरोकारों की खबरों के संपादन में लंबा अनुभव होने के साथ ही अपने-आसपास की घटनाओं में समाचार तत्व निकालने की अच्छी समझ है। घटनाओं और समाचारों से संबंधित फैसले लेने और त्वरित समाचार प्रकाशित करने में विशेष योग्यता है। इसके अलावा तकनीक और पाठकों की बदलती आदतों के मुताबिक सामग्री को रूप देने के लिए निरंतर सीखने में विश्वास करते हैं। अंकित ओझा की रुचि राजनीति के साथ ही दर्शन, कविता और संगीत में भी है। लेखन और स्वरों के माध्यम से लंबे समय तक आकाशवाणी से भी जुड़े रहे। इसके अलावा ऑडियन्स से जुड़ने की कला की वजह से मंचीय प्रस्तुतियां भी सराही जाती हैं।
अकादमिक योग्यताः अंकित ओझा ने प्रारंभिक शिक्षा नवोदय विद्यालय से पूरी करने के बाद जामिया मिल्ल्लिया इस्लामिया से पत्रकारिता में ही ग्रैजुएशन किया है। इसके बाद भारतीय जनसंचार संस्थान (IIMC) से पोस्ट ग्रैजुएट डिप्लोमा और कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय से मास कम्युनिकेशन में एमए किया है। जामिया में अध्ययन के दौरान ही इटैलियन और उर्दू भाषा में भी कोर्स किए हैं। इसके अलावा पंजाबी भाषा की भी अच्छी समझ रखते हैं। विश्वविद्यालय में NCC का 'C सर्टिफिकेट' भी प्राप्त किया है। IIMC और ऑक्सफर्ड से स्वास्थ्य पत्रकारिता का सर्टिफिकेट भी प्राप्त किया है।
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