बंगाल में तीन ही चरणों में इलेक्शन, फोर्स होगी डबल; क्या है चुनाव आयोग की तैयारी

Jan 14, 2026 04:06 pm ISTSurya Prakash लाइव हिन्दुस्तान, कोलकाता
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भाजपा सूत्र तो इससे उत्साहित दिख रहे हैं। उनका मानना है कि लंबे चलने वाले चुनाव में ममता बनर्जी के पास एडवांटेज रहता है। वह कभी बांग्ला कार्ड चलती हैं तो कभी कोई और मुद्दा ले आती हैं। लंबे चुनाव में उनके पास अपने खिलाफ बनी ऐंटी इनकम्बैंसी की काट के लिए मौका होता है।

बंगाल में तीन ही चरणों में इलेक्शन, फोर्स होगी डबल; क्या है चुनाव आयोग की तैयारी

पश्चिम बंगाल में अगले कुछ महीनों में चुनाव होने वाले हैं और इलेक्शन कमिशन ने इसकी तैयारियां तेज कर दी हैं। इस बीच जानकारी मिली है कि इलेक्शन तीन ही राउंड में इस बार कराए जा सकते हैं। यदि ऐसा हुआ तो यह आयोग की बड़ी सफलता होगी क्योंकि 2021 में राज्य में 8 राउंड में वोटिंग हुई थी। आमतौर पर पश्चिम बंगाल में सुरक्षा को लेकर संवेदनशील स्थिति होती है। इसके अलावा चुनावी व्यवस्था भी महत्वपूर्ण है। इसलिए इलेक्शन के राउंड ज्यादा होते थे, लेकिन इस बार कम चरणों में ही इन्हें निपटाने की तैयारी है। 2021 में ज्यादा राउंड होने की एक वजह कोरोना भी था, लेकिन ऐतिहासिक तौर पर भी बंगाल में ज्यादा राउंड में वोटिंग होती रही है।

चुनाव आयोग से जुड़े सूत्रों का कहना है कि बंगाल में अर्ध सैनिक सुरक्षा बलों के करीब ढाई लाख जवान तैनात हो सकते हैं। यह आंकड़ा पहले के मुकाबले करीब डबल होगा। इसका मकसद यही है कि कम चरणों में चुनाव कराए जा सकें। इसके अलावा राजनीतिक हिंसा के लिहाज से भी बंगाल एक संवेदनशील राज्य रहा है। फिलहाल राज्य चुनाव आयोग की ओर से तैयारियां की जा रही हैं। इसके बाद जल्दी ही केंद्रीय चुनाव आयोग का एक प्रतिनिधिमंडल बंगाल का दौरा करेगा और तैयारियों का जायजा लेगा।

इस संबंध में 5 जनवरी को एक मीटिंग भी हुई थी। इसमें मुख्य निर्वाचन आयुक्त ने सभी राज्यों के चुनाव अधिकारियों से बात की थी, जहां इस साल चुनाव होने हैं। सूत्रों का कहना है कि इसी दौरान बंगाल के चुनाव अधिकारियों ने दिल्ली में हुई मीटिंग में बताया कि आखिर कितने राउंड घटाए जा सकते हैं। पश्चिम बंगाल के मुख्य चुनाव अधिकारी मनोज अग्रवाल ने बताया कि राज्य तीन राउंड में वोटिंग के लिए तैयार है। इसके लिए सुरक्षा बलों की संख्या में थोड़ा इजाफा करना होगा। फिलहाल चुनावी पंडित इसके भी आकलन में जुट गए हैं कि यदि राउंड कम हुए तो इससे किसे फायदा मिलेगा।

भाजपा सूत्र तो इससे उत्साहित दिख रहे हैं। उनका मानना है कि लंबे चलने वाले चुनाव में ममता बनर्जी के पास एडवांटेज रहता है। वह कभी बांग्ला कार्ड चलती हैं तो कभी कोई और मुद्दा ले आती हैं। लंबे चुनाव में उनके पास अपने खिलाफ बनी ऐंटी इनकम्बैंसी की काट के लिए मौका होता है। लेकिन यदि चुनाव की अवधि कम हो तो ऐसा नहीं हो पाता। बता दें कि 2021 में बंगाल में चुनाव 27 मार्च से 29 अप्रैल तक चले थे और फिर 2 मई को नतीजे आए थे। इस बार राज्य की 294 सीटों पर अप्रैल के आखिरी सप्ताह या फिर मई की शुरुआत में वोट डाले जा सकते हैं।

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दुनियादारी में रुचि पत्रकारिता की ओर खींच लाई। समकालीन राजनीति पर लिखने के अलावा सामरिक मामलों, रणनीतिक संचार और सभ्यतागत प्रश्नों के अध्ययन में रुचि रखते हैं। मूल रूप से उत्तर प्रदेश के रायबरेली के रहने वाले सूर्यप्रकाश को पत्रकारिता जगत में करीब डेढ़ दशक का अनुभव है। 10 वर्षों से ज्यादा समय से डिजिटल मीडिया में कार्यरत हैं। लाइव हिन्दुस्तान के लिए राष्ट्रीय, अंतरराष्ट्रीय एवं राज्यों से संबंधित खबरों का संपादन करते हैं एवं डेस्क इंचार्ज के तौर पर भी जिम्मेदारी संभाल रहे हैं। समाचारों के त्वरित प्रकाशन से लेकर विस्तृत अध्ययन के साथ एक्सप्लेनर आदि में भी रुचि रखते हैं। ब्रेकिंग न्यूज प्रकाशित करने और खबरों के अंदर की खबर को विस्तार से समझाने में रुचि रखते हैं। हिंदी भाषा की डिजिटल पत्रकारिता के नए आयामों को समझते हैं और उसके अनुसार ही पाठकों को खबरें देने के लिए तत्परता रखते हैं।


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