बंगाल की 44 सीटों पर क्या होगा? जीत के अंतर से ज्यादा इस बार वोट कट गए; नंदीग्राम भी शामिल

Apr 10, 2026 04:43 pm ISTSurya Prakash लाइव हिन्दुस्तान, कोलकाता
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राज्य की 294 सीटों में 15 फीसदी यानी 44 सीटों पर इतने वोटरों के नाम कट गए हैं, जितना 2021 में जीत का अंतर भी नहीं था। ऐसे में जब 4 मई को बंगाल चुनाव के नतीजे आएंगे तो इन सीटों पर भी नजर होगी कि आखिर मतदाताओं की संख्या घटने का असर किस पर हुआ है।

बंगाल की 44 सीटों पर क्या होगा? जीत के अंतर से ज्यादा इस बार वोट कट गए; नंदीग्राम भी शामिल

पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 23 और 29 अप्रैल को राउंड में होने हैं। उससे पहले न्यायिक अधिकारियों की निगरानी में SIR की प्रक्रिया और वोटर लिस्ट तैयार करने का काम चल रहा है। अब तक बड़ी संख्या में वोटरों के नाम डिलीट हुए हैं और राज्य की 294 सीटों में 15 फीसदी यानी 44 सीटों पर इतने वोटरों के नाम कट गए हैं, जितना 2021 में जीत का अंतर भी नहीं था। ऐसे में जब 4 मई को बंगाल चुनाव के नतीजे आएंगे तो इन सीटों पर भी नजर होगी कि आखिर मतदाताओं की संख्या घटने का असर किस पर हुआ है। कौन फायदे में रहा है और किसको घाटा हुआ है।

इन 44 सीटों में से 20 से ज्यादा भाजपा जीती थी तो वहीं लगभग आधी सीटें टीएमसी भी जीती थी। ये सीटें मालदा, कूचबिहार, मुर्शिदाबाद, दक्षिण दिनाजपुर, हावड़ा, पूर्व बर्धमान और पश्चिम बर्धमान की हैं। इनमें से पूर्व बर्धमान, पश्चिम बर्धमान और नादिया की 5-5 सीटें शामिल हैं। इसके अलावा उत्तर 24 परगना, पश्चिमी मेदिनीपुर की भी 4-4 सीटें हैं। कूचबिहार, दक्षिण दिनाजपुर और मुर्शिदाबाद की भी तीन-तीन सीटें हैं। पूर्व मेदिनीपुर और हावड़ा की भी दो-दो सीटें हैं। उदाहरण के तौर पर देखें तो मुर्शिदाबाद जिले की शमसेरगंज सीट से 74,775 वोटर कट गए हैं। यहां पिछली बार टीएमसी को 26,111 वोटों से ही जीत मिली थी।

इसी तरह पुरुलिया की बलरामपुर सीट से भाजपा ने 2021 में 273 वोटों से जीत हासिल की थी और इस बार यहां 1073 वोटर ही कट गए हैं। हालांकि जानकारों का कहना है कि कटने वाले मतदाता किसी खास वर्ग के ही नहीं हैं। ऐसे में यह कहना गलत होगा कि वोटर लिस्ट से नाम कटने से किसी विशेष दल को फायदा होगा या नुकसान। वहीं टीएमसी की ओर से तो लगातार 250 सीटें जीतने का दावा किया जा रहा है। टीएमसी का कहना है कि हमने हर सीट पर वॉर रूम बनाया है और सभी के लिए हमारी अलग रणनीति है। ऐसे में भाजपा इस बार पिछली बार से भी कमजोर रहेगी।

टीएमसी को फिलहाल इस बात का फायदा मिलता दिख रहा है कि 2021 की तरह ही कांग्रेस और वामपंथी दल बेहद कमजोर हैं। सीन से बाहर दिख रहे इन दलों के चलते वोट दो ही हिस्सों में बंटेगा। भाजपा के विरोध का सारा वोट टीएमसी के साथ ही जाता दिख सकता है। हालांकि इस बार नजर रहेगी कि ओवैसी की एंट्री और वामपंथी दल एवं कांग्रेस के गठबंधन के चलते मुस्लिम मतदाताओं का वोटिंग पैटर्न कैसा रहता है। फिलहाल इस बात पर नजर है कि नंदीग्राम, भबानीपुर, खड़गपुर सदर जैसी हॉट सीटों पर क्या स्थिति रहती है। यहां से ममता बनर्जी, शुभेंदु अधिकारी और दिलीप घोष जैसी सीनियर नेता चुनाव में उतरे हैं।

कौन सी सीटों पर जीत के अंतर से ज्यादा कट गए वोट

इस बार जिन सीटों पर बीते चुनाव में जीत के अंतर से ज्यादा वोट कटे हैं, उनमें कुल 44 सीटें हैं। इनमें से कुछ प्रमुख नाम हैं- गंगारामपुर, समसेरगंज, मुर्शिदाबाद, नकाशीपारा, छपरा, रानाघाट दक्षिण, कल्याणी, बागडा, बांगांव, हावड़ा उत्तर, नंदीग्राम, खड़गपुर सदर, बलरामपुर, आसनसोल दक्षिण आदि। अहम बात यह है कि नंदीग्राम से शुभेंदु अधिकारी मैदान में हैं तो वहीं खड़गपुर सदर से दिलीप घोष चुनाव में उतरे हैं, जो भाजपा के सीनियर नेता हैं और प्रदेश अध्यक्ष रहे हैं।

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