'SIR में जिनके नाम हटा दिए गए, वे गद्दार हैं', भाजपा नेता दिलीप घोष का विवादित बयान
भाजपा उम्मीदवार दिलीप घोष ने आगे कहा कि जो लोग जाने के लिए तैयार हैं, उनके लिए अंतिम घड़ी आ गई है। वोटर लिस्ट साफ होने से पूरे देश में परिवर्तन की लहर आई है और अब यह पश्चिम बंगाल में भी विकास की लहर लाएगी।

पश्चिम बंगाल के खड़गपुर सदर से भाजपा उम्मीदवार दिलीप घोष ने मतदाता सूची से नाम हटाने को लेकर विवादित बयान दिया है। पश्चिम मेदिनीपुर में प्रचार के दौरान उन्होंने कहा कि जिन लोगों के नाम SIR के बाद वोटर लिस्ट से हटाए गए हैं, वे देशद्रोही और गद्दार हैं। दिलीप घोष ने दावा किया कि इन फर्जी वोटरों के कारण ही ममता बनर्जी तीन बार मुख्यमंत्री बनीं और 34 साल तक सीपीएम की सरकार चली। उन्होंने कहा कि चुनाव आयोग ने पानी निचोड़ने की तरह 90 लाख नाम हटा दिए हैं और आगे 10-15 लाख और नाम हट सकते हैं।
दिलीप घोष ने आगे कहा कि जो लोग जाने के लिए तैयार हैं, उनके लिए अंतिम घड़ी आ गई है। वोटर लिस्ट साफ होने से पूरे देश में परिवर्तन की लहर आई है और अब यह पश्चिम बंगाल में भी विकास की लहर लाएगी। उन्होंने खड़गपुर के टालीबागीचा इलाके में प्रचार करते हुए यह टिप्पणी की। उनका यह बयान ऐसे समय में आया है जब केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह खड़गपुर में दिलीप घोष के समर्थन में रोड शो करने वाले थे। इस बयान से राजनीतिक हलचल मच गई है।
दिलीप घोष के बयान पर TMC का पलटवार
तृणमूल कांग्रेस ने दिलीप घोष के इस बयान की तीखी आलोचना की है। खड़गपुर सदर से टीएमसी उम्मीदवार प्रदीप सरकार ने कहा कि भाजपा का चरित्र इससे साफ दिखता है। उन्होंने आरोप लगाया कि SIR शुरू होने पर अमित शाह ने कहा था कि किसी हिंदू का नाम नहीं हटेगा, केवल बांग्लादेशी और रोहिंग्या हटेंगे। लेकिन अब 90 लाख हटाए गए नामों में 57 लाख हिंदू हैं। प्रदीप सरकार ने कहा कि दिलीप घोष ने इन हिंदुओं को भी देशद्रोही और रोहिंग्या बता दिया। उन्होंने इस बयान को सुप्रीम कोर्ट का अपमान बताया और जरूरत पड़ने पर कानूनी लड़ाई लड़ने की बात कही।
इस विवाद के बीच पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव की तैयारियां जोरों पर हैं। एसआईआर प्रक्रिया में फर्जी वोटर हटाने का भाजपा मुद्दा बनाती रही है, लेकिन विपक्ष इसे लोकतंत्र पर हमला बता रहा है। दिलीप घोष का बयान एक बार फिर राजनीतिक बहस छेड़ गया है। भाजपा इसे वोटर लिस्ट शुद्धिकरण का हिस्सा मानती है, जबकि टीएमसी इसे विभाजनकारी रणनीति कह रही है। इस मुद्दे पर दोनों दलों के बीच तीखी जुबानी जंग जारी है।


