'अलग बेंच ही बनानी पड़ेगी', बिना सबूत सुप्रीम कोर्ट पहुंची TMC को CJI ने लगाई फटकार
पश्चिम बंगाल में 5 से 6 लाख नए वोटरों के जुड़ने पर TMC ने सुप्रीम कोर्ट में आपत्ति जताई है। बिना दस्तावेजों की मौखिक दलील पर CJI ने नाराजगी जताते हुए नई याचिका दायर करने को कहा है। बंगाल चुनाव और वोटर लिस्ट विवाद का पूरा मामला यहां पढ़ें।

तृणमूल कांग्रेस (TMC) ने पश्चिम बंगाल में नए मतदाताओं के कथित बड़े पैमाने पर नामांकन के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में नई आपत्तियां दर्ज कराईं। बंगाल चुनाव और मतदाता सूची से जुड़ी याचिकाओं की भरमार से परेशान होकर चीफ जस्टिस (CJI) सूर्यकांत की अगुवाई वाली बेंच ने तंज कसते हुए कहा कि उन्हें इन मामलों से निपटने के लिए एक अलग 'विशेष बेंच' ही बनानी पड़ेगी।
TMC की अदालत में दलीलें और आरोप
टीएमसी सांसद और वरिष्ठ वकील मेनका गुरुस्वामी ने सीजेआई सूर्यकांत और जस्टिस जॉयमाल्या बागची की बेंच के समक्ष अपनी बात रखी। उन्होंने की मुख्य बिंदु उठाए। जैसे-
लाखों नए वोटरों का जुड़ना: गुरुस्वामी ने आरोप लगाया कि चुनाव आयोग (EC) ने 'फॉर्म 6' के माध्यम से 5 से 6 लाख नए मतदाताओं को पंजीकृत किया है। उन्होंने याद दिलाया कि अदालत पहले इस तरह की प्रक्रिया पर सवाल उठा चुकी है। बता दें कि फॉर्म 6 का इस्तेमाल 18 वर्ष की आयु पूरी करने वाले नागरिकों द्वारा मतदाता सूची में अपना नाम शामिल कराने के लिए किया जाता है।
मतदाताओं के नाम कटना: टीएमसी ने मतदाता सूचियों के पुनरीक्षण (SIR) और 'तार्किक विसंगति' के आधार पर बड़े पैमाने पर मतदाताओं के नाम काटे जाने पर भी कड़ी आपत्ति जताई। पार्टी का दावा है कि नाम काटने का यह अजीबोगरीब आधार केवल बंगाल में ही देखा जा रहा है।
सुप्रीम कोर्ट का रुख: बिना दस्तावेजों के सुनवाई से इनकार
सुप्रीम कोर्ट ने टीएमसी की इस मौखिक अपील को सुनने से साफ इनकार कर दिया। बेंच ने कड़ा रुख अपनाते हुए कहा कि अदालत बिना किसी ठोस दस्तावेज के केवल मौखिक अनुरोध पर विचार नहीं कर सकती। यदि पार्टी को नए मतदाताओं के नामांकन से कोई शिकायत है, तो उसे कार्रवाई के कारण और शिकायत के आधार को स्पष्ट करते हुए एक नई और औपचारिक याचिका दायर करनी चाहिए।
अदालत की इस टिप्पणी पर वकील मेनका गुरुस्वामी ने स्वीकार किया कि उनके पास फिलहाल अदालत में पेश करने के लिए कोई दस्तावेजी सबूत नहीं है। उन्होंने बताया कि उनका यह दावा उन मीडिया रिपोर्ट्स पर आधारित है, जिनमें 5-6 लाख नए वोटरों के सूची में शामिल होने की बात कही गई है।
पिछली सुनवाइयों में कोर्ट और चुनाव आयोग का पक्ष
इस मामले के संदर्भ में सुप्रीम कोर्ट और चुनाव आयोग पहले ही स्थिति स्पष्ट कर चुके हैं। सुप्रीम कोर्ट ने पिछली एक सुनवाई में कहा था कि चुनाव से ठीक पहले 18 वर्ष की आयु पूरी करने वाले युवाओं द्वारा मतदाता सूची में नाम शामिल कराने के लिए बड़ी संख्या में 'फॉर्म 6' जमा करना कोई असामान्य या अजीब बात नहीं है।
चुनाव आयोग (EC) का जवाब
आयोग ने स्पष्ट किया था कि नियम के अनुसार सभी पात्र नागरिकों को उम्मीदवारों के नामांकन दाखिल करने की अंतिम समय सीमा तक मतदाता सूची में शामिल होने के लिए आवेदन करने का अधिकार है। हालांकि, चुनाव आयोग ने यह भी कहा था कि जरूरी नहीं है कि हाल ही में जोड़े गए सभी नए मतदाता आगामी चुनावों में वोट डालने के पात्र हो ही जाएं।


