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2024 में किसके लिए बल्लेबाजी करेंगे सौरव गांगुली? ममता की चाल में फंसी भाजपा

दरअसल पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनावों के दौरान सौरव गांगुली के राजनीति में जाने को लेकर खूब चर्चाएं हुई थीं। लेकिन इसके बावजूद दादा के नाम से मशहूर सौरव गांगुली ने चुप्पी साधे रखी।

2024 में किसके लिए बल्लेबाजी करेंगे सौरव गांगुली? ममता की चाल में फंसी भाजपा
Amit Kumarलाइव हिन्दुस्तान,कोलकाताWed, 22 Nov 2023 10:50 PM
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पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने मंगलवार को कोलकाता में बंगाल ग्लोबल बिजनेस समिट 2023 में पूर्व क्रिकेटर और भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड (BCCI) के पूर्व अध्यक्ष सौरव गांगुली को "बंगाल का ब्रांड एंबेसडर" घोषित किया। यह पद 2012 से सुपरस्टार शाहरुख खान के पास था। हालांकि इस साल मार्च में राज्य के घरेलू सुपरस्टार व तृणमूल सांसद देव को कुछ समय के लिए "बंगाल का ब्रांड एंबेसडर" बनाया गया था। लेकिन अब गांगुली इस पर आसीन हो गए हैं। इसे बड़ा घटनाक्रम माना जा रहा है। दरअसल पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनावों के दौरान सौरव गांगुली के राजनीति में जाने को लेकर खूब चर्चाएं हुई थीं। लेकिन इसके बावजूद दादा के नाम से मशहूर सौरव गांगुली ने चुप्पी साधे रखी। हालांकि, ऐसा कहा जा रहा है कि प्रिंस ऑफ कोलकाता को अपना राजनीतिक सफर शुरू करने में अधिक समय लग रहा है। वे अब बतौर "बंगाल का ब्रांड एंबेसडर" होने के नाते टीएमसी की टीम में हैं।

कभी भाजपा के करीबी माने जाते थे दादा

एक साल पहले अनिच्छुक सौरव गांगुली को बीसीसीआई अध्यक्ष के रूप में हटा दिया गया था और रोजर बिन्नी को उनकी जगह नया अध्यक्ष बनाया गया। इससे ठीक पहले हुए पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनावों के दौरान गांगुली को न केवल भाजपा खेमे में पाया जाता था बल्कि पार्टी के संभावित सीएम चेहरे के रूप में भी देखा जा रहा था। भाजपा ने इन चुनावों में अपनी संभावनाओं पर खूब चर्चा की थी, हालांकि अंततः टीएमसी ने सूपड़ा साफ किया। उस समय भाजपा के शीर्ष नेताओं के साथ गांगुली की निकटता की अफवाहें तब बढ़ीं जब उनके घर पर भोजन के लिए राज्य के वरिष्ठ भाजपा नेताओं सुवेंदु अधिकारी और सुकांत मजूमदार के साथ शाह की मेजबानी की तस्वीरें सामने आईं थीं। 

हालांकि कुछ दिनों बाद, सौरव गांगुली राज्य सचिवालय में ममता के साथ दिखे। सितंबर 2022 में, बंगाल को दुर्गा पूजा के लिए यूनेस्को विरासत टैग मिलने के बाद उन्होंने एक धन्यवाद समारोह में भी उनके साथ मंच साझा किया। लेकिन अक्टूबर 2022 में गांगुली के बीसीसीआई कार्यकाल का अंत इस बात का पुख्ता संकेत था कि क्रिकेटर और बीजेपी के बीच संबंध खत्म हो गए हैं।

2024 के लिए ममता ने चला गेम

मंगलवार को बंगाल के ब्रांड एंबेसडर के रूप में उनकी नियुक्ति के बाद, भाजपा नेताओं ने खुले तौर पर अनुमान लगाया कि ममता ने बंगाल के सबसे बड़े खेल स्टार को अपने साथ लेकर 2024 के लोकसभा चुनावों के लिए अपना कदम बढ़ाया है। मंगलवार को ममता बनर्जी ने मेगास्टार शाहरुख खान की जगह गांगुली को राज्य का ब्रांड एंबेसडर नामित किया। टीएमसी सरकार के ग्लोबल बिजनेस समिट समारोह में यह घोषणा, शिखर सम्मेलन के अग्रदूत के रूप में और बंगाल में निवेश आकर्षित करने के लिए, गांगुली के सीएम के साथ एक दुर्लभ विदेशी यात्रा पर जाने के दो महीने बाद हुई। मंच पर बैठे गांगुली को संबोधित करते हुए, सीएम ने बिजनेस समिट में कहा, “वह एक बहुत लोकप्रिय व्यक्ति हैं और युवा पीढ़ी से आते हैं। मैं उन्हें बताना चाहती हूं कि वह अब बंगाल के ब्रांड एंबेसडर हैं। मैं उनसे इसे स्वीकार करने का अनुरोध करूंगी... आप ना नहीं कह सकते।" 

गांगुली ने भी की ममता की जमकर तारीफ

इससे पहले भारत के पूर्व क्रिकेट कप्तान ने पहले कार्यक्रम में अपने भाषण में सीएम की भरपूर प्रशंसा की थी। उन्होंने कहा, “मैं यह सच कहता हूं, जब भी मैं उन्हें (ममता को) एसएमएस भेजता हूं, मुझे एक मिनट के भीतर जवाब मिल जाता है। शायद ही कभी देरी होती है। जब भी वह मुझे टेलीविजन पर देखती हैं तो एसएमएस भेजती हैं और पूछती है कि मैं कैसा हूं और क्या मैंने खाना खाया है। आपने मुझे जो देखभाल और स्नेह दिखाया है, उससे मैं बहुत प्रभावित हूं।"

भाजपा ने उठाए सवाल

इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक, इस घटनाटक्रम पर भाजपा के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष और पूर्व बंगाल प्रमुख दिलीप घोष ने बुधवार को कहा, "बंगाल सरकार और टीएमसी को सौरव गांगुली को मान्यता देने में इतना समय लग गया… उन्होंने बंगाल और बंगाल क्रिकेट के लिए बहुत कुछ किया है और (अब) 2024 (लोकसभा चुनाव) को ध्यान में रखते हुए, वह (ममता) सौरव का हाथ पकड़ना चाहती हैं... वह 2024 के लिए उनका इस्तेमाल करना चाहती हैं... शाहरुख खान का बाजार नीचे है।" घोष ने कहा कि वहीं भाजपा ने हमेशा गांगुली की भूमिका को एक "आइकन" के रूप में स्वीकार किया है। उन्होंने कहा, “उन्हें त्रिपुरा (भाजपा शासित राज्य) द्वारा ब्रांड एंबेसडर का सम्मान बहुत पहले दिया गया था… भाजपा ने उन्हें बीसीसीआई अध्यक्ष बनाया था। भाजपा ने उनका इस्तेमाल क्रिकेट में किया, राजनीति में नहीं।”

टीएमसी नेता जय प्रकाश मजूमदार ने द इंडियन एक्सप्रेस को बताया कि बीजेपी की प्रतिक्रिया से फिर पता चला है कि "बंगाल के विकास, बंगाल के लाभ से संबंधित कुछ भी बीजेपी, खासकर बंगाल बीजेपी को नाखुश करता है"। उन्होंने कहा, “केंद्र द्वारा आर्थिक नाकेबंदी के कारण गरीब पीड़ित हैं। बंगाल का गौरव सौरव गांगुली, जिनका चेहरा भारत ही नहीं दुनिया जानती है, उन्हें राज्य का ब्रांड एंबेसडर बनाया गया है। और बीजेपी कहती है, 'इतनी देर क्यों' या 'सौरव क्यों।' यह भाजपा में मूल्य-आधारित राजनीति की कमी को दर्शाता है।"

राजनीतिक पारी के लिए तैयार हैं दादा? 

क्या गांगुली-ममता की गर्मजोशी ने संकेत दिया कि वह लंबे समय से प्रतीक्षित राजनीतिक पारी के लिए तैयार हैं? इस सवाल पर घोष ने कहा: "यह गांगुली को तय करना है कि वह राजनीति में शामिल होंगे या नहीं।" टीएमसी के एक वरिष्ठ नेता ने कहा, "सीपीआई (एम) ने सबसे पहले उन्हें अपने साथ जोड़ने की कोशिश की। कुछ साल पहले, भाजपा ने उन्हें अपने साथ जोड़ने की कोशिश की। अब, उन्हें ब्रांड एंबेसडर बनाना ममता बनर्जी का एक बड़ा कदम है। कौन जानता है आगे क्या होगा? यह सब गांगुली पर निर्भर करता है।”

कहा जाता है कि 2021 के विधानसभा चुनावों से पहले उन्होंने राजनीति में सीधे प्रवेश के भाजपा के प्रस्ताव को अस्वीकार कर दिया था। सितंबर में स्पेन और संयुक्त अरब अमीरात की अपनी यात्रा के बाद, गांगुली ने मीडियाकर्मियों से जोर देकर कहा कि उनका कोई राजनीतिक जुड़ाव नहीं है। उन्होंने कहा, “मैं एक व्यक्ति हूं, मैं विधायक, सांसद नहीं हूं। मेरा कोई राजनीतिक लगाव नहीं है। मुझे दुनिया भर से आमंत्रित किया जाता है, स्पेन, कोलकाता, दिल्ली। मैं किसी के प्रति जवाबदेह नहीं हूं। हम इंसान हैं और हम लोगों के साथ बातचीत करते हैं।” हालांकि, जैसा कि गांगुली बंगाल के राजनीतिक हलकों में घूम रहे हैं, वैसे लगभग 17 वर्षों से चल रही अफवाहों के जल्द खत्म होने की संभावना नहीं है।

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