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BJP से थे कमिटी के सदस्यों के रिश्ते, बंगाल में हिंसा पर NHRC की रिपोर्ट को ममता सरकार ने किया खारिज

लाइव हिन्दुस्तान,नई दिल्लीPublished By: Nishant Nandan
Tue, 27 Jul 2021 06:16 PM
BJP से थे कमिटी के सदस्यों के रिश्ते, बंगाल में हिंसा पर NHRC की रिपोर्ट को ममता सरकार ने किया खारिज

पश्चिम बंगाल में चुनाव बाद हुई हिंसा को लेकर राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग की रिपोर्ट को पश्चिम बंगाल की ममता बनर्जी सरकार ने खारिज कर दिया है। पश्चिम बंगाल सरकार ने इस हिंसा के मामले में कोलकाता हाईकोर्ट में हलफनामा दायर किया है। इस हलफनामे में कहा गया है कि इस आयोग के सदस्यों में भारतीय जनता पार्टी से जुड़े करीबी लोग शामिल थे और केंद्र सरकार तथा इन लोगों ने जानबूझ कर यह रिपोर्ट राज्य के खिलाफ बनाई है।इस हलफनामे में राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग की रिपोर्ट के निष्कर्षों का बिंदु-दर-बिंदु खंडन किया गया है। साथ ही यह कहा है कि विधानसभा चुनाव के बाद बंगाल में राजनीतिक हिंसा की घटना नहीं हुई है। मामले की सुनवाई बुधवार सुबह 11 बजे कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश राजेश बिंदल सहित 5 जजों की बेंच के सामने होगी। 

बंगाल के गृह सचिव बीपी गोपालिका ने हलफनामें में कहा है कि विधानसभा चुनाव के बाद बंगाल में राजनीतिक हिंसा की घटना नहीं हुई है। एनएचआरसी की टीम राज्य की सत्तारूढ़ टीएमसी सरकार के खिलाफ पूर्वाग्रह से ग्रस्त थी, इसलिए वो ऐसा दावा कर रही है। कहा गया है कि इस समिति के सदस्यों के भारतीय जनता पार्टी और केंद्र सरकार के साथ काफी नजदीकी रिश्ते हैं। कई सदस्य बाकायदा बीजेपी के मेंबर हैं। ऐसे में रिपोर्ट में कई मनगढ़ंत बाते करते हुए किसी भी तरह से राज्य सरकार को बदनाम करने की पूरी कोशिश की गई है।

इससे पहले जून के महीने में पांच जजों की एक बेंच ने एनएचआरसी को निर्देश दिया था कि वो पश्चिम बंगाल में मार्च-अप्रैल में हुए विधानसभा चुनाव के बाद हिंसा से जुड़ी सभी केसों की जांच करे। मानवाधिकार आयोग की तरफ से बनाई गई कमेटी में सात सदस्य शामिल थे। कमेटी का नेतृत्व कर रहे राजीव जैन ने अपनी अंतरिम रिपोर्ट 2 जुलाई कौ सौंपी थी। इसके बाद फाइनल रिपोर्ट 13 जुलाई को सौंपी गई थी।  

मानवाधिकार आयोग से जुड़ी कमेटी ने अपनी रिपोर्ट में इस हिंसा को लेकर सीबीआई जांच करने की सिफारिश की थी तथा कहा था कि यह मुख्य विपक्षी दल के समर्थकों के खिलाफ सत्ताधारी पार्टी के समर्थकों द्वारा बदले की हिंसा थी। इसके नतीजे से हजारों लोगों के जीवन और आजीविका में मुश्किलें उत्पन्न हुईं और आर्थिक रूप से उनका गला घोंट दिया गया।

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