20 साल और विपक्ष में बैठना मंजूर... आपको नहीं पता ममता की क्षमता; चुनाव से पहले क्यों बोल रहे अमित शाह?

Pramod Praveen एएनआई, कोलकाता
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कबीर ने दावा किया कि यह वीडियो उन्हें बदनाम करने के लिए AI का इस्तेमाल करके बनाया गया था। उन्होंने यह भी धमकी दी है कि अगर तृणमूल कांग्रेस कोई सबूत पेश नहीं कर पाई, तो वह उसके खिलाफ मानहानि का मुकदमा दायर करेंगे।

20 साल और विपक्ष में बैठना मंजूर... आपको नहीं पता ममता की क्षमता; चुनाव से पहले क्यों बोल रहे अमित शाह?

भारतीय जनता पार्टी (BJP) के वरिष्ठ नेता और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने कहा है कि पश्चिम बंगाल में बाबरी मस्जिद बनाने वालों के साथ रहने या किसी तरह का समझौता करने के बजाय उनकी पार्टी 20 साल तक और विपक्ष में बैठना पसंद करेगी। उन्होंने कहा कि जो लोग बंगाल में बाबरी मस्जिद बना रहे हैं, उनके साथ बैठने के बजाय और 20 साल विपक्ष में बैठना पसंद करेंगे। पार्टी का चुनावी घोषणा पत्र जारी करने के बाद उन्होंने यह बात निलंबित TMC विधायक हुमायूँ कबीर से जुड़े एक 'स्टिंग ऑपरेशन' पर पूछे गए सवाल के जवाब में कही।

हुमायूं कबीर पिछले साल बंगाल में बाबरी जैसी मस्जिद की आधारशिला रखने की वजह से चर्चा में आए थे। हुमायूं कबीर की पहल पर पश्चिम बंगाल के मुर्शीदाबाद में अयोध्या की बाबरी मस्जिद की तर्ज पर वैसी ही मस्जिद बनाने का ऐलान किया था और बाद में उसकी आधारशिला रखी थी। इधर, हाल ही में पश्चिम बंगाल चुनावों से कुछ ही हफ़्ते पहले, एक 'स्टिंग' वीडियो वायरल हो रहा है, जिसमें कथित तौर पर हुमायूं कबीर को यह कहते हुए सुना जा रहा है कि वह BJP के वरिष्ठ नेताओं के संपर्क में थे और उन्होंने तृणमूल को हराने के लिए 1,000 करोड़ रुपये की डील की थी। लाइव हिन्दुस्तान इस तरह के किसी वीडियो की पुष्टि नहीं करता है।

आपको नहीं पता ममता की क्षमता

बहरहाल, एक तरफ जहां राज्य की सत्ताधारी TMC ने स्टिंग में किए गए दावों को लेकर कबीर और BJP दोनों की आलोचना की है, वहीं दोनों पक्षों ने आरोप लगाया कि यह राजनीतिक फ़ायदे के लिए फैलाया जा रहा एक फर्जी वीडियो है। इसी कड़ी में शाह ने पत्रकारों के सवाल के जवाब में कहा और दावा किया कि पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ऐसे 2,000 वीडियो बना सकती हैं। शाह ने कहा, “आपलोग ममता दीदी की क्षमताओं से अनजान हो। ममता दीदी ऐसे 2000 वीडियो बना सकती हैं। हुमायूं कबीर और भारतीय जनता पार्टी साउथ पोल और नॉर्थ पोल हैं, कभी हमारा मेल नहीं हो सकता। हम बंगाल में बाबरी मस्जिद बनाने वाले के साथ बैठने के बजाय और 20 साल विपक्ष में बैठना पसंद करेंगे।”

100 करोड़ रुपये के भी हकदार नहीं

शाह से पहले बंगाल भाजपा के पूर्व अध्यक्ष दिलीप घोष ने हुमायूं कबीर का मज़ाक उड़ाते हुए कहा था कि वह 100 करोड़ रुपये के भी हकदार नहीं हैं, 1,000 करोड़ रुपये की बात तो छोड़ ही दीजिए। दूसरी तरफ, आम जनता उन्नयन पार्टी के प्रमुख कबीर ने दावा किया कि यह वीडियो उन्हें बदनाम करने के लिए AI का इस्तेमाल करके बनाया गया था। उन्होंने यह भी धमकी दी है कि अगर तृणमूल कांग्रेस कोई सबूत पेश नहीं कर पाई, तो वह उसके खिलाफ मानहानि का मुकदमा दायर करेंगे। कबीर ने कहा, "यह तृणमूल की तरफ से मुझे बदनाम करने की एक कोशिश है, क्योंकि उन्हें मुस्लिम वोट खोने का डर है। उन्होंने ऐसा नकली वीडियो जारी करके समुदाय का अपमान किया है, जिसमें AI के ज़रिए कुछ बयान डालकर मुसलमानों की भावनाओं का मज़ाक उड़ाया गया है।"

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लेखक के बारे में

Pramod Praveen

प्रमोद कुमार प्रवीण देश-विदेश की समसामयिक घटनाओं और राजनीतिक हलचलों पर चिंतन-मंथन करने वाले और पैनी पकड़ रखने वाले हैं। ईटीवी से पत्रकारिता में करियर की शुरुआत की। कुल करीब दो दशक का इलेक्ट्रॉनिक, प्रिंट और डिजिटल मीडिया में काम करने का अनुभव रखते हैं। संप्रति लाइव हिन्दुस्तान में विगत तीन से ज्यादा वर्षों से समाचार संपादक के तौर पर कार्यरत हैं और अमूमन सांध्यकालीन पारी में बहुआयामी पत्रकारीय भूमिका का निर्वहन कर रहे हैं। हिन्दुस्तान टाइम्स ग्रुप से पहले NDTV, जनसत्ता, ईटीवी, इंडिया न्यूज, फोकस न्यूज, साधना न्यूज और ईटीवी में कार्य करने का अनुभव है। कई संस्थानों में सियासी किस्सों का स्तंभकार और लेखक रहे हैं। विश्वविद्यालय स्तर से लेकर कई अकादमिक, शैक्षणिक और सामाजिक संगठनों द्वारा विभिन्न मंचों पर अकादमिक और पत्रकारिता में उल्लेखनीय योगदान के लिए सम्मानित भी हुए हैं। रुचियों में फिल्में देखना और पढ़ना-पढ़ाना पसंद, सामाजिक और जनसरोकार के कार्यों में भी रुचि है।

अकादमिक योग्यता: भूगोल में जलवायु परिवर्तन जैसे गंभीर और संवेदनशील विषय पर पीएचडी उपाधिधारक हैं। इसके साथ ही पत्रकारिता एवं जनसंचार में स्नातकोत्तर भी हैं। पीएचडी शोध का विषय- 'मध्य गंगा घाटी में जलवायु परिवर्तन-एक भौगोलिक अध्ययन' रहा है। शोध के दौरान करीब दर्जन भर राष्ट्रीय और अंततराष्ट्रीय सम्मेलनों में शोध पत्र पढ़ने और प्रस्तुत करने का अनुभव है। भारतीय विज्ञान कांग्रेस में भी शोध पोस्टर प्रदर्शनी का चयन हो चुका है। शोध पर आधारित एक पुस्तक के लेखक हैं। पुस्तक का नाम 'मध्य गंगा घाटी में जलवायु परिवर्तन' है। पत्रकारिता में आने से पहले महाविद्यालय स्तर पर शिक्षण कार्य भी कर चुके हैं।

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