Hindi Newsपश्चिम बंगाल न्यूज़SIR in Bengal deletion of 1 2 crore illegal voters Shantanu Thakur Mamata furious EC clarification
बंगाल में 1.2 करोड़ अवैध मतदाता हटाए जा सकते हैं, केंद्रीय मंत्री का दावा; ममता भड़कीं, EC की सफाई

बंगाल में 1.2 करोड़ अवैध मतदाता हटाए जा सकते हैं, केंद्रीय मंत्री का दावा; ममता भड़कीं, EC की सफाई

संक्षेप:

निर्वाचन आयोग ने तृणमूल कांग्रेस की आशंकाओं को खारिज करते हुए बृहस्पतिवार को कहा कि पश्चिम बंगाल में विशेष गहन पुनरीक्षण के दौरान मतदाता सूची से किसी भी वैध मतदाता का नाम नहीं हटाया जाएगा।

Oct 10, 2025 06:31 am ISTAmit Kumar पीटीआई, कोलकाता
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केंद्रीय मंत्री और भाजपा सांसद शांतनु ठाकुर ने गुरुवार को दावा किया कि पश्चिम बंगाल में चुनाव आयोग की स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) प्रक्रिया के तहत करीब 1.2 करोड़ "अवैध मतदाताओं" को मतदाता सूची से हटाया जा सकता है। हालांकि, उनके इस बयान ने राजनीतिक हलचल तेज कर दी है। तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) ने चेतावनी दी है कि इस कदम से सबसे ज्यादा नुकसान मतुआ शरणार्थी समुदाय को होगा।

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उत्तरी 24 परगना जिले के गैघाटा में आयोजित विजय सम्मेलन कार्यक्रम में बोलते हुए शांतनु ठाकुर ने कहा कि SIR से मतदाता सूची पारदर्शी बनेगी और “रोहिंग्या, घुसपैठिए और फर्जी मतदाता” हट जाएंगे। बता दें कि शांतनु ठाकुर खुद मतुआ समुदाय के प्रमुख नेता हैं।

उन्होंने कहा, “अगर SIR ठीक से लागू किया गया, तो टीएमसी सरकार के पास कोई बचाव का रास्ता नहीं बचेगा। कम से कम एक करोड़ से 1.2 करोड़ ऐसे लोग जो अवैध रूप से मतदाता सूची में शामिल हैं, उन्हें हटा दिया जाएगा। रोहिंग्या, घुसपैठिए और फर्जी मतदाता अब वोट नहीं डाल पाएंगे।”

उन्होंने कहा कि “साफ-सुथरी” मतदाता सूची से ही बंगाल में असली परिवर्तन का रास्ता खुलेगा। मंत्री ने कहा, “जो लोग सच में परिवर्तन चाहते हैं, जो राज्य में उद्योग, शिक्षा और बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं चाहते हैं, वही मतदान करेंगे। उनकी बदौलत भाजपा सरकार बनाएगी।”

बाद में पत्रकारों से बातचीत में ठाकुर ने कहा कि संशोधित मतदाता सूची से पारदर्शिता आएगी और यह साफ हो जाएगा कि कितने रोहिंग्या, बांग्लादेशी और फर्जी मतदाता हटे हैं तथा कितने शरणार्थी प्रभावित हुए हैं। उन्होंने कहा, “शरणार्थियों को बांग्लादेश नहीं भेजा जाएगा। उन्हें नागरिकता मिलने के बाद वे दोबारा वैध मतदाता बन जाएंगे।”

बंगाल में एसआईआर के दौरान किसी भी वैध मतदाता का नाम नहीं हटाया जाएगा: निर्वाचन आयोग

निर्वाचन आयोग ने तृणमूल कांग्रेस की आशंकाओं को खारिज करते हुए बृहस्पतिवार को कहा कि पश्चिम बंगाल में विशेष गहन पुनरीक्षण के दौरान मतदाता सूची से किसी भी वैध मतदाता का नाम नहीं हटाया जाएगा। मुख्य निर्वाचन अधिकारी मनोज कुमार अग्रवाल ने पूर्व मेदिनीपुर जिले के कोलाघाट में मतदाता सूची संशोधन पर आयोजित एक उच्चस्तरीय बैठक के बाद यह बात कही। बैठक में उप चुनाव आयुक्त ज्ञानेश भारती सहित चार सदस्यीय केंद्रीय प्रतिनिधिमंडल ने एसआईआर की तैयारियों की समीक्षा की। अग्रवाल ने कहा, ‘‘किसी भी वैध मतदाता का नाम सूची से बाहर नहीं किया जाएगा। कानून में जो भी कहा गया है, उसका पालन किया जाएगा।’’ अग्रवाल ने कहा, ‘‘जिन लोगों के नाम 2002 एसआईआर में शामिल थे और जो सरकारी अधिकारी हैं, उन्हें कोई दस्तावेज जमा करने की आवश्यकता नहीं होगी।’’

निर्वाचन आयोग के अधिकारी राज्य के अधिकारियों को धमका रहे हैं, सहन नहीं किया जायेगा: ममता

पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने बृहस्पतिवार को आरोप लगाया कि निर्वाचन आयोग के अधिकारी उनकी सरकार के अधिकारियों को “धमका” रहे हैं और विधानसभा चुनाव की तारीखों की घोषणा से पहले ही ‘‘राजनीतिक प्रभाव के तहत काम’’ कर रहे हैं। बनर्जी ने भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) पर मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) के नाम पर ‘‘आग से खेलने’’ का आरोप लगाया और चेतावनी दी कि मतदाता सूची से छेड़छाड़ का कोई भी प्रयास ‘‘लोकतंत्र के साथ विश्वासघात’’ होगा।

पश्चिम बंगाल सचिवालय में संवाददाता सम्मेलन के दौरान बनर्जी ने कहा, ‘‘निर्वाचन आयोग राज्य सरकार के अधिकारियों को धमका रहा है। हम इसे बर्दाश्त नहीं करेंगे।’’ तृणमूल कांग्रेस की प्रमुख ने आश्चर्य जताया कि राज्य का दौरा करने वाले निर्वाचन आयोग के अधिकारी सरकारी अधिकारियों को कैसे तलब कर सकते हैं, जबकि चुनाव की तारीखों की घोषणा अभी तक नहीं हुई है। राज्य में अगले वर्ष विधानसभा चुनाव होने हैं।

पश्चिम बंगाल के मुख्य निर्वाचन अधिकारी मनोज अग्रवाल का स्पष्ट रूप से जिक्र करते हुए बनर्जी ने दावा किया कि राज्य में एसआईआर प्रक्रिया की निगरानी कर रहे एक निर्वाचन आयोग अधिकारी पर “खुद कई आरोप हैं” और वह “भ्रष्ट अधिकारियों की नियुक्ति कर रहे हैं।”

उन्होंने दावा किया, ‘‘उन पर खुद भ्रष्टाचार का आरोप है और एसआईआर के बहाने वोट काटने की साजिश हो रही है; मेरे पास सबूत हैं।’’ उन्होंने कहा, ‘‘मुझे उम्मीद है कि वह देश और लोकतंत्र के साथ विश्वासघात नहीं करेंगे।’’ बनर्जी ने दावा किया, ‘‘यह एसआईआर वैसा नहीं है जैसा दिखता है। इसका इस्तेमाल पश्चिम बंगाल में एनआरसी (राष्ट्रीय नागरिक पंजी) जैसी प्रक्रिया को लागू करने के लिए एक आवरण के रूप में किया जा रहा है।’’

टीएमसी का पलटवार-‘सबसे ज्यादा नुकसान भाजपा समर्थक मतुआओं को होगा’

भाजपा सांसद के इन बयानों पर टीएमसी सांसद और मतुआ नेता ममता बाला ठाकुर, जो शांतनु ठाकुर की बुआ भी हैं, ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा, “SIR का सबसे ज्यादा नुकसान मतुआ शरणार्थियों को होगा। जिन लोगों ने भाजपा को वोट दिया, उन्हीं के नाम मतदाता सूची से गायब होंगे। टीएमसी को कोई नुकसान नहीं होगा, बल्कि हमारी सीटें बढ़ेंगी।"

ममता बाला ठाकुर ने भाजपा नेतृत्व पर मतदाताओं और शरणार्थियों को गुमराह करने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा, “भाजपा नेतृत्व और गृह मंत्री को पहले यह तय करना चाहिए कि वे वास्तव में चाहते क्या हैं। उन्होंने लोगों, खासकर शरणार्थियों, को पूरी तरह भ्रमित कर दिया है।”

राजनीतिक टकराव के केंद्र में SIR

संभावित स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) प्रक्रिया पश्चिम बंगाल में एक नए राजनीतिक विवाद का केंद्र बन गई है। टीएमसी का आरोप है कि चुनाव आयोग भाजपा के दबाव में काम कर रहा है और 2026 के विधानसभा चुनावों से पहले वैध मतदाताओं के नाम हटाने की साजिश चल रही है। वहीं भाजपा का कहना है कि यह कदम राज्य की मतदाता सूची को “फर्जी और अवैध नामों” से मुक्त करने के लिए जरूरी है। मतुआ समुदाय, जो मुख्यतः बांग्लादेश से आए हिंदू शरणार्थियों का समूह है, वह उत्तर 24 परगना और नादिया जिलों में निर्णायक मतदाता समूह माना जाता है। यही वजह है कि भाजपा और टीएमसी, दोनों दल इस समुदाय को अपने पाले में रखने की कोशिशों में जुटे हुए हैं।

Amit Kumar

लेखक के बारे में

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अमित कुमार एक अनुभवी पत्रकार हैं, जिन्हें मीडिया इंडस्ट्री में नौ वर्षों से अधिक का अनुभव है। वर्तमान में वह लाइव हिन्दुस्तान में डिप्टी चीफ कंटेंट प्रोड्यूसर के रूप में कार्यरत हैं। हिन्दुस्तान डिजिटल के साथ जुड़ने से पहले अमित ने कई प्रतिष्ठित मीडिया संस्थानों में काम किया है। अमित ने अपने करियर की शुरुआत अमर उजाला (डिजिटल) से की। इसके अलावा उन्होंने वन इंडिया, इंडिया टीवी और जी न्यूज जैसे मीडिया हाउस में काम किया है, जहां उन्होंने न्यूज रिपोर्टिंग व कंटेंट क्रिएशन में अपनी स्किल्स को निखारा। अमित ने भारतीय जनसंचार संस्थान (IIMC), दिल्ली से हिंदी जर्नलिज्म में पीजी डिप्लोमा और गुरु जंभेश्वर यूनिवर्सिटी, हिसार से मास कम्युनिकेशन में मास्टर (MA) किया है। अपने पूरे करियर के दौरान, अमित ने डिजिटल मीडिया में विभिन्न बीट्स पर काम किया है। अमित की एक्सपर्टीज पॉलिटिक्स, इंटरनेशनल, स्पोर्ट्स जर्नलिज्म, इंटरनेट रिपोर्टिंग और मल्टीमीडिया स्टोरीटेलिंग सहित विभिन्न क्षेत्रों में फैली हुई है। अमित नई मीडिया तकनीकों और पत्रकारिता पर उनके प्रभाव को लेकर काफी जुनूनी हैं। और पढ़ें

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