फौरन खाली कर दें पर्यटक स्थल, तट और रिसॉर्ट; EC ने बंगाल में पहली बार दिए ऐसे आदेश, कब तक रहेगा लागू?

Pramod Praveen हिन्दुस्तान टाइम्स, कोलकाता
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West Bengal Poll Updates: मुख्य निर्वाचन अधिकारी (CEO) के कार्यालय के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि पर्यटकों को भी इलाका खाली करने के लिए कहने के पीछे का तर्क यह आशंका है कि कुछ बाहरी लोग अशांति फैला सकते हैं।

फौरन खाली कर दें पर्यटक स्थल, तट और रिसॉर्ट; EC ने बंगाल में पहली बार दिए ऐसे आदेश, कब तक रहेगा लागू?

West Bengal Poll Updates EC order: पश्चिम बंगाल में पहले चरण के विधानसभा चुनावों से पहले चुनाव आयोग ने पहली बार एक खास किस्म का आदेश जारी किया है। इसके तहत आयोग ने बंगाल के पर्यटक स्थलों को खाली करने का आदेश दिया है। आयोग के निर्देश के मुताबिक, पर्यटकों और गैर-निवासियों को पूर्वी मेदिनीपुर जिले के लोकप्रिय तटीय स्थलों यानी दीघा, मंदारमणि, ताजपुर, उदयपुर और शंकरपुर को खाली करने का आदेश दिया है। बंगाल के मुख्य निर्वाचन अधिकारी के कार्यालय द्वारा जारी एक आदेश में होटलों को भी निर्देश दिया गया है कि वे यह सुनिश्चित करें कि उनके कमरों में कोई भी ऐसा व्यक्ति न ठहरे जो उस जिले का निवासी न हो। आदेश में कहा गया है कि यह व्यवस्था मंगलवार शाम 6 बजे से लेकर 23 अप्रैल को मतदान समाप्त होने तक प्रभावी रहेगी।

पूर्वी मेदिनीपुर का तटीय इलाका साल भर पर्यटकों को आकर्षित करता है और यह पश्चिम बंगाल के सबसे अधिक देखे जाने वाले स्थलों में से एक है। अब आयोग के इस आदेश से, इस पूरे क्षेत्र में 48 घंटों के लिए पर्यटकों की गतिविधियाँ प्रभावी रूप से बंद हो जाएंग। यह एक असाधारण रूप से व्यापक प्रतिबंध है जो केवल मतदान से जुड़ी बुनियादी सुविधाओं तक ही सीमित न रहकर अब आतिथ्य (हॉस्पिटैलिटी) क्षेत्र को भी प्रभावित करने वाला है।

प्रचारकों के रुकने पर भी पाबंदी

चुनाव निकाय के इस अभूतपूर्व आदेश में राजनीतिक दलों के प्रचारकों को भी इस अवधि के दौरान क्षेत्र में रुकने से स्पष्ट रूप से प्रतिबंधित किया गया है। इसमें कहा गया है कि आदेश का उल्लंघन करने पर उसे 'भारतीय न्याय संहिता' की धारा 223 के तहत दंडनीय अपराध माना जाएगा; इस धारा के तहत किसी लोक सेवक द्वारा जारी आदेश की अवहेलना करने पर 6 से 12 महीने तक की जेल की सजा का प्रावधान है।

सोमवार रात से ही लाउडस्पीकर से अनाउंसमेंट

चुनाव निकाय के आधिकारिक आदेश के बाद, दीघा, दीघा मोहना और मंदारमणि तटरेखा के अंतर्गत आने वाले पुलिस थानों ने सोमवार रात से ही लाउडस्पीकर के माध्यम से सार्वजनिक घोषणाएँ करनी शुरू कर दी है, जिसमें पर्यटकों से मंगलवार शाम 6 बजे तक इन स्थलों को खाली करने का आग्रह किया जा रहा था। होटलों को भी निर्देश दिया गया है कि वे अपने परिसर में किसी भी बाहरी व्यक्ति को न रुकने दें। इस आदेश के अंतर्गत आने वाले सभी पर्यटक स्थल रामनगर विधानसभा क्षेत्र में पड़ते हैं; पिछली विधानसभा में इस क्षेत्र का प्रतिनिधित्व तृणमूल कांग्रेस के तीन बार के विधायक अखिल गिरि ने किया था।

अपनी तरह का पहला आदेश

मुख्य निर्वाचन अधिकारी (CEO) के कार्यालय के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया, "वास्तविक पर्यटकों को भी इलाका खाली करने के लिए कहने के पीछे का तर्क यह आशंका है कि कुछ बाहरी लोग, जो अशांति फैलाने का इरादा रखते हैं, पर्यटन की आड़ में जिले में प्रवेश कर सकते हैं और मतदान के दौरान उपद्रव भड़का सकते हैं।" पर्यटकों को इलाका खाली करने का यह आदेश, ECI द्वारा किसी विधानसभा चुनाव के दौरान जारी किया गया अपनी तरह का पहला आदेश है।

Pramod Praveen

लेखक के बारे में

Pramod Praveen

प्रमोद कुमार प्रवीण देश-विदेश की समसामयिक घटनाओं और राजनीतिक हलचलों पर चिंतन-मंथन करने वाले और पैनी पकड़ रखने वाले हैं। ईटीवी से पत्रकारिता में करियर की शुरुआत की। कुल करीब दो दशक का इलेक्ट्रॉनिक, प्रिंट और डिजिटल मीडिया में काम करने का अनुभव रखते हैं। संप्रति लाइव हिन्दुस्तान में विगत तीन से ज्यादा वर्षों से समाचार संपादक के तौर पर कार्यरत हैं और अमूमन सांध्यकालीन पारी में बहुआयामी पत्रकारीय भूमिका का निर्वहन कर रहे हैं। हिन्दुस्तान टाइम्स ग्रुप से पहले NDTV, जनसत्ता, ईटीवी, इंडिया न्यूज, फोकस न्यूज, साधना न्यूज और ईटीवी में कार्य करने का अनुभव है। कई संस्थानों में सियासी किस्सों का स्तंभकार और लेखक रहे हैं। विश्वविद्यालय स्तर से लेकर कई अकादमिक, शैक्षणिक और सामाजिक संगठनों द्वारा विभिन्न मंचों पर अकादमिक और पत्रकारिता में उल्लेखनीय योगदान के लिए सम्मानित भी हुए हैं। रुचियों में फिल्में देखना और पढ़ना-पढ़ाना पसंद, सामाजिक और जनसरोकार के कार्यों में भी रुचि है।

अकादमिक योग्यता: भूगोल में जलवायु परिवर्तन जैसे गंभीर और संवेदनशील विषय पर पीएचडी उपाधिधारक हैं। इसके साथ ही पत्रकारिता एवं जनसंचार में स्नातकोत्तर भी हैं। पीएचडी शोध का विषय- 'मध्य गंगा घाटी में जलवायु परिवर्तन-एक भौगोलिक अध्ययन' रहा है। शोध के दौरान करीब दर्जन भर राष्ट्रीय और अंततराष्ट्रीय सम्मेलनों में शोध पत्र पढ़ने और प्रस्तुत करने का अनुभव है। भारतीय विज्ञान कांग्रेस में भी शोध पोस्टर प्रदर्शनी का चयन हो चुका है। शोध पर आधारित एक पुस्तक के लेखक हैं। पुस्तक का नाम 'मध्य गंगा घाटी में जलवायु परिवर्तन' है। पत्रकारिता में आने से पहले महाविद्यालय स्तर पर शिक्षण कार्य भी कर चुके हैं।

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