Nandigram Results: नंदीग्राम का संग्राम जीत गए शुभेंदु अधिकारी, भवानीपुर में भी ममता दीदी को हराया
नंदीग्राम पर शुभेंदु अधिकारी और उनके परिवार का लंबे समय से प्रभाव रहा है। इसके अलावा उन्हें जमीनी नेता के तौर पर देखा जाता है। चुनाव नतीजों से उन्होंने एक बार फिर साबित किया है। उन्हें सीएम की रेस में माना जा रहा है और वह नंदीग्राम के अलावा भवानीपुर से भी जीत गए हैं।

पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव के नतीजे चौंकाने वाले रहे हैं। 15 साल से सत्ता पर काबिज रहीं टीएमसी की नेता ममता बनर्जी की विदाई हो गई है। यही नहीं उन्हें भवानीपुर सीट से हार का भी सामना करना पड़ा है। उन्हें शुभेंदु अधिकारी ने मात दी है। इसके अलावा अधिकारी को नंदीग्राम से भी जीत मिली है, जहां उन्होंने 2021 में ममता बनर्जी को हराया है। 19 राउंड की काउंटिंग के बाद नतीजे घोषित किए गए हैं और शुभेंदु अधिकारी कुल 9 हजार वोटों से जीत गए हैं। उन्हें कुल 127301 वोट मिले हैं, जबकि उनके मुकाबले उतरे टीएमसी के पबित्रा कर को 117636 वोट ही हासिल हुए।
भाजपा को अब तक आए रुझानों में 207 सीटों पर बढ़त हासिल है। माना जा रहा है कि कम से कम 200 सीटें भाजपा जीत ही जाएगी और यह उसके लिए ऐतिहासिक मौका है। दशकों की मेहनत के बाद वह पहली बार बंगाल में जीत हासिल कर रही है। बता दें कि नंदीग्राम से ही 2021 में भी शुभेंदु अधिकारी उतरे थे और जीत हासिल की थी। इसी सीट पर उन्होंने ममता बनर्जी को हराया था। ऐसे में यह सीट अहम हो जाती है।
नंदीग्राम पर शुभेंदु अधिकारी और उनके परिवार का लंबे समय से प्रभाव रहा है। इसके अलावा उन्हें जमीनी नेता के तौर पर देखा जाता है। नंदीग्राम की सीट इसलिए भी खास रही है क्योंकि यहीं से छेड़े गए आंदोलन के चलते ममता ने लेफ्ट के शासन को उखाड़ फेंका था और बंगाल की सत्ता हासिल की थी।
इस तरह नंदीग्राम का बंगाल की राजनीति में प्रतीकात्मक महत्व है तो सियासी रणनीति के लिहाज से भी अहम है। 2021 के चुनाव से कुछ महीने पहले ही शुभेंदु अधिकारी भाजपा में आए थे और 1956 वोटों से असेंबली इलेक्शन जीत गए थे। हालांकि टीएमसी ने राज्य में 48 फीसदी वोट पाकर 215 सीटें जीत ली थीं। इस बार भले ही अधिकारी को उनके ही करीबी के जरिए टीएमसी ने घेरने की कोशिश की है, लेकिन शुभेंदु की स्थिति कमजोर नहीं है।
वह भाजपा के एक सीनियर नेता होने के साथ ही नंदीग्राम में लोकप्रिय भी हैं। उनकी यह ताकत भाजपा के चलते नहीं बल्कि निजी तौर पर मानी जाती है। उन्हें जमीनी तौर पर सभी से जुड़ा नेता माना जाता है। संगठन में उनकी ताकत ऐसी है कि विधानसभा के एक-एक कार्यकर्ता से उनका सीधा संवाद है। पबित्रा कर को टीएमसी ने इसी रणनीति के तहत उतारा है क्योंकि वह भी यहीं के रहने वाले हैं और जमीनी पकड़ के मामले में मजबूत हैं। ऐसे में देखना होगा कि पबित्रा कर शुभेंदु को कैसी टक्कर दे पाते हैं।


