पश्चिम बंगाल में मीर जाफर के वंशजों के नाम वोटर लिस्ट से कटे, क्या छोड़ना पड़ेगा देश?
मुर्शिदाबाद के लालबाग स्थित नवा आदर्श हाई स्कूल के बूथ नंबर 121 से करीब 346 मतदाताओं के नाम सूची से हटा दिए गए हैं, जिनमें नवाब खानदान के कई सदस्य शामिल हैं। मीर जाफर की 15वीं पीढ़ी के वंशज और खुद को छोटे नवाब कहलाने वाले सैयद रजा अली मीरजा चुनाव के दिन पैदल ही अपने मतदान बूथ तक जाएंगे।

पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में सबसे हॉट मुद्दा SIR है। इसके पीछे की वजह कइयों का वोटर लिस्ट में नाम न होना। यही कारण है कि सत्ताधारी पार्टी टीएमसी खुलकर चुनाव आयोग के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। विरोध-प्रदर्शन के बीच अब जो खबर सामने आई है, वह हैरान करने वाली है। रिपोर्ट के अनुसार, मीर जाफर के वंशजों का भी नाम वोटर लिस्ट में नहीं है। वहीं, न्यायाधिकरणों में अपीलों का निपटारा होने की संभावना कम दिखने के कारण मीर जाफर के वंशजों समेत हजारों मतदाताओं ने चुनाव के दिन मतदान केंद्रों पर पहुंचकर अपने सभी दस्तावेज साथ लेकर विरोध दर्ज कराने के लिए तैयारी कर रहे हैं।
जानकारी के अनुसार, मुर्शिदाबाद के लालबाग स्थित नवा आदर्श हाई स्कूल के बूथ नंबर 121 से करीब 346 मतदाताओं के नाम सूची से हटा दिए गए हैं, जिनमें नवाब खानदान के कई सदस्य शामिल हैं। मीर जाफर की 15वीं पीढ़ी के वंशज और खुद को 'छोटे नवाब' कहलाने वाले सैयद रजा अली मीरजा चुनाव के दिन पैदल ही अपने मतदान बूथ तक जाएंगे। उन्होंने कहा कि अगर पीठासीन अधिकारी अनुमति देते हैं तो मैं वोट डालूंगा, वरना घर लौट आऊंगा। मीरजा ने बताया कि इस साल उनके मतदान करने की उम्मीद बहुत कम रह गई है।
बता दें कि उनके बेटे सैयद मोहम्मद फहीम मीरजा, जो मुर्शिदाबाद नगरपालिका के वार्ड 10 से तृणमूल कांग्रेस के पार्षद हैं, उनके नाम भी सूची से हटाए गए हैं। परिवार का दावा है कि उन्होंने सभी जरूरी दस्तावेज जमा किए थे और हर सुनवाई में उपस्थित रहे, लेकिन अब बहाली पूरी तरह न्यायाधिकरण पर निर्भर है। टीओआई से बात करते हुए 80 वर्षीय सैयद रजा अली मीरजा ने कहा कि जिला मजिस्ट्रेट और जिला चुनाव अधिकारी आर. अर्जुन ने मुझे बताया कि मामला अब अदालत में है, लेकिन लंबी लाइन और सीमित समय को देखते हुए यह प्रक्रिया असंभव-सी लग रही है। उन्होंने आगे कहा कि इस उम्र में लंबी लाइनों में खड़ा होना मेरे लिए मुश्किल है। उन्होंने विडंबना भरे अंदाज में कहा कि एक समय था जब हमारे पूर्वज अपनी प्रजा का न्याय करते थे, आज हम खुद न्याय के कटघरे में खड़े हैं और बहिष्कार किए जा रहे हैं।
और लोगों का भी कटा है नाम
ऐसा नहीं है कि सिर्फ मीर जाफर के वंशजों का ही नाम कटा है। चुनाव आयोग के अनुसार, पश्चिम बंगाल में विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) अभियान के बाद मतदाता सूची से करीब 91 लाख मतदाताओं के नाम हटा दिए गए हैं। निर्वाचन आयोग के आंकड़ों के अनुसार, न्यायिक अधिकारियों द्वारा की गई जांच में इन 60.06 लाख में से 27.16 लाख 'विचाराधीन' मतदाताओं के नाम हटा दिए गए। आंकड़ों से पता चलता है कि 28 फरवरी को एसआईआर के बाद प्रकाशित मसौदा मतदाता सूचियों के बाद न्यायिक जांच के दायरे में आए लगभग 45.22 प्रतिशत नाम हटा दिए गए। वहीं, इस श्रेणी के 32.68 लाख से अधिक मतदाताओं को बरकरार रखते हुए अंतिम सूची में शामिल किया गया है।
आयोग के आंकड़ों से पता चला कि सबसे अधिक नाम मुस्लिम बहुल मुर्शिदाबाद जिले में हटाए गए, जहां न्यायिक जांच के तहत 11.01 लाख नामों में से 4.55 लाख से अधिक नाम मतदाता सूची से हटा दिए गए। इस तरह, जिले में न्यायिक जांच के तहत हटाए गए नामों की संख्या लगभग 41.33 प्रतिशत है। बांग्लादेश की सीमा से लगे उत्तर 24 परगना जिले में भी मतदाता सूची से बड़ी संख्या में नाम हटाए गए। यहां जांच के दायरे में आए 5.91 लाख मतदाताओं में से 3.25 लाख से अधिक मतदाता पात्र नहीं पाए गए। मालदा में न्यायिक जांच के दायरे में आए 8.28 लाख मतदाताओं में से 2.39 लाख से अधिक मतदाताओं के नाम हटा दिए गए।
आंकड़ों के मुताबिक, सुनवाई के बाद दक्षिण 24 परगना जिले में हटाए गए नामों की संख्या लगभग 2.23 लाख, पूर्वी बर्धमान में 2.09 लाख और नदिया में 2.98 लाख रही। प्रतिशत के हिसाब से, नदिया और उत्तर 24 परगना जिलों में सुनवाई के बाद हटाए गए नामों की संख्या क्रमशः 77.86 प्रतिशत और 55.08 प्रतिशत रही। माना जाता है कि इन दोनों जिलों में हिंदू शरणार्थी मतुआ समुदाय के सदस्यों की अच्छी खासी संख्या है। कूच बिहार जिले में विचाराधीन 2.38 लाख मतदाताओं में से 50 प्रतिशत से अधिक यानी 1.2 लाख से ज्यादा नाम अंतिम मतदाता सूची से हटा दिए गए। इस जिले को राजबंशी समुदाय का प्रमुख क्षेत्र माना जाता है।
कोलकाता दक्षिण में 28,000 से अधिक मतदाताओं के नाम हटाए गए, जहां मुख्यमंत्री ममता बनर्जी का भवानीपुर विधानसभा क्षेत्र मौजूद है। सुनवाई के दौरान हटाए गए नामों का प्रतिशत 36.19 प्रतिशत रहा। कोलकाता उत्तर में जांच के दायरे में आए करीब 39,000 मतदाता मतदान के लिए पात्र नहीं पाए गए, जिससे वहां हटाए गए नामों का प्रतिशत लगभग 64 प्रतिशत रहा।
तो मीर जाफर के वंशजों को छोड़ना होगा देश?
अब सवाल खड़ा हो रहा है कि वोटर लिस्ट में नाम नहीं होने पर क्या मीर जाफर के वंशजों को देश छोड़ना होगा? इस सवाल का जवाब है नहीं। अधिकारियों का कहना है कि मतदाता सूची से किसी व्यक्ति का नाम हटाने का मतलब यह बिल्कुल नहीं है कि उसकी नागरिकता समाप्त हो गई है या उसे देश छोड़ना पड़ेगा। अधिकारियों के मुताबिक, मतदाता सूची केवल मतदान के अधिकार से संबंधित होती है। यदि किसी का नाम वोटर लिस्ट में नहीं है, तो वह चुनाव में वोट डालने का अधिकार खो देता है, लेकिन उसकी भारतीय नागरिकता पर कोई असर नहीं पड़ता। अधिकारियों ने ये भी बताया कि जिन लोगों के नाम मतदाता सूची से हटा दिए गए हैं, उन्हें अपनी स्थिति साफ करने के लिए चुनावी ट्रिब्यूनल या संबंधित चुनावी अधिकारियों के पास अपील करना होगा। वहां वे जरूरी दस्तावेजों के आधार पर अपना नाम दोबारा मतदाता सूची में जुड़वा सकते हैं।
लेखक के बारे में
Devendra Kasyapदेवेन्द्र कश्यप पिछले 13 वर्षों से पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय हैं। अगस्त 2025 से वह लाइव हिन्दुस्तान (हिन्दुस्तान टाइम्स ग्रुप) में चीफ कंटेंट प्रोड्यूसर के पद पर कार्यरत हैं। संस्थान की होम टीम का वह एक अहम हिस्सा हैं। राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय घटनाक्रमों पर उनकी पैनी नजर रहती है। वायरल कंटेंट के साथ-साथ लीक से हटकर और प्रभावशाली खबरों में उनकी विशेष रुचि है।
देवेन्द्र ने अपने पत्रकारिता करियर की शुरुआत वर्ष 2013 में महुआ न्यूज से की। करियर के शुरुआती दौर में उन्होंने बिहार की राजधानी पटना में रिपोर्टिंग की। इस दौरान राजनीति के साथ-साथ क्राइम और शिक्षा बीट पर भी काम किया। इसके बाद उन्होंने जी न्यूज (बिहार-झारखंड) में अपनी सेवाएं दीं। वर्ष 2015 में ईनाडु इंडिया के साथ डिजिटल मीडिया में कदम रखा। इसके बाद राजस्थान पत्रिका, ईटीवी भारत और नवभारत टाइम्स ऑनलाइन जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों में कार्य किया।
मूल रूप से बिहार के भोजपुरी बेल्ट रोहतास जिले के रहने वाले देवेन्द्र कश्यप ने अपनी प्रारंभिक और उच्च शिक्षा पटना से प्राप्त की। उन्होंने पटना विश्वविद्यालय से राजनीति विज्ञान में स्नातक की डिग्री हासिल की और MCU भोपाल से पत्रकारिता में डिप्लोमा किया। वर्तमान में वह उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में प्रवास कर रहे हैं।
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