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बंगाल में बाबरी मस्जिद की नींव रखने वाले हुमायूं को खतरा, हैदराबाद से बुलाई सुरक्षा टीम; HC भी जाएंगे

बंगाल में बाबरी मस्जिद की नींव रखने वाले हुमायूं को खतरा, हैदराबाद से बुलाई सुरक्षा टीम; HC भी जाएंगे

संक्षेप:

पश्चिम बंगाल में हुमायूं कबीर को जान से मारने की धमकियां मिल रही हैं, जिसके चलते उन्होंने अपनी सुरक्षा बढ़ाने का निर्णय लिया है। बाबरी मस्जिद के मॉडल पर नई मस्जिद का शिलान्यास करने के बाद यह विवाद और बढ़ गया है।

Dec 12, 2025 07:30 am ISTAmit Kumar लाइव हिन्दुस्तान, कोलकाता
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पश्चिम बंगाल के मुर्शिदाबाद जिले में 6 दिसंबर को अयोध्या की बाबरी मस्जिद के मॉडल पर आधारित एक नई मस्जिद की नींव रखने वाले तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) के निलंबित विधायक हुमायूं कबीर को लगातार जान से मारने की धमकियां मिल रही हैं। राज्य के बाहर से आने वाले इन फोन कॉल्स ने उनकी सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ा दी है। धमकियों के मद्देनजर हुमायूं ने तत्काल प्रभाव से अपनी निजी सुरक्षा बढ़ाने का फैसला किया है और हैदराबाद से एक विशेष सुरक्षा टीम बुलाई है। इसके अलावा, वे कलकत्ता हाईकोर्ट का रुख करने की तैयारी में हैं, जहां से केंद्रीय सुरक्षा बलों की मांग करेंगे।

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हैदराबाद से सुरक्षा टीम हायर करने को लेकर हुमायूं कबीर ने इंडियन एक्सप्रेस से बातचीत में कहा- मुझे सिक्योरिटी चाहिए क्योंकि उत्तर प्रदेश, राजस्थान और महाराष्ट्र जैसे राज्यों से मुझे धमकी भरे कॉल आए हैं। मैं डरा हुआ नहीं हूं लेकिन मेरे समर्थक सुरक्षा बढ़ाने के लिए कह रहे हैं। मैंने हैदराबाद से प्राइवेट सिक्योरिटी हायर कर ली है और जल्द ही कलकत्ता हाई कोर्ट में और सिक्योरिटी के लिए अपील भी करूंगा।

इसके अलावा, हुमायूं कबीर ने मंगलवार को संवाददाताओं से बातचीत में कहा- मुझे राज्य के बाहर से लगातार धमकी भरे फोन आ रहे हैं। लोग कह रहे हैं कि वे मुझे जान से मार देंगे। टीएमसी सरकार ने अभी तक मेरी सरकारी सुरक्षा नहीं हटाई है, लेकिन मैं पश्चिम बंगाल पुलिस पर भरोसा नहीं कर पा रहा हूं। इसलिए, तत्काल उपाय के तौर पर मैंने हैदराबाद से 8 निजी सुरक्षाकर्मियों की एक टीम बुलाई है। ये लोग कल से मेरी सुरक्षा संभालेंगे। कबीर ने यह भी बताया कि उन्होंने राज्य सरकार, केंद्र सरकार और पुलिस को ईमेल के जरिए सुरक्षा बढ़ाने की गुहार लगाई है। अगर हाईकोर्ट नौशाद सिद्दीकी जैसे लोगों को 6-8 सुरक्षाकर्मी दे सकता है, तो मुझे क्यों नहीं? मैं अदालत जाकर केंद्रीय फोर्स की मांग करूंगा।

बाबरी मस्जिद शिलान्यास और विवाद

यह पूरा विवाद 6 दिसंबर को शुरू हुआ, जब 1992 में अयोध्या में बाबरी मस्जिद विध्वंस की बरसी पर हुमायूं कबीर ने मुर्शिदाबाद के रेजीनगर (बेलडांगा क्षेत्र) में एक नई मस्जिद का शिलान्यास किया। यह मस्जिद अयोध्या वाली बाबरी मस्जिद के डिजाइन पर आधारित बताई जा रही है, जिसका निर्माण तीन साल में पूरा होने का दावा किया गया है। कुल बजट करीब 300 करोड़ रुपये का है, जिसमें सऊदी अरब से आए मौलवियों की मौजूदगी और 60,000 पैकेट बिरयानी का इंतजाम भी शामिल था। समर्थकों ने सिर पर ईंटें रखकर जुलूस निकाला और 'अल्लाहु अकबर' के नारे लगाए।

कार्यक्रम के दौरान इलाके में भारी सुरक्षा व्यवस्था थी। प्रशासन ने रेजीनगर और बेलडांगा को हाई-सिक्योरिटी जोन घोषित कर दिया था। लगभग 3,000 पुलिसकर्मी, रैपिड एक्शन फोर्स (आरएएफ), बॉर्डर सिक्योरिटी फोर्स (बीएसएफ) और केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बल (सीएपीएफ) तैनात किए गए थे। राज्यपाल सी.वी. आनंद बोस ने शांति बनाए रखने की अपील की थी। कुछ लोगों ने कोलकाता हाईकोर्ट में निर्माण रोकने की याचिका दायर की, लेकिन कोर्ट ने हस्तक्षेप से इनकार कर दिया और शांति बनाए रखने की जिम्मेदारी राज्य सरकार पर डाल दी।

राजनीतिक प्रतिक्रियाएं और टीएमसी से निष्कासन

शिलान्यास के ऐलान के बाद ही हुमायूं कबीर को टीएमसी ने 4 दिसंबर को निलंबित कर दिया था। भाजपा ने इसे 'सांप्रदायिक ध्रुवीकरण' का प्रयास बताते हुए ममता बनर्जी सरकार पर निशाना साधा। हुमायूं ने शुरुआत में विधानसभा से इस्तीफा देने की बात कही थी, लेकिन दो दिन बाद यू-टर्न ले लिया। उन्होंने कहा- मैं इस्तीफा नहीं दूंगा, लेकिन टीएमसी ने सदन में मेरी सीटिंग अरेंजमेंट बदल दिया है। टीएमसी ने आरोप लगाया कि कबीर मस्जिद निर्माण के लिए फंडिंग जुटाने के बहाने सांप्रदायिक तनाव फैला रहे हैं। कबीर ने इसका खंडन किया और कहा कि यह एक धार्मिक आयोजन है, जिसमें कोई राजनीति नहीं है।

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धमकियों के चलते हुमायूं कबीर ने सुरक्षा बढ़ाने का निर्णय लिया।

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टीएमसी ने कबीर को निलंबित कर दिया, जिससे राजनीतिक विवाद और बढ़ा।

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बाबरी मस्जिद के मॉडल पर नई मस्जिद का निर्माण सांप्रदायिक तनाव का कारण बन सकता है।

Amit Kumar

लेखक के बारे में

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अमित कुमार एक अनुभवी पत्रकार हैं, जिन्हें मीडिया इंडस्ट्री में नौ वर्षों से अधिक का अनुभव है। वर्तमान में वह लाइव हिन्दुस्तान में डिप्टी चीफ कंटेंट प्रोड्यूसर के रूप में कार्यरत हैं। हिन्दुस्तान डिजिटल के साथ जुड़ने से पहले अमित ने कई प्रतिष्ठित मीडिया संस्थानों में काम किया है। अमित ने अपने करियर की शुरुआत अमर उजाला (डिजिटल) से की। इसके अलावा उन्होंने वन इंडिया, इंडिया टीवी और जी न्यूज जैसे मीडिया हाउस में काम किया है, जहां उन्होंने न्यूज रिपोर्टिंग व कंटेंट क्रिएशन में अपनी स्किल्स को निखारा। अमित ने भारतीय जनसंचार संस्थान (IIMC), दिल्ली से हिंदी जर्नलिज्म में पीजी डिप्लोमा और गुरु जंभेश्वर यूनिवर्सिटी, हिसार से मास कम्युनिकेशन में मास्टर (MA) किया है। अपने पूरे करियर के दौरान, अमित ने डिजिटल मीडिया में विभिन्न बीट्स पर काम किया है। अमित की एक्सपर्टीज पॉलिटिक्स, इंटरनेशनल, स्पोर्ट्स जर्नलिज्म, इंटरनेट रिपोर्टिंग और मल्टीमीडिया स्टोरीटेलिंग सहित विभिन्न क्षेत्रों में फैली हुई है। अमित नई मीडिया तकनीकों और पत्रकारिता पर उनके प्रभाव को लेकर काफी जुनूनी हैं। और पढ़ें

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