हिंदुत्व, टीएमसी के राजदार; बीजेपी ने शुभेंदु अधिकारी को ही क्यों चुना बंगाल का मुख्यमंत्री?

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पश्चिम बंगाल में बीजेपी ने शुभेंदु अधिकारी को मुख्यमंत्री पद के लिए चुना है। इसके पीछे एक बड़ी वजह दो-दो  बार ममता बनर्जी को उनकी ही  सीट पर हरा देना भी है। इसके अलावा हिंदुत्व की छवि की वजह से आरएसएस को भी वह पसंद हैं।

हिंदुत्व, टीएमसी के राजदार; बीजेपी ने शुभेंदु अधिकारी को ही क्यों चुना बंगाल का मुख्यमंत्री?

बंगाल में कभी ममता बनर्जी के करीबी और टीएमसी का बड़ा चेहरा रहे शुभेंदु अधिकारी बीजेपी के मुख्यमंत्री के तौर पर शपथ लेने जा रहे हैं। शुभेंदु अधिकारी ने मुख्यमंत्री ममता बनर्जी को हराकर अपनी मुख्यमंत्री की सीट पक्की कर ली थी। बंगाल में बीजेपी ने 293 में से 207 सीटें हासिल की है। एक सीट पर चुनाव 21 मई को होना है। जानकाररों का कहना है कि चुनाव में उनकी सफलता, जमीन पर प्रभाव, टीएमसी में अंदरखाने तक जानकारी और हिंदुत्व के मुद्दे पर मुखर होने के चलते उन्हें यह जिम्मेदारी दी जा रही है।

दो बार ममता बनर्जी की दो मात

शुभेंदु अधिकारी ने एक बार नहीं दो बार ममता बनर्जी को उन्हीं के सियासी गढ़ में मात दे चुके हैं। किसी मुख्यमंत्री को उसकी ही सीट पर हरा देना आसान बात तो नहीं होती। हालांकि शुभेंदु अधिकारी ने ऐसा कर दिखाया और फिर बेजीपी नेतृत्व ने भी उनके नाम पर मोहर मार दी। कोलकाता जिले की भवानीपुर सीट ममता बनर्जी का पुराना गढ़ रही है। नंदीग्राम में भी शुभेंदु अधिकारी ने ममता बनर्जी को 2021 में हराया था। इसके बाद वह लौटकर भवानीपुर आ गईं। इससे उन्होंने साबित कर दिया कि वह ममता बनर्जी को कहीं भी सीधी चुनौती दे सकते हैं। या यूं कहें कि बीजेपी को ममता बनर्जी का एक तगड़ा तोड़ मिल गया।

बीजेपी के वादे

राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि बीजेपी ने अपना वादे पूरे करने के लिए भी शुभेंदु अधिकारी को मुख्यमंत्री चुना है। उन्हें बंगालल में भी असम में हिमंत बिस्व करमा जैसा फायरब्रांड मुख्यमंत्री चाहिए। बीजेपी ने यह भी वादा किया था कि बंगाल का मुख्यमंत्री वही होगा जो कि बंगाल में ही जन्मा हो और माछ-भात खाता हो। घोषणापत्र में बीजेपी ने यूनिफॉर्म सिविल कोड और बांग्लादेशी घुसपैठियों को बाहर करने की भी बात कही थी। ऐसे में बीजेपी के पास शुभेंदु अधिकारी अच्छे विकल्प के रूप में सामने थे जो कि इन वादों को पूरा करने में बड़ी भूमिका निभा सकते हैं।

सरकार में अनुभव

शुभेंदु अधिकारी के पास सरकार में काम करने का भी अनुभव है। वह टीएमसी सरकार में वह मंत्री रह चुके हैं। बीजेपी के लोगों का कहना है कि सरकार बनने के बाद ही शुभेंदु अधिकारी ममता बनर्जी के खिलाफ श्वेतपत्र जारी करके एक जांच कमीशन बना सकते हैं। टीएमसी के कई नेताओं की जांच हो सकती है।

आरएसएस को भी पसंद

जानकारों का कहना है कि हिंदुत्व की छवि की वजह से शुभेंदु अधिकारी आरएसएस की भी पसंद हैं। 2024 में बांग्लादेश में हिंदुओँ पर हो रहे अत्याचार के खिलाफ वह लगातार आवाज उठा रहे थे। नंदीग्राम में उन्हें हिंदुत्व के रक्षक के तौर पर दिखाया गया। ऐसे में आरएसएस को भी लगता है कि वह हिंदुत्व के एजेंडे को भी पीछे नहीं छूटने देंगे।

शुभेंदु अधिकारी के पिता शिशिर अधिकारी भी दिग्गज राजनेता थे और वह केंद्र में मंत्री भी रह चुके हैं। उन्होंने अपनी राजनीति कि शुरुआत कांग्रेस की छात्र परिषद के साथ की थी। उस समय बंगाल में लेफ्ट का दबदबा था। बंगाल में टीएमसी की सरकार बनने के बाद साल 2000 में वह ममता बनर्जी के साथ चले गए। उन्होंने सीपीएम के पूर्व मेदनीपुर में चुनौती दी। 2020 में उन्होंने टीएमसी छोड़ी और बीजेपी का दामन थाम लिया।

Ankit Ojha

लेखक के बारे में

Ankit Ojha

विद्यालयी जीवन से ही कलात्मक अभिव्यक्ति, विचारशील स्वभाव और मिलनसार व्यक्तित्व और सामान्य के अंदर डुबकी लगाकर कुछ खास खोज लाने का कौशल पत्रकारिता के लिए अनुकूल साबित हुआ। अंकित ओझा एक दशक से डिजिटल पत्रकारिता के क्षेत्र में लगातार सक्रिय हैं। उत्तर प्रदेश के बाराबंकी के रहने वाले अंकित ओझा समाचारों की दुनिया में तथ्यों के महत्व के साथ ही संवेदनशीलता के पक्ष को साधने में निपुण हैं। पिछले चार साल से हिन्दुस्तान टाइम्स ग्रुप के 'लाइव हिन्दुस्तान' के लिए चीफ कॉन्टेंट प्रड्यूसर पद पर कार्य कर रहे हैं। इससे पहले 'टाइम्स ऑफ इंडिया' और 'इंडियन एक्सप्रेस' ग्रुप के साथ भी कार्य कर चुके हैं।


राष्ट्रीय, अंतरराष्ट्रीय, राज्य और सामाजिक सरोकारों की खबरों के संपादन में लंबा अनुभव होने के साथ ही अपने-आसपास की घटनाओं में समाचार तत्व निकालने की अच्छी समझ है। घटनाओं और समाचारों से संबंधित फैसले लेने और त्वरित समाचार प्रकाशित करने में विशेष योग्यता है। इसके अलावा तकनीक और पाठकों की बदलती आदतों के मुताबिक सामग्री को रूप देने के लिए निरंतर सीखने में विश्वास करते हैं। अंकित ओझा की रुचि राजनीति के साथ ही दर्शन, कविता और संगीत में भी है। लेखन और स्वरों के माध्यम से लंबे समय तक आकाशवाणी से भी जुड़े रहे। इसके अलावा ऑडियन्स से जुड़ने की कला की वजह से मंचीय प्रस्तुतियां भी सराही जाती हैं।


अकादमिक योग्यताः अंकित ओझा ने प्रारंभिक शिक्षा नवोदय विद्यालय से पूरी करने के बाद जामिया मिल्ल्लिया इस्लामिया से पत्रकारिता में ही ग्रैजुएशन किया है। इसके बाद भारतीय जनसंचार संस्थान (IIMC) से पोस्ट ग्रैजुएट डिप्लोमा और कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय से मास कम्युनिकेशन में एमए किया है। जामिया में अध्ययन के दौरान ही इटैलियन और उर्दू भाषा में भी कोर्स किए हैं। इसके अलावा पंजाबी भाषा की भी अच्छी समझ रखते हैं। विश्वविद्यालय में NCC का 'C सर्टिफिकेट' भी प्राप्त किया है। IIMC और ऑक्सफर्ड से स्वास्थ्य पत्रकारिता का सर्टिफिकेट भी प्राप्त किया है।

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