मालदा कांड पर सख्त हुआ चुनाव आयोग, जूडिशियल अफसरों के घेराव की जांच NIA को सौंपी
चुनाव आयोग ने इस मामले में NIA जांच के आदेश दिए हैं और राज्य के डीजीपी (DGP) और मालदा के एसपी (SP) से रिपोर्ट तलब की है। अब तक इस मामले में 18 लोगों को गिरफ्तार किया जा चुका है।

सुप्रीम कोर्ट के निर्देश के बाद चुनाव आयोग ने पश्चिम बंगाल के मालदा जिले में सात न्यायिक अधिकारियों के घेराव की जांच बृहस्पतिवार को राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) को सौंप दी है। दिल्ली में निर्वाचन आयोग के एक प्रवक्ता ने कहा कि एनआईए की एक टीम शुक्रवार को राज्य में मौजूद रहेगी। इससे पहले पश्चिम बंगाल को 'सबसे अधिक ध्रुवीकरण वाला राज्य' बताते हुए, उच्चतम न्यायालय ने मतदाता सूची के गहन पुनरीक्षण (SIR) अभियान के दौरान मालदा जिले में न्यायिक अधिकारियों के घेराव और हमले पर प्रशासन की 'पूर्ण विफलता' और निष्क्रियता पर कड़ी नाराजगी जताई और केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) या एनआईए से जांच कराए जाने का निर्देश दिया।
निर्वाचन आयोग ने दो अप्रैल को एनआईए को लिखे पत्र में न्यायालय के आदेश का हवाला देते हुए उसे बुधवार की घटना की जांच करने का निर्देश दिया। घेराव की घटना की कड़ी निंदा करते हुए न्यायालय ने कहा कि यह घटना "राज्य प्रशासन की पूर्ण विफलता को भी उजागर करती है" और "न्यायिक अधिकारियों को धमकाने का न सिर्फ एक बेशर्म प्रयास" था, बल्कि यह शीर्ष अदालत के अधिकार को चुनौती देने के बराबर भी था।
दो चरणों में 23 और 29 अप्रैल को चुनाव
पश्चिम बंगाल में दो चरणों में 23 और 29 अप्रैल को चुनाव होंगे। यह घटना मालदा जिले के कालियाचक इलाके में एसआईआर कवायद के दौरान हुई जब ''असामाजिक तत्वों'' ने बुधवार को एक खंड विकास अधिकारी (बीडीओ) कार्यालय में अपराह्न साढ़े तीन बजे से सात न्यायिक अधिकारियों का घेराव किया। अधिकारियों ने बताया कि बुधवार आधी रात के आसपास सुरक्षा बलों ने उन न्यायिक अधिकारियों को मुक्त कराया, जिनका घेराव किया गया था।
कालियाचक इलाके में 7 न्यायिक अधिकारियों का घेराव
बता दें कि एसआईआर प्रक्रिया के दौरान मतदाता सूचियों से बाहर किए गए 60 लाख से अधिक लोगों की आपत्तियों के निस्तारण के लिए पश्चिम बंगाल, ओडिशा और झारखंड के लगभग 700 न्यायिक अधिकारियों को चल रही एसआईआर प्रक्रिया में तैनात किया गया है। SIR प्रक्रिया के दौरान कथित तौर पर 22 लाख वोटर्स के नाम कटने के विरोध में मुस्लिम समुदाय के लोगों ने एक अप्रैल को मालदा के कालियाचक इलाके में 7 न्यायिक अधिकारियों (जजों) को BDO ऑफिस में घंटों तक बंधक बना लिया, जिनमें 4 महिलाएं भी शामिल थीं। इससे पहले भीड़ ने नेशनल हाईवे 12 (NH-12) को जाम कर दिया और सुरक्षा बलों की गाड़ियों पर पथराव किया। पुलिस ने भीड़ को तितर-बितर करने के लिए लाठीचार्ज किया और आंसू गैस के गोले छोड़े।
लेखक के बारे में
Pramod Praveenप्रमोद कुमार प्रवीण देश-विदेश की समसामयिक घटनाओं और राजनीतिक हलचलों पर चिंतन-मंथन करने वाले और पैनी पकड़ रखने वाले हैं। ईटीवी से पत्रकारिता में करियर की शुरुआत की। कुल करीब दो दशक का इलेक्ट्रॉनिक, प्रिंट और डिजिटल मीडिया में काम करने का अनुभव रखते हैं। संप्रति लाइव हिन्दुस्तान में विगत तीन से ज्यादा वर्षों से समाचार संपादक के तौर पर कार्यरत हैं और अमूमन सांध्यकालीन पारी में बहुआयामी पत्रकारीय भूमिका का निर्वहन कर रहे हैं। हिन्दुस्तान टाइम्स ग्रुप से पहले NDTV, जनसत्ता, ईटीवी, इंडिया न्यूज, फोकस न्यूज, साधना न्यूज और ईटीवी में कार्य करने का अनुभव है। कई संस्थानों में सियासी किस्सों का स्तंभकार और लेखक रहे हैं। विश्वविद्यालय स्तर से लेकर कई अकादमिक, शैक्षणिक और सामाजिक संगठनों द्वारा विभिन्न मंचों पर अकादमिक और पत्रकारिता में उल्लेखनीय योगदान के लिए सम्मानित भी हुए हैं। रुचियों में फिल्में देखना और पढ़ना-पढ़ाना पसंद, सामाजिक और जनसरोकार के कार्यों में भी रुचि है।
अकादमिक योग्यता: भूगोल में जलवायु परिवर्तन जैसे गंभीर और संवेदनशील विषय पर पीएचडी उपाधिधारक हैं। इसके साथ ही पत्रकारिता एवं जनसंचार में स्नातकोत्तर भी हैं। पीएचडी शोध का विषय- 'मध्य गंगा घाटी में जलवायु परिवर्तन-एक भौगोलिक अध्ययन' रहा है। शोध के दौरान करीब दर्जन भर राष्ट्रीय और अंततराष्ट्रीय सम्मेलनों में शोध पत्र पढ़ने और प्रस्तुत करने का अनुभव है। भारतीय विज्ञान कांग्रेस में भी शोध पोस्टर प्रदर्शनी का चयन हो चुका है। शोध पर आधारित एक पुस्तक के लेखक हैं। पुस्तक का नाम 'मध्य गंगा घाटी में जलवायु परिवर्तन' है। पत्रकारिता में आने से पहले महाविद्यालय स्तर पर शिक्षण कार्य भी कर चुके हैं।


