Hindi Newsपश्चिम बंगाल न्यूज़Election Commission not saddened by deaths during SIR BLOs take to the streets
'SIR के दौरान मौतों से दुखी नहीं चुनाव आयोग', सड़कों पर उतरे बीएलओ

'SIR के दौरान मौतों से दुखी नहीं चुनाव आयोग', सड़कों पर उतरे बीएलओ

संक्षेप:

पश्चिम बंगाल में एसआईआर में लगे कर्मचारियों की मौत को लेकर बीएलओ के समूह ने मुख्य निर्वाचन अधिकारी के कार्यालय के सामने प्रदर्शन किया। उनका कहना है कि चुनाव आयोग को ऐसी घटनओं से कोई दुख नहीं है। 

Jan 12, 2026 07:52 pm ISTAnkit Ojha भाषा
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पश्चिम बंगाल में बूथ स्तरीय अधिकारियों (बीएलओ) के एक वर्ग ने मुख्य निर्वाचन अधिकारी (सीईओ) के कार्यालय के सामने सोमवार को विरोध प्रदर्शन किया और आरोप लगाया गया कि निर्वाचन आयोग (ईसी) मतदाता सूची के जारी विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) के दौरान कई बीएलओ की मौत के प्रति एकदम न्यूट्रल है और उसे ऐसी दुखद घटनाओं से कोई फर्क नहीं पड़ता है।

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प्रदर्शनकारी बीएलओ अधिकार रक्षा समिति के सदस्य हैं। उन्होंने दावा किया कि यह प्रक्रिया शुरू होने के बाद से राज्य भर के बीएलओ "अत्यधिक मानसिक और शारीरिक दबाव" में हैं और इसके काम का भार उनके स्वास्थ्य पर गंभीर प्रभाव डाल रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि कई अधिकारी सख्त समयसीमा, व्यापक फील्ड सत्यापन और बड़ी मात्रा में डेटा की जांच से जुड़े तनाव के कारण "प्रशिक्षण कार्यक्रमों के दौरान हिम्मत हार गए।

आंदोलनकारी बीएलओ ने पुनरीक्षण प्रक्रिया शुरू होने के बाद से विभिन्न जिलों में अधिकारियों की कई मौतों की खबरों का भी हवाला दिया। आयोग की प्रतिक्रिया पर सवाल उठाते हुए प्रदर्शनकारियों ने पूछा कि संशोधन संबंधी कर्तव्यों का पालन करते समय बीमार पड़ने या जान गंवाने वाले बीएलओ के लिए मुआवजे की घोषणा क्यों नहीं की गई है।

एक प्रदर्शनकारी ने कहा,'राज्य सरकार चुनाव ड्यूटी के दौरान हताहत होने पर मुआवजा देती है। फिर निर्वाचन आयोग उन मतदान कर्मियों को बुनियादी सहायता भी क्यों नहीं दे रहा है जो उसके द्वारा सौंपे गए अनिवार्य कार्य को करते समय बीमार पड़ जाते हैं या मर जाते हैं?' यह प्रदर्शन सीईओ के कार्यालय के सामने आयोजित किया गया था, जिसमें समिति ने तत्काल हस्तक्षेप, कार्य के भार का युक्तिकरण और मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण कवायद में लगे बीएलओ के लिए एक औपचारिक मुआवजा नीति की मांग की।

Ankit Ojha

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Ankit Ojha

विद्यालयी जीवन से ही कलात्मक अभिव्यक्ति, विचारशील स्वभाव और मिलनसार व्यक्तित्व और सामान्य के अंदर डुबकी लगाकर कुछ खास खोज लाने का कौशल पत्रकारिता के लिए अनुकूल साबित हुआ। अंकित ओझा एक दशक से डिजिटल पत्रकारिता के क्षेत्र में लगातार सक्रिय हैं। उत्तर प्रदेश के बाराबंकी के रहने वाले अंकित ओझा समाचारों की दुनिया में तथ्यों के महत्व के साथ ही संवेदनशीलता के पक्ष को साधने में निपुण हैं। पिछले चार साल से हिन्दुस्तान टाइम्स ग्रुप के 'लाइव हिन्दुस्तान' के लिए चीफ कॉन्टेंट प्रड्यूसर पद पर कार्य कर रहे हैं। इससे पहले 'टाइम्स ऑफ इंडिया' और 'इंडियन एक्सप्रेस' ग्रुप के साथ भी कार्य कर चुके हैं।


राष्ट्रीय, अंतरराष्ट्रीय, राज्य और सामाजिक सरोकारों की खबरों के संपादन में लंबा अनुभव होने के साथ ही अपने-आसपास की घटनाओं में समाचार तत्व निकालने की अच्छी समझ है। घटनाओं और समाचारों से संबंधित फैसले लेने और त्वरित समाचार प्रकाशित करने में विशेष योग्यता है। इसके अलावा तकनीक और पाठकों की बदलती आदतों के मुताबिक सामग्री को रूप देने के लिए निरंतर सीखने में विश्वास करते हैं। अंकित ओझा की रुचि राजनीति के साथ ही दर्शन, कविता और संगीत में भी है। लेखन और स्वरों के माध्यम से लंबे समय तक आकाशवाणी से भी जुड़े रहे। इसके अलावा ऑडियन्स से जुड़ने की कला की वजह से मंचीय प्रस्तुतियां भी सराही जाती हैं।


अकादमिक योग्यताः अंकित ओझा ने प्रारंभिक शिक्षा नवोदय विद्यालय से पूरी करने के बाद जामिया मिल्ल्लिया इस्लामिया से पत्रकारिता में ही ग्रैजुएशन किया है। इसके बाद भारतीय जनसंचार संस्थान (IIMC) से पोस्ट ग्रैजुएट डिप्लोमा और कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय से मास कम्युनिकेशन में एमए किया है। जामिया में अध्ययन के दौरान ही इटैलियन और उर्दू भाषा में भी कोर्स किए हैं। इसके अलावा पंजाबी भाषा की भी अच्छी समझ रखते हैं। विश्वविद्यालय में NCC का 'C सर्टिफिकेट' भी प्राप्त किया है। IIMC और ऑक्सफर्ड से स्वास्थ्य पत्रकारिता का सर्टिफिकेट भी प्राप्त किया है।

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