बीजेपी की बंगाल जीत के बाद ED का ऐक्शन, ममता बनर्जी के 'खास' DCP शांतनु बिस्वास पर लुकआउट नोटिस
पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 में भाजपा की जीत के एक दिन बाद प्रवर्तन निदेशालय ने मंगलवार को कोलकाता पुलिस के डिप्टी कमिश्नर शांतनु सिन्हा बिस्वास के खिलाफ मनी लॉन्ड्रिंग मामले में लुकआउट नोटिस जारी कर किया है।

पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 में भाजपा की जीत के एक दिन बाद प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने मंगलवार को कोलकाता पुलिस के डिप्टी कमिश्नर शांतनु सिन्हा बिस्वास के खिलाफ मनी लॉन्ड्रिंग मामले में लुकआउट नोटिस जारी कर दिया। ममता बनर्जी के करीबी माने जाने वाले डीसीपी बिस्वास पर कई समनों से बचने का आरोप है। ईडी को आशंका है कि वह देश छोड़कर भाग सकते हैं। यह नोटिस सोना पप्पू उर्फ बिस्वजीत पोद्दार गिरोह से जुड़े धन शोधन मामले की जांच के क्रम में जारी किया गया है।
बता दें कि ईडी ने 28 अप्रैल को (पश्चिम बंगाल में अंतिम चरण के मतदान से ठीक एक दिन पहले) डीसीपी बिस्वास को पूछताछ के लिए तलब किया था। इससे पहले एजेंसी ने उनके गोलपार्क स्थित आवास समेत कई ठिकानों पर छापेमारी की थी। बिस्वास को टीएमसी सुप्रीमो ममता बनर्जी का करीबी माना जाता है। हाल ही में एक विरोध प्रदर्शन के दौरान उन्हें ममता बनर्जी के साथ मंच पर देखा गया था, जिसके बाद टीएमसी ने दावा किया कि उन्हें ममता बनर्जी की सुरक्षा में तैनात किया गया था।
ईडी ने इस मामले में भू-माफिया जय एस कामदार को पहले ही गिरफ्तार किया है। 20 अप्रैल को कामदार को विशेष पीएमएलए अदालत में पेश किया गया, जहां अदालत ने आगे की जांच के लिए ईडी को उसकी 9 दिन की हिरासत दी। 19 अप्रैल 2026 को ईडी ने कोलकाता और बैरकपुर में छह ठिकानों पर छापेमारी की थी, जिसमें डीसीपी शांतनु सिन्हा बिस्वास और जय एस कामदार के आवास शामिल थे। इन छापों में कई आपत्तिजनक दस्तावेज जब्त किए गए। जांच में खुलासा हुआ कि जय एस कामदार सोना पप्पू का करीबी था और दोनों के बीच बड़े पैमाने पर वित्तीय लेन-देन हुए थे। कामदार पर सोना पप्पू की पत्नी सोमा सोनार पोद्दार को हथियार सप्लाई करने का भी आरोप है। इसके अलावा, वह कई फर्जी कंपनियों के जरिए बड़े पैमाने पर अवैध हवाला लेन-देन में शामिल था।
जांच में ईडी ने पाया कि कामदार का शांतनु सिन्हा बिस्वास समेत कई पुलिस अधिकारियों से घनिष्ठ संबंध था। वह इन अधिकारियों और उनके परिवारों को महंगे उपहार और सुविधाएं देता था। उसने पुलिस अधिकारियों के प्रभाव का दुरुपयोग कर जमीन के मामलों में निर्दोष लोगों के खिलाफ झूठी शिकायतें दर्ज करवाईं और अनुचित लाभ उठाए। जब्त दस्तावेजों और डिजिटल सबूतों से पता चला है कि कामदार और उसके सहयोगी योजनाबद्ध तरीके से लोगों की कीमती संपत्तियां हड़पने में शामिल थे। 1 अप्रैल 2026 को ईडी ने इस मामले में की गई छापेमारी में 1.47 करोड़ रुपये नकद, 67.64 लाख रुपये के सोने-चांदी के आभूषण, एक फॉर्च्यूनर कार और एक बिना लाइसेंस वाला रिवॉल्वर बरामद किया था।


