ममता की सीट पर हो गई वोटरों की 'छंटनी'! SIR के बाद भवानीपुर से 51 हजार नाम गायब

Apr 09, 2026 08:29 am ISTAmit Kumar लाइव हिन्दुस्तान, भवानीपुर
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पश्चिम बंगाल की भवानीपुर विधानसभा सीट पर विशेष पुनरीक्षण (SIR) के बाद 51,000 से अधिक (लगभग 25%) मतदाताओं के नाम काट दिए गए हैं। ममता बनर्जी के इस निर्वाचन क्षेत्र में चौंकाने वाले आंकड़े सामने आए हैं। पढ़ें पूरी खबर।

ममता की सीट पर हो गई वोटरों की 'छंटनी'! SIR के बाद भवानीपुर से 51 हजार नाम गायब

पश्चिम बंगाल की हाई-प्रोफाइल भवानीपुर विधानसभा सीट पर 'विशेष गहन पुनरीक्षण' (SIR) के बाद मतदाताओं की संख्या में लगभग 25% की भारी कमी दर्ज की गई है। इस प्रक्रिया के तहत कुल 51,004 नाम मतदाता सूची से हटा दिए गए हैं। इस सीट पर मुख्यमंत्री ममता बनर्जी का मुकाबला भाजपा के शुभेंदु अधिकारी से है। हटाए गए कुल मतदाताओं में 23.3% मुस्लिम और 76.7% गैर-मुस्लिम मतदाता शामिल हैं।

चरणबद्ध तरीके से हटाए गए मतदाता

SIR प्रक्रिया शुरू होने से पहले भवानीपुर में कुल 2,06,295 मतदाता थे। नामों को हटाने की यह प्रक्रिया कई चरणों में पूरी की गई।

पहला चरण: पहले चरण में 44,787 मतदाताओं के नाम हटाए गए। इन नामों को हटाने के पीछे मुख्य कारण मतदाताओं का अनुपस्थित होना, दूसरी जगह शिफ्ट होना, मृत्यु, डुप्लीकेट प्रविष्टि या अनमैप्ड होना बताया गया।

दूसरा चरण: दूसरे दौर की प्रक्रिया में 2,342 नाम और काटे गए, जबकि इस दौरान केवल 18 नए मतदाताओं को सूची में जोड़ा गया।

निर्णय के अधीन: सूत्रों के अनुसार, लगभग 14,154 मतदाताओं के मामलों को न्यायिक जांच या निर्णय के लिए रखा गया था।

सबर इंस्टीट्यूट का विश्लेषण

टाइम्स ऑफ इंडिया की रिपोर्ट के मुताबिक, 'सबर इंस्टीट्यूट' के शोधकर्ताओं ने 15 पूरक सूचियों का विश्लेषण किया। उन्होंने बताया कि शुरुआत में जांच के लिए चिह्नित किए गए 10,238 मतदाताओं को बाद में बहाल कर दिया गया, जबकि 3,875 मतदाताओं के नाम काट दिए गए। एक शोधकर्ता के अनुसार इन पूरक सूचियों में हटाए गए नामों में लगभग 40% मुस्लिम हैं।

चुनाव आयोग के सूत्रों ने भी इसकी पुष्टि की है कि न्यायिक निर्णय प्रक्रिया के दौरान लगभग 3,500 नाम काटे गए हैं। एक अधिकारी ने बताया कि SIR से पहले के आंकड़ों की तुलना में निर्वाचन क्षेत्र में 50,000 से अधिक मतदाताओं की कमी आई है। मुख्यमंत्री के इस निर्वाचन क्षेत्र में लगभग 14,000 मामलों को जांच के दायरे में रखा गया था।

जनसांख्यिकीय आंकड़े और विसंगतियां

शोधकर्ताओं ने बताया कि अंतिम सूची में जिन लोगों को 'निर्णय के अधीन' चिह्नित किया गया था, उनमें 56.7% मुस्लिम थे। यह आंकड़ा 2011 की जनगणना के अनुसार उनकी अनुमानित 20% आबादी हिस्सेदारी से काफी अधिक है। उन्होंने कहा कि हालांकि पूरक सूचियों में हटाए गए मुस्लिमों का अनुपात घटकर लगभग 40% हो गया है, लेकिन यह अभी भी असंगत रूप से अधिक है।

संस्थान के डेटा के अनुसार अन्य महत्वपूर्ण आंकड़े इस प्रकार हैं:

जांच के अधीन: 43.4% गैर-मुस्लिम मतदाताओं को निर्णय के अधीन रखा गया था।

अंतिम सूची से निष्कासन: अंतिम मतदाता सूची से 7.7% मुस्लिमों को हटाया गया, जबकि इसके मुकाबले 92.3% गैर-मुस्लिमों के नाम काटे गए।

ASDD और अनमैप्ड श्रेणी: 'अनुपस्थित, स्थानांतरित, मृत या डुप्लिकेट' (ASDD) श्रेणी में मुस्लिम मतदाताओं की हिस्सेदारी 22.7% और 'अनमैप्ड' मतदाताओं में लगभग 26% थी, जो उनकी जनसंख्या के अनुपात के लगभग बराबर है।

तार्किक विसंगति: इस श्रेणी के तहत मुस्लिम मतदाताओं की हिस्सेदारी तेजी से बढ़कर 52% हो गई।

Amit Kumar

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