बंगाल में हार के बाद काबा-मदीना गाने वाली सायोनी घोष का ज्ञान, बताने लगीं जीत के मंत्र

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बंगाल में करारी हार के बाद टीएमसी सांसद सायोनी घोष ने जीत का मंत्र बताते हुए कहा है कि इसके लिए लगातार मेहनत करने और दूसरों को पीछे छोड़ने की जरूरत है। बंगाल चुनाव में सायोनी घोष का चुनाव प्रचार करने का अंदाज काफी फेमस हुआ था।

बंगाल में हार के बाद काबा-मदीना गाने वाली सायोनी घोष का ज्ञान, बताने लगीं जीत के मंत्र

बंगाल में अपने अनोखे अंदाज में प्रचार करने की वजह से छा जाने वाली टीएमसी सांसद सायोनी घोष अब बंगाल में बड़ी हार के बाद जीत का मंत्र बता रही हैं। सोशल मीडिया प्लैटफॉर्म एक्स पर पोट्स करते हुए उन्होंने कहा, जीत के लिए जीत की इच्छा से भी बढ़कर कुछ होना चाहिए। तैयारी की चाहत, कमियों पर विजय और दूसरों को पीछे छोड़ते हुए चलते रहना बहुत आवश्यक है। बता दें कि प्रचार के दौरान टीएमसी सांसद सायोनी घोष की काफी तारीफ की गई थी। वह मां काली से लेकर मक्का-मदीना तक के गीत गाती थीं। चुनाव के बाद बीजेपी नेता उमा भारती ने दावा किया कि सायानी घोष का मक्का-मदीना वाला गाना ही टीएमसी को ले डूबा।

बता दें कि इस बार चुनाव प्रचार में सायोनी घोष खूब आक्रामक भाषण दे रही थीं। ऐक्टर से नेता बनीं सायानी की जनसभाओं में जबरदस्त भीड़ भी होती थी। सायानी घोष 2021 में टीएमसी में शामिल हुई थीं। वह बांग्ला फिल्मों की जानी-मानी कलाकार हैं। उनकी पढ़ाई कोलकाता के साउथ पॉइंट हाई स्कूल से हुई है और उन्होंने कलकत्ता विश्वविद्यालय से ग्रैजुएशन किया है।

वह शुरू से ही सार्वजनिक रूप से बोलने में माहिर थीं और इसी वजह से उन्हें टीवी ऐक्टिंग और ऐंकरिंग का मौका मिला। 2021 में टीएमसी को भी युवा चेहरों की जरूरत थी। सायानी घोष पार्टी की जरूरतों पर खरी उतरती थीं। वह काफी फेमस भी थीं। सायानी घोष को टीएमसी ने आसनसोल सीट से उतारा था लेकिन वह विधानसभा चुनाव हार गईं।

त्रिपुरा से हो गई थी गिरफ्तारी

त्रिपुरा में कुछ विवाद की वजह से उन्हें गिरफ्तार भी किया गया था। उन्होंने नुक्कड़ सभा के पास से गुजरते हुए 'खेला होबे' का नारा लगया था। यह ममता बनर्जी का दिया हुआ नारा था। इसके बाद अगरतला में उनके खिला केस दर्ज कर लिया गया और उन्हें गिरफ्तार कर लिया गया। इसके बाद सायोनी घोष का नाम और भी फेमस हो गया। ईडी ने उनसे भर्ती घोटाले को लेकर भी पूछताछ की थी। उस समय वह टीएमसी युवा मोर्चे की अध्यक्ष थीं।

2021 में विधानसभा चुनाव में हार के बाद 2024 में टीएमसी ने फिर उनपर विश्वास जताया और जाधवपुर से लोकसभा का टिकट दे दिया। इस बार उन्हें जीत हासिल की और लोकसभा पहुंच गईं। संसद में भी वह अपने अनोखे अंदाज में भाषण देती हैं। इस बार टीएमसी की करारी हार के बाद विरोधियों ने इसका ठीकरा सायोनी घोष के सिर भी फोड़ा है। उनका कहना है कि सायानी का चुनाव प्रचार तुष्टीकरण से भरा हुआ था।

Ankit Ojha

लेखक के बारे में

Ankit Ojha

विद्यालयी जीवन से ही कलात्मक अभिव्यक्ति, विचारशील स्वभाव और मिलनसार व्यक्तित्व और सामान्य के अंदर डुबकी लगाकर कुछ खास खोज लाने का कौशल पत्रकारिता के लिए अनुकूल साबित हुआ। अंकित ओझा एक दशक से डिजिटल पत्रकारिता के क्षेत्र में लगातार सक्रिय हैं। उत्तर प्रदेश के बाराबंकी के रहने वाले अंकित ओझा समाचारों की दुनिया में तथ्यों के महत्व के साथ ही संवेदनशीलता के पक्ष को साधने में निपुण हैं। पिछले चार साल से हिन्दुस्तान टाइम्स ग्रुप के 'लाइव हिन्दुस्तान' के लिए चीफ कॉन्टेंट प्रड्यूसर पद पर कार्य कर रहे हैं। इससे पहले 'टाइम्स ऑफ इंडिया' और 'इंडियन एक्सप्रेस' ग्रुप के साथ भी कार्य कर चुके हैं।


राष्ट्रीय, अंतरराष्ट्रीय, राज्य और सामाजिक सरोकारों की खबरों के संपादन में लंबा अनुभव होने के साथ ही अपने-आसपास की घटनाओं में समाचार तत्व निकालने की अच्छी समझ है। घटनाओं और समाचारों से संबंधित फैसले लेने और त्वरित समाचार प्रकाशित करने में विशेष योग्यता है। इसके अलावा तकनीक और पाठकों की बदलती आदतों के मुताबिक सामग्री को रूप देने के लिए निरंतर सीखने में विश्वास करते हैं। अंकित ओझा की रुचि राजनीति के साथ ही दर्शन, कविता और संगीत में भी है। लेखन और स्वरों के माध्यम से लंबे समय तक आकाशवाणी से भी जुड़े रहे। इसके अलावा ऑडियन्स से जुड़ने की कला की वजह से मंचीय प्रस्तुतियां भी सराही जाती हैं।


अकादमिक योग्यताः अंकित ओझा ने प्रारंभिक शिक्षा नवोदय विद्यालय से पूरी करने के बाद जामिया मिल्ल्लिया इस्लामिया से पत्रकारिता में ही ग्रैजुएशन किया है। इसके बाद भारतीय जनसंचार संस्थान (IIMC) से पोस्ट ग्रैजुएट डिप्लोमा और कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय से मास कम्युनिकेशन में एमए किया है। जामिया में अध्ययन के दौरान ही इटैलियन और उर्दू भाषा में भी कोर्स किए हैं। इसके अलावा पंजाबी भाषा की भी अच्छी समझ रखते हैं। विश्वविद्यालय में NCC का 'C सर्टिफिकेट' भी प्राप्त किया है। IIMC और ऑक्सफर्ड से स्वास्थ्य पत्रकारिता का सर्टिफिकेट भी प्राप्त किया है।

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