बंगाल में किसकी बनेगी सरकार, क्या SIR करेगा तय? 65 सीटों पर जीत-हार के मार्जिन में उलटफेर
नॉर्थ 24 परगना में अकेले 13 ऐसी करीबी लड़ाई वाली सीटें हैं। मुर्शिदाबाद में 10, बांकुड़ा-पुरुलिया में 9, हावड़ा-हुगली में 8 और दोनों मेदिनीपुर व बर्धमान में 8 और सीटें हैं। 2021 के चुनाव ने दिखा दिया था कि यह विभाजन कितना पतला हो गया है।

पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 के नतीजों का फैसला करीब 65-70 ऐसी विधानसभा सीटों से होगा, जहां जीत और हार के बीच सिर्फ कुछ बूथों का फासला है और जहां स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) ने चुनावी लड़ाई को अचानक बदल दिया है। इनमें नंदीग्राम से भवानीपुर तक की सीटें, नॉर्थ 24 परगना का मतुआ बेल्ट, मुर्शिदाबाद और मालदा के अल्पसंख्यक-बहुल इलाके खास तौर पर अहम हैं। यहां 2024 के लोकसभा चुनाव में अक्सर 8,000 से 15,000 वोटों के अंतर से फैसला होता था। 2021 में इन इलाकों में कई विधायकों ने 1,000 से 8,000 वोटों के अंतर से जीत हासिल की थी और अब हजारों नाम वोटर लिस्ट से गायब हो चुके हैं।
मुख्यमंत्री ममता बनर्जी का दावा है कि टीएमसी 2021 की 215 सीटों से भी बड़ी जीत के साथ वापसी करेगी। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह का कहना है कि भाजपा अपनी मौजूदा 77 सीटों से 170 पार कर जाएगी। सच्चाई यह है कि दोनों पार्टियां चुपचाप एक कठिन लड़ाई लड़ रही हैं। यह लड़ाई एक-एक बूथ, एक-एक कटे हुए वोटर और एक-एक मार्जिन वाली सीट पर चल रही है। 7 अप्रैल तक पूरे पश्चिम बंगाल में 90.83 लाख से ज्यादा नाम वोटर लिस्ट से हटाए जा चुके हैं, जो अक्टूबर में चिह्नित कुल मतदाताओं का लगभग 11.85 प्रतिशत है। इनमें से अकेले विचाराधीन श्रेणी से 27.16 लाख नाम कटे हैं।
किन सीटों पर कटे कितने वोट
इसका केंद्र 11 जिलों की लगभग 70 सीटों पर है। इनमें से 25 सीटें कोलकाता और आसपास के नॉर्थ 24 परगना, हावड़ा और हुगली के इलाके में हैं। बाकी सीटें मुर्शिदाबाद, मालदा, बांकुड़ा, पुरुलिया, दोनों बर्धमान और दोनों मेदिनीपुर में हैं। नॉर्थ 24 परगना में अकेले 13 ऐसी करीबी लड़ाई वाली सीटें हैं, मुर्शिदाबाद में 10, बांकुड़ा-पुरुलिया में 9, हावड़ा-हुगली में 8 और दोनों मेदिनीपुर व बर्धमान में 8 और सीटें हैं। 2021 के चुनाव ने दिखा दिया था कि यह विभाजन कितना पतला हो गया है। 8,000 वोट या उससे कम अंतर से जीती गई 57 सीटों में टीएमसी ने 29 और भाजपा ने 28 सीटें जीती थीं। जहां अंतर 3,000 वोट से भी कम था, उन 19 सीटों में भाजपा ने 12 और टीएमसी ने 7 सीटें जीती थीं।
पश्चिम बर्धमान की कुल्टी सीट भाजपा ने सिर्फ 679 वोटों से जीती थी। दांतन 623 वोटों से, घाटाल 966 वोटों से, बांकुड़ा 1,468 वोटों से और नंदीग्राम में शुभेंदु अधिकारी ने ममता बनर्जी को 1,956 वोटों से हराया था। कुल्टी में करीब 38,000 नाम कट चुके हैं, जीत के अंतर से 50 गुना ज्यादा। नंदीग्राम में 14,462 नाम कटे हैं, जो ममता बनर्जी की हार के अंतर से सात गुना ज्यादा है। नॉर्थ 24 परगना और नदिया में मार्जिन और नाम कटने के बीच का अंतर और भी चौंकाने वाला है। यहां भाजपा नागरिकता मुद्दे पर हिंदू शरणार्थी-मतुआ गठबंधन बनाने की कोशिश कर रही है।
आखिर किस पार्टी को मिलेगा फायदा
भाजपा की ओर से लगभग 2,000 वोटों से जीती गई बोन्गांव साउथ सीट पर करीब 7,000 नाम कटे हैं। कल्याणी सीट भाजपा ने लगभग 2,000 वोटों से जीती थी, वहां करीब 9,000 नाम हटाए गए हैं। नॉर्थ 24 परगना में जांच के दायरे में रखे गए नामों में से 55 प्रतिशत से ज्यादा अंततः हटा दिए गए। नदिया में यह आंकड़ा लगभग 78 प्रतिशत था। टीएमसी के सबसे मजबूत जिलों में से एक मुर्शिदाबाद में विचाराधीन से सबसे ज्यादा 4.55 लाख नाम कटे। पहले के कटौती को मिलाकर जिले से कुल करीब 7.49 लाख वोटर गायब हो चुके हैं। नॉर्थ 24 परगना में दोनों चरणों में 12.6 लाख से ज्यादा नाम कटे, जबकि मालदा से 4.59 लाख, साउथ 24 परगना से 10.91 लाख और कोलकाता से अकेले करीब 6.97 लाख नाम हटाए गए।
2021 के मतदान पैटर्न के आधार पर वोट शेयर में सिर्फ 1 प्रतिशत का स्विंग इनमें से कम से कम 15 सीटों को पलट सकता है। 2 प्रतिशत का बदलाव 20 से ज्यादा सीटों को प्रभावित कर सकता है। टीएमसी नेता अरूप चक्रवर्ती ने कहा, 'भाजपा चुनाव आयोग का इस्तेमाल वोट चुराने और नाम काटने के लिए कर रही है। लेकिन हमने उनका खेल समझ लिया है। जवाब मतपेटी के जरिए दिया जाएगा।' भाजपा का दावा है कि इस रिवीजन ने अवैध बांग्लादेशी और मृत वोटरों को उजागर किया है। बोगस वोटिंग की गुंजाइश खत्म कर दी है।


