अब इतिहास पर क्यों आमने-सामने BJP और TMC? योगी और ममता ने क्या कहा, जिन पर छिड़ी ट्विटर जंग

Pramod Praveen लाइव हिन्दुस्तान, नई दिल्ली
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West Bengal Poll Updates: भाजपा आईटी सेल के चीफ अमित मालवीय ने आज (मंगलवार, 21 अप्रैल को) दोपहर में पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी पर आरोप लगाया है कि संवैधानिक पद पर बैठीं दीदी को इतिहास की सच्चाई भी नहीं मालूम है।

अब इतिहास पर क्यों आमने-सामने BJP और TMC? योगी और ममता ने क्या कहा, जिन पर छिड़ी ट्विटर जंग

West Bengal Poll Updates: पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव के पहले चरण के मतदान के लिए आज शाम प्रचार थम जाएगा लेकिन इससे पहले राज्य की सत्ताधारी तृणमूल कांग्रेस (TMC) और मुख्य विपक्षी पार्टी भारतीय जनता पार्टी (BJP) के बीच सियासी लड़ाई जमीन से होते हुए अतीत के इतिहास और महापुरुषों पर जा टिकी है। दोनों ही पार्टी एक दूसरे पर ऐतिहासिक तथ्यों को तोड़-मरोड़ कर पेश करने के आरोप लगा रहे हैं। यानी दोनों की पार्टियां विपक्षी नेताओं को इतिहास के ज्ञान के आधार पर नीचा दिखाने की कोशिशों में जुटे हैं।

इसी सिलसिले में भाजपा आईटी सेल के चीफ अमित मालवीय ने आज (मंगलवार, 21 अप्रैल को) दोपहर में पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी पर आरोप लगाया है कि संवैधानिक पद पर बैठीं दीदी को इतिहास की सच्चाई भी नहीं मालूम है। सोशल मीडिया एक्स पर ममता बनर्जी के भाषण का एक वीडियो क्लिप शेयर करते हुए मालवीय ने लिखा, “ममता बनर्जी का दावा है कि गांधी जी ने जलियांवाला बाग हत्याकांड के विरोध में अपनी 'नाइटहुड' की उपाधि लौटा दी थी लेकिन इतिहास कुछ और ही कहता है।”

वो महात्मा गांधी नहीं टैगोर थे

उन्होंने आगे लिखा, “दरअसल, वह रवींद्रनाथ टैगोर थे, जिन्होंने 1919 में जलियांवाला बाग में हुई क्रूरता के विरोध स्वरूप अपनी 'नाइटहुड' की उपाधि ब्रिटिश हुकूमत को लौटा दी थी। तथ्य मायने रखते हैं। खासकर तब, जब पश्चिम बंगाल का नेतृत्व करने का दावा करने वाले लोग इसके सबसे अहम ऐतिहासिक तथ्य को ही सही ढंग से न बता पाएं।”

महुआ मोइत्रा ने क्या लिखा था?

यह सिसायी विवाद तब शुरू हुआ, जब एक दिन पहले यानी 20 अप्रैल को तृणमूल कांग्रेस की लोकसभा सांसद महुआ मोइत्रा ने भाजपा नेता और उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को उनके एक बयान पर घेरा और उन्हें इतिहास का पाठ पढ़ाते हुए तीखा तंज कसा। मोइत्रा ने सोशल मीडिया एक्स पर योगी आदित्यनाथ को टैग करते हुए लिखा, "नमस्ते 'बुलडोज़र बुद्धि' वाले @myogiadityanath, अपने तथ्यों को ठीक कर लीजिए। नेताजी सुभाष बोस ने कहा था, "तुम मुझे खून दो, मैं तुम्हें आज़ादी दूँगा।" स्वामी विवेकानंद ने यह बात नहीं कही थी। कृपया वापस UP जाकर अपनी फैंटा पीजिए और बंगाल को उसके हाल पर छोड़ दीजिए। आप तो एक मज़ाक बनकर रह गए हैं।"

राज्य में 23 और 29 अप्रैल को मतदान

इसके बाद भाजपा आईटी सेल ने पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के एक भाषण में वह गड़बड़ी पकड़ी, जिसमें वह कह रही थीं कि जालियावाला नरसंहार के विरोध में महात्मा गांधी ने नाइटहूड की उपाधि वापस कर दी थी। बहरहाल, बंगाल का सियासी पारा चढ़ा हुआ है। वहां दो चरणों में होने वाले मतदान के लिए टीएमसी और भाजपा ने एड़ी चोटी एक कर दिया है। भाजपा जहां सत्ता पर अपनी ताजपोशी चाहती है, वहीं ममता बनर्जी लगातार चौथी बार अपने सरकार की वापसी के लिए संघर्ष कर रही हैं। राज्य में 23 और 29 अप्रैल को मतदान होने हैं। 4 मई को चुनाव के नतीजे आएंगे।

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लेखक के बारे में

Pramod Praveen

प्रमोद कुमार प्रवीण देश-विदेश की समसामयिक घटनाओं और राजनीतिक हलचलों पर चिंतन-मंथन करने वाले और पैनी पकड़ रखने वाले हैं। ईटीवी से पत्रकारिता में करियर की शुरुआत की। कुल करीब दो दशक का इलेक्ट्रॉनिक, प्रिंट और डिजिटल मीडिया में काम करने का अनुभव रखते हैं। संप्रति लाइव हिन्दुस्तान में विगत तीन से ज्यादा वर्षों से समाचार संपादक के तौर पर कार्यरत हैं और अमूमन सांध्यकालीन पारी में बहुआयामी पत्रकारीय भूमिका का निर्वहन कर रहे हैं। हिन्दुस्तान टाइम्स ग्रुप से पहले NDTV, जनसत्ता, ईटीवी, इंडिया न्यूज, फोकस न्यूज, साधना न्यूज और ईटीवी में कार्य करने का अनुभव है। कई संस्थानों में सियासी किस्सों का स्तंभकार और लेखक रहे हैं। विश्वविद्यालय स्तर से लेकर कई अकादमिक, शैक्षणिक और सामाजिक संगठनों द्वारा विभिन्न मंचों पर अकादमिक और पत्रकारिता में उल्लेखनीय योगदान के लिए सम्मानित भी हुए हैं। रुचियों में फिल्में देखना और पढ़ना-पढ़ाना पसंद, सामाजिक और जनसरोकार के कार्यों में भी रुचि है।

अकादमिक योग्यता: भूगोल में जलवायु परिवर्तन जैसे गंभीर और संवेदनशील विषय पर पीएचडी उपाधिधारक हैं। इसके साथ ही पत्रकारिता एवं जनसंचार में स्नातकोत्तर भी हैं। पीएचडी शोध का विषय- 'मध्य गंगा घाटी में जलवायु परिवर्तन-एक भौगोलिक अध्ययन' रहा है। शोध के दौरान करीब दर्जन भर राष्ट्रीय और अंततराष्ट्रीय सम्मेलनों में शोध पत्र पढ़ने और प्रस्तुत करने का अनुभव है। भारतीय विज्ञान कांग्रेस में भी शोध पोस्टर प्रदर्शनी का चयन हो चुका है। शोध पर आधारित एक पुस्तक के लेखक हैं। पुस्तक का नाम 'मध्य गंगा घाटी में जलवायु परिवर्तन' है। पत्रकारिता में आने से पहले महाविद्यालय स्तर पर शिक्षण कार्य भी कर चुके हैं।

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