गर्भवती महिलाओं को 21 हजार, युवाओं को 3000 महीने; भाजपा ने निकाली ममता के 'लक्ष्मी भंडार' की काट

Apr 10, 2026 03:20 pm ISTAmit Kumar लाइव हिन्दुस्तान, कोलकाता
share

पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव के लिए BJP ने अपना संकल्प पत्र जारी कर दिया है। ममता बनर्जी की 'लक्ष्मी भंडार' योजना को सीधी टक्कर देते हुए भाजपा ने महिलाओं और बेरोजगार युवाओं को हर महीने ₹3000 देने का बड़ा वादा किया है। पढ़ें पूरी खबर।

गर्भवती महिलाओं को 21 हजार, युवाओं को 3000 महीने; भाजपा ने निकाली ममता के 'लक्ष्मी भंडार' की काट

आगामी विधानसभा चुनाव से पहले पश्चिम बंगाल की राजनीति में महिलाओं और युवाओं का वोट बैंक सबसे निर्णायक भूमिका में आ गया है। भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने राज्य में सत्ता हासिल करने के लिए अपना 'संकल्प पत्र' (घोषणापत्र) जारी कर दिया है। इस घोषणापत्र के केंद्र में स्पष्ट रूप से महिलाएं और युवा हैं। भाजपा ने ममता बनर्जी की लोकप्रिय 'लक्ष्मी भंडार' योजना के प्रभाव को कम करने और 'आधी आबादी' का समर्थन हासिल करने के लिए कई बड़ी वित्तीय घोषणाएं की हैं। इसमें भाजपा ने मध्य और निचले वर्ग की महिलाओं को 3000 रुपये प्रति माह की वित्तीय सहायता देने का बड़ा वादा किया है।

भाजपा के संकल्प पत्र की प्रमुख घोषणाएं- मासिक आर्थिक सहायता

मध्यम और निचले वर्ग की महिलाओं के अलावा, बेरोजगार युवाओं को भी 3000 हजार रुपये प्रति माह देने का वादा किया गया है। इसके अलावा, गर्भवती महिलाओं के लिए 21,000 रुपये की एकमुश्त सहायता राशि की घोषणा की गई है, ताकि जच्चा-बच्चा के स्वास्थ्य और पोषण को सुनिश्चित किया जा सके। पार्टी ने वादा किया है कि यदि वह सत्ता में आती है, तो महिलाओं को मिलने वाली इस सहायता राशि में आगे और भी बढ़ोतरी की जाएगी।

ममता सरकार की 'लक्ष्मी भंडार' और युवा साथी योजना पर चोट

पश्चिम बंगाल में तृणमूल कांग्रेस (TMC) की मजबूत पकड़ के पीछे मुख्यमंत्री ममता बनर्जी की 'लक्ष्मी भंडार' योजना को एक बड़ा 'मास्टरस्ट्रोक' माना जाता है। इस योजना के तहत राज्य की महिलाओं को उनके बैंक खातों में सीधे नकद राशि दी जाती है। इस योजना ने बंगाल में महिला मतदाताओं को टीएमसी के पक्ष में लामबंद करने में बड़ी भूमिका निभाई है।

लक्ष्मीर भंडार योजना सबसे पहले पश्चिम बंगाल में ही ममता बनर्जी की टीएमसी सरकार ने 2021 में शुरू की थी। शुरू में सामान्य वर्ग की महिलाओं को 1000 रुपये और एससी/एसटी महिलाओं को 1200 रुपये मासिक दिए जाते थे। फरवरी 2026 में चुनावी बजट में इसे बढ़ाकर सामान्य वर्ग की महिलाओं के लिए 1500 रुपये और एससी/एसटी के लिए 1700 रुपये कर दिया गया। लगभग 2.42 करोड़ महिलाएं इस योजना का लाभ उठा रही हैं।

भाजपा भली-भांति जानती है कि बंगाल में कमल खिलाने के लिए 'लक्ष्मी भंडार' की काट खोजना सबसे जरूरी है। इसलिए, 1500 रुपये के मुकाबले 3000 रुपये और गर्भवती महिलाओं को 21,000 रुपये देने का वादा इसी राजनीतिक रणनीति का हिस्सा है।

युवाओं को साधने का प्लान

इसके अलावा, पश्चिम बंगाल की युवा साथी योजना (Banglar Yuva Sathi Scheme) शिक्षित बेरोजगार युवाओं को नौकरी खोजने के दौरान सहायता के लिए 1500 रुपये का मासिक भत्ता प्रदान करती है। यह योजना 21-40 वर्ष की आयु के 10वीं पास निवासियों को 5 साल तक सीधे बैंक खाते (DBT) में वित्तीय सहायता देती है। अब भाजपा ने इसे काउंटर करने के लिए 1500 के दोगुनी यानी 3000 की सहायता देने का वादा किया है। शाह ने घोषणा की है कि अगले 5 सालों में 1 करोड़ नई नौकरियां और खुद का काम शुरू करने (स्वरोजगार) के मौके बनाए जाएंगे। जिन युवाओं के पास नौकरी नहीं है, उन्हें रोजगार मिलने तक हर महीने 3,000 रुपये की आर्थिक मदद दी जाएगी। भारतीय जनता पार्टी ने कहा है कि अगर बंगाल में उसे सत्ता मिलती है, तो वह युवाओं को परीक्षाओं के लिए 15000 रुपये देगी।

भाजपा शासित अन्य राज्यों में महिलाओं के लिए कैश योजनाएं

हालांकि कैश ट्रांसफर की बड़ी शुरुआत बंगाल से हुई थी, लेकिन भाजपा ने इस फॉर्मूले की सफलता को देखते हुए इसे अपने शासित और गठबंधन वाले कई अन्य राज्यों में भी सफलतापूर्वक लागू किया है। इन्हीं योजनाओं के आधार पर भाजपा बंगाल में भी भरोसा जीतने की कोशिश कर रही है।

मध्य प्रदेश (लाडली बहना योजना): पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान द्वारा शुरू की गई इस योजना के तहत महिलाओं को 1250 रुपये प्रति माह दिए जा रहे हैं। शुरुआत 1,000 रुपये से हुई थी। विधानसभा चुनावों में भाजपा की प्रचंड जीत का श्रेय इसी योजना को दिया गया था।

छत्तीसगढ़ (महतारी वंदन योजना): हाल ही में सत्ता में आई विष्णु देव साय के नेतृत्व वाली भाजपा सरकार राज्य की विवाहित महिलाओं को 1000 रुपये प्रति माह (12,000 रुपये सालाना) दे रही है।

महाराष्ट्र (मुख्यमंत्री माझी लड़की बहिन योजना): इस योजना का उद्देश्य 21 से 65 वर्ष की आयु वर्ग की महिलाओं को आर्थिक स्वतंत्रता प्रदान करना, उनके स्वास्थ्य और पोषण में सुधार करना और परिवार में उनकी निर्णायक भूमिका को मजबूत करना है। महिलाओं को प्रत्यक्ष लाभ हस्तांतरण (डीबीटी) के माध्यम से 1500 का वित्तीय लाभ मिल रहा है।

ओडिशा (सुभद्रा योजना): राज्य में पहली बार सत्ता में आई भाजपा सरकार ने महिलाओं को साल में दो बार 5,000 रुपये (कुल 10,000 रुपये सालाना) देने की योजना शुरू की है।

असम (ओरुनोदोई योजना): असम की हिमंत बिस्वा सरमा सरकार भी महिलाओं को सशक्त बनाने के लिए हर महीने 1,250 रुपये की आर्थिक सहायता प्रदान कर रही है।

अब भाजपा ने संकल्प पत्र में युवाओं के लिए भी 3000 रुपये मासिक सहायता का वादा किया है, जो टीएमसी की 1500 रुपये वाली योजना से दोगुना है। साथ ही सरकारी नौकरियों में भर्ती तेज करने, उद्योग लगाने और युवाओं को रोजगार देने का भी वादा है। भाजपा नेता सुवेंदु अधिकारी और अन्य ने पहले ही कहा था कि सत्ता में आने पर 45 दिनों के अंदर महिलाओं और युवाओं को 3000 रुपये देना शुरू कर देंगे। अमित शाह ने आज संकल्प पत्र जारी करते हुए कहा कि बंगाल टीएमसी के ‘आतंक’ से मुक्ति चाहता है और भाजपा विकास, सुरक्षा और कल्याण पर फोकस करेगी।

Amit Kumar

लेखक के बारे में

Amit Kumar

डिजिटल पत्रकारिता की बदलती लहरों के बीच समाचारों की तह तक जाने की ललक अमित कुमार को इस क्षेत्र में खींच लाई। समकालीन राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय राजनीति पर पैनी नजर रखने के साथ-साथ अमित को जटिल विषयों के गूढ़ विश्लेषण में गहरी रुचि है। उत्तर प्रदेश के बरेली जिले के रहने वाले अमित को मीडिया जगत में एक दशक का अनुभव है। वे पिछले 4 वर्षों से लाइव हिन्दुस्तान में अपनी सेवाएं दे रहे हैं।


अमित न केवल समाचारों के त्वरित प्रकाशन में माहिर हैं, बल्कि वे खबरों के पीछे छिपे 'क्यों' और 'कैसे' को विस्तार से समझाने वाले एक्सप्लेनर लिखने में भी विशेष रुचि रखते हैं। डिजिटल पत्रकारिता के नए आयामों, जैसे कि कीवर्ड रिसर्च, ट्रेंड एनालिसिस और एआई-असिस्टेड कंटेंट ऑप्टिमाइजेशन को वे बखूबी समझते हैं। उनकी पत्रकारिता की नींव 'फैक्ट-चेकिंग' और सत्यापन पर टिकी है। एक मल्टीमीडिया पत्रकार के तौर पर अमित का सफर देश के प्रतिष्ठित संस्थानों के साथ रहा है। उन्होंने अमर उजाला, वन इंडिया, इंडिया टीवी और जी न्यूज जैसे बड़े मीडिया घरानों के साथ काम किया है।


अमित ने देश के प्रतिष्ठित भारतीय जनसंचार संस्थान (IIMC), दिल्ली से हिंदी पत्रकारिता में पीजी डिप्लोमा और गुरु जम्भेश्वर विश्वविद्यालय से जनसंचार में मास्टर डिग्री हासिल की है। उन्होंने यूनिसेफ और ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों से हेल्थ जर्नलिज्म का सर्टिफिकेशन भी प्राप्त किया है। एआई-असिस्टेड कंटेंट ऑप्टिमाइजेशन और एडिटोरियल प्लानिंग में उनकी विशेषज्ञता उन्हें आज के आधुनिक न्यूज रूम के लिए एक अनिवार्य स्तंभ बनाती है। पेशेवर जीवन से इतर, अमित एक जुनूनी घुमक्कड़ हैं जिन्हें हार्डकोर ट्रेकिंग और फोटोग्राफी का शौक है, साथ ही वे ऐतिहासिक और वास्तविक जीवन पर आधारित सिनेमा देखने के भी शौकीन हैं।

और पढ़ें