By Dheeraj Pal
PUBLISHED December 31, 2025

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गरुड़ पुराण: मृत्यु से पहले क्यों किया जाता है गौ दान?

हिंदू धर्म में गरुड़ महापुराण का काफी महत्व होता है। यह हिंदू धर्म के 18 महापुराणों में से एक है।

गरुड़ पुराण

यह भगवान विष्णु और पक्षी राज गरुड़ की बातचीत और व्यक्ति की मौत के बाद यमलोक की यात्रा से लेकर पाप-पुण्य को लेकर विस्तार से बताया गया है।

पाप-पुण्य

मृत्यु के दौरान और बाद में कई क्रिया कर्म कराया जाता है। ऐसे ही एक कर्म है गौ दान, जो मृत्यु से पहले कराया जाता है।

गौदान

चलिए जानते हैं कि गौ दान क्यों जरूरी है और इसका महत्व क्या है? गरुड़ पुराण में गौ दान को सर्वश्रेष्ठ दान माना गया है।

सर्वश्रेष्ठ दान

मान्यता है कि गौ दान करने से न सिर्फ व्यक्ति को जीवन में लाभ प्राप्त होते हैं बल्कि मृत्यु के बाद भी यह पुण्य याद रखा जाता है।

लाभ प्राप्त

यातनाएं

गरुड़ पुराण में बताया गया है कि जो भी व्यक्ति गौ दान करता है। उसे मृत्यु के बाद नरक की यातनाएं कम भोगनी पड़ती है।

वैतरणी नदी

मान्यता है कि मृत्यु के बाद व्यक्ति को यमलोक में पहुंचने के बाद वैतरणी नदी को पार करना पड़ता है। इस नदी में खून, मवाद, गंदगी बहती रहती है।

समय

कहते हैं कि यदि व्यक्ति जीवन में ज्यादा पाप किया होता है, तो व्यक्ति को नदी पार करने में उतना ही समय लगता है।

नदी पार कराती है गाय

ऐसे में मृत्यु से पहले गौदान करने से व्यक्ति की आत्मा को वैतरणी नदी के तट पर गाय मिलती है, जिसकी पूंछ पकड़कर वैतरणी नदी को आसानी से पार कर लेती है।

यह जानकारी सिर्फ मान्यताओं, धार्मिक ग्रंथों और विभिन्न माध्यमों पर आधारित है। किसी भी जानकारी को मानने से पहले विशेषज्ञ की सलाह लें।

नोट

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