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Hindi News मौसमरेमल का साया- क्या है नामों के पीछे का राज़ और कैसे रखे जाते हैं चक्रवाती तूफानों के नाम

रेमल का साया- क्या है नामों के पीछे का राज़ और कैसे रखे जाते हैं चक्रवाती तूफानों के नाम

मौसम विभाग ने बंगाल की खाड़ी में उठ रहे चक्रवाती तूफान रेमल को लेकर अलर्ट जारी कर दिया है। रविवार शाम तक यह बांग्लादेश और पश्चिम बंगाल के तटों से टकरा सकता है। आइए जानते हैं तूफ़ानों के नाम का राज़।

रेमल का साया- क्या है नामों के पीछे का राज़ और कैसे रखे जाते हैं चक्रवाती तूफानों के नाम
Jagritiलाइव हिंदुस्तान,पश्चिम बंगालSun, 26 May 2024 04:36 PM
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बंगाल की खाड़ी में खतरनाक रूप ले रहे तूफान ‘रेमल’ के रविवार देर रात तक पश्चिम बंगाल के सागर तट से टकराने की आशंका है। भारतीय मौसम विभाग के अनुसार पश्चिम बंगाल सहित असम, त्रिपुरा, मणिपुर और नागालैंड राज्यों में तेज़ हवाएं चल सकती है। साथ ही समुंद्र में एक मीटर से भी अधिक ऊंची लहरें उठने का अनुमान है। इसे लेकर अलर्ट भी जारी कर दिया गया है। 

लेकिन आपके मन में यह सवाल कई बार आता होगा कि इस तरह के तूफानों के नाम कौन रखता है और इस नामकरण के पीछे क्या वजह होती है। रेमल एक अरबी शब्द है और इसका शाब्दिक अर्थ रेत है। इसे यह नाम ओमान ने दिया है। 

मौसम में हो रहे बदलाव और तूफानों की स्थिति की जानकारी को लोगों तक आसानी से पहुंचाने के लिए चक्रवाती तूफानों का नामकरण किया जाने लगा था। 1972 में वर्ल्ड मीटीरियोलॉजिकल आर्गेनाइजेशन यानी डब्ल्यूएमओ ने ‘पीटीसी’ की स्थापना की थी। पीटीसी यानी पैनल ऑन ट्रॉपिकल साइकलोंस का उद्देश्य हिंद महासागर के क्षेत्रों में आने वाले तूफानों की चेतावनी देना और आपदा की रोकथाम के विषय पर काम करना है। 
भारत के अलावा पाकिस्तान, बांग्लादेश, श्रीलंका, थाइलैंड, मालदीव, म्यांमार, ईरान, कतर, सऊदी अरब और ओमान जैसे देश इस संगठन के सदस्य हैं। 2004 में ओमान में हुए पीटीसी की मीटिंग में अरब सागर और बंगाल की खाड़ी से उठने वाले तूफानों को लेकर चर्चा हुई। इस दौरान यह सहमति बनी कि इस क्षेत्र में आने वाले चकवाती तूफानों के नाम सभी सदस्य बारी-बारी से रखेंगे।

2020 में पीटीसी के सदस्यों ने मिलकर चक्रवातों के लिए नामों की एक सूची जारी की। इस सूची में 169 नाम थे जिसमें हर देश ने 13,13 नाम सुझाए थे। वर्तमान में इस क्षेत्र में आए सभी तूफानों के नाम इसी सूची में से रखे जाते हैं। हर सदस्य बारी-बारी से अल्फाबेटिकल ऑर्डर से नाम रखते हैं ताकि नामकरण में किसी तरह की भ्रम की स्थिति ना पैदा हो।

क्या है नाम रखने के पीछे की वजह?

चक्रवातों के नाम रखने के पीछे भी कारण है। छोटे और सरल नाम रखने से इसे आम लोग आसानी से याद रख सकते हैं। इसके अलावा एक कॉमन नाम होने की वजह से अलग-अलग देशों के वैज्ञानिकों, मीडिया और इससे जुड़े दूसरे स्टेकहोल्डर्स को एक दूसरे तक सूचनाएं पहुंचाने में आसानी होती है। एक नाम, एक ही समय पर एक से ज्यादा तूफान उठने की स्थिति में भी संवाद करने में काफ़ी मदद करता है।

नाम रखने वक्त इन बातों पर ध्यान देना जरूरी

देशों के लिए नाम रखते वक्त कुछ बातों को ध्यान में रखना जरूरी है। इसके लिए पीटीसी में कुछ नियम बनाए गए हैं। उदाहरण के लिए, तूफान के नाम किसी भी तरह के राजनीतिक चेहरे, धर्म, समुदाय, और संस्कृति से जुड़े नहीं होने चाहिए। इसके अलावा नाम किसी भी धर्म, समुदाय या व्यक्ति की भावनाओं को ठेस पहुंचाने वाले नहीं होने चाहिए। यह भी सुनिश्चित किया जाता है कि नाम छोटा, सरल और बोलने में कठिन ना हो। एक और चीज़ का ध्यान रखा जाता है कि तूफान के नाम में अधिकतम 8 अक्षर ही हो। एक नाम को एक से ज्यादा बार नहीं इस्तेमाल किया जाता है।