मॉनसून के लिए काल बनकर आ रहा अल नीनो; बारिश नहीं, इस बार सूखा पड़ सकता है

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अल नीनो का प्रभाव आमतौर पर भारतीय मॉनसून पर नकारात्मक पड़ता है। इसके कारण मानसूनी हवाएं कमजोर हो जाती हैं, जिससे विशेष रूप से उत्तर, मध्य और पश्चिम भारत में वर्षा की मात्रा घट जाती है। अल नीनो कम बारिश का कारण है।

मॉनसून के लिए काल बनकर आ रहा अल नीनो; बारिश नहीं, इस बार सूखा पड़ सकता है

मॉनसून का इंतजार कर रहे लोगों के लिए चिंताजनक खबर है। अल नीनो की स्थिति अब बन चुकी है। IMD की ताजा रिपोर्ट में यह जानकारी दी गई है। रिपोर्ट बताती है कि प्रशांत महासागर में पानी का तापमान सामान्य से 0.5 डिग्री सेल्सियस या ज्यादा गर्म हो गया है। यह स्थिति और मजबूत होने वाली है और 2026-27 की सर्दियों तक रह सकती है। कुछ वैज्ञानिक मॉडल्स कहते हैं कि यह बहुत तेज अल नीनो बन सकता है। अभी भारतीय महासागर में IOD न्यूट्रल है, यानी सामान्य स्थिति में है। भारत में IMD ने पहले ही इस साल औसत से कम बारिश की चेतावनी दी थी।

अल नीनो क्या है?

अल नीनो एक प्राकृतिक मौसमी घटना है। प्रशांत महासागर के मध्य और पूर्वी हिस्से में समुद्र का पानी अचानक ज्यादा गर्म हो जाता है। आमतौर पर वहां ठंडा पानी ऊपर आता है, लेकिन अल नीनो में हवाएं कमजोर पड़ जाती हैं। इससे गर्म पानी फैलता है और पूरी दुनिया के मौसम का पैटर्न बदल जाता है। यह हर 2 से 7 साल में होता है। इसके उलट ला नीना में पानी ठंडा हो जाता है। अल नीनो का नाम स्पेनिश भाषा से आया है, जिसका मतलब बच्चा है। यह दक्षिण अमेरिका के मछुआरों द्वारा दिया गया नाम है।

मॉनसून पर क्या असर पड़ेगा?

अल नीनो भारतीय मॉनसून को आमतौर पर कमजोर करता है। इससे मॉनसून की हवाएं कमजोर पड़ती हैं। खासकर उत्तर, मध्य और पश्चिम भारत में बारिश कम हो जाती है। पिछले रिकॉर्ड्स देखें तो अल नीनो वाले सालों में करीब 60 प्रतिशत बार औसत से कम बारिश हुई है। 2026 में मजबूत अल नीनो की वजह से सूखे, फसलों में नुकसान, पानी की कमी और खाने की समस्या बढ़ सकती है। कुछ जगहों पर भारी बारिश या बाढ़ भी आ सकती है, लेकिन कुल मिलाकर बारिश कम होने की ज्यादा आशंका है।

विश्व मौसम संगठन (WMO) ने चेतावनी दी है कि अल नीनो से गर्मी बढ़ेगी और मौसम के ज्यादा चरम रूप देखने को मिल सकते हैं। भारत के लिए यह किसानों, पानी और अर्थव्यवस्था के लिए चुनौती है। सरकार, किसान और मौसम विभाग को सतर्क रहना चाहिए। पानी बचाना, अलग-अलग फसलें लगाना, बीमा कराना और बेहतर पूर्वानुमान पर ध्यान देना जरूरी है। अल नीनो हर बार एक जैसा असर नहीं करता, लेकिन तैयारी से नुकसान कम किया जा सकता है। IMD स्थिति पर लगातार नजर रख रहा है।

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Niteesh Kumar

लेखक के बारे में

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पत्रकार नीतीश कुमार 8 साल से अधिक समय से मीडिया इंडस्ट्री में एक्टिव हैं। जनसत्ता डिजिटल से बतौर कंटेंट प्रोड्यूसर शुरुआत हुई। लाइव हिन्दुस्तान से जुड़ने से पहले टीवी9 भारतवर्ष और दैनिक भास्कर डिजिटल में भी काम कर चुके हैं। पत्रकार नीतीश कुमार को खबरें लिखने के साथ ग्राउंड रिपोर्टिंग का शौक है। लाइव हिन्दुस्तान यूट्यूब चैनल के लिए लोकसभा चुनाव 2024, दिल्ली विधानसभा चुनाव 2025 और बिहार विधानसभा चुनाव 2025 की कवरेज कर चुके हैं। फिलहाल लाइव हिन्दुस्तान के लिए नेशनल और इंटरनेशनल सेक्शन की खबरें लिखते हैं। पत्रकार नीतीश कुमार को ब्रेकिंग न्यूज लिखने के साथ खबरों का गहराई से विश्लेषण करना पसंद है। राजनीति से जुड़ी खबरों पर मजबूत पकड़ और समझ रखते हैं। समसामयिक राजनीतिक मुद्दों पर कई सारे लंबे लेख लिख चुके हैं। पत्रकार नीतीश कुमार ने पत्रकारिता का पढ़ाई IIMC, दिल्ली (2016-17 बैच) से हुई। इससे पहले दिल्ली यूनिवर्सिटी के महाराजा अग्रसेन कॉलेज से पत्रकारिता में ग्रेजुएशन किया। पत्रकार नीतीश कुमार मूल रूप से उत्तर प्रदेश के मऊ जिले के रहने वाले हैं। राजनीति, खेल के साथ सिनेमा में भी दिलचस्पी रखते हैं। फिल्में देखना और रिव्यू करना व उन पर चर्चा करना हॉबी है।

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