मॉनसून पर संकट के बादल, शुरू होने वाला है अल नीनो का खतरनाक दौर; भारत पर भयंकर असर

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अल नीनो समुद्र में होने वाली एक हलचल है, जिसमें प्रशांत महासागर का पानी असामान्य रूप से गर्म हो जाता है। इसकी वजह से पूरी दुनिया का मौसम बिगड़ जाता है, हवाएं कमजोर हो जाती हैं और भारत में मॉनसून रुक जाता है, जिससे देश में भयंकर सूखे और गर्मी का खतरा बढ़ जाता है।

मॉनसून पर संकट के बादल, शुरू होने वाला है अल नीनो का खतरनाक दौर; भारत पर भयंकर असर

संयुक्त राष्ट्र ने चेतावनी दी है कि अल नीनो का एक नया और खतरनाक दौर अगले कुछ हफ्तों में शुरू हो सकता है, जिससे जलवायु परिवर्तन की मार झेल रही धरती के तापमान में और बढ़ोतरी हो सकती है। WMO यानी विश्व मौसम विज्ञान संगठन की ओर से जारी इस चेतावनी में कहा गया है कि अल नीनो के साल 2026 के बाकी महीनों में और मजबूत होने का अनुमान है, जिससे दुनिया के कई हिस्सों में भीषण और चरम मौसम देखने को मिल सकता है। कई देशों की मौसम एजेंसियों के अनुमान बताते हैं कि यह अब तक का सबसे मजबूत अल नीनो हो सकता है, जिसे विशेषज्ञ 'सुपर अल नीनो' भी कह रहे हैं।

भारत पर होगा असर

यह भारतीय मॉनसून को भी कमजोर कर सकता है और अफ्रीका के कुछ हिस्सों में सूखा ला सकता है, जबकि इसके विपरीत दक्षिणी अमेरिका जैसे इलाकों में भारी बारिश के कारण बाढ़ का खतरा बढ़ जाता है। इतिहास गवाह है कि अल नीनो के कारण बड़े पैमाने पर फसलों की बर्बादी होती है, जिससे दुनिया भर में खाने-पीने की चीज़ें महंगी हो जाती हैं और अर्थव्यवस्था को भारी नुकसान होता है।

आमतौर पर अल नीनो वाले साल में दुनिया का तापमान लगभग 0.2 डिग्री सेल्सियस तक बढ़ जाता है। इस स्थिति को देखते हुए जलवायु वैज्ञानिकों का मानना है कि साल 2027 के अब तक का सबसे गर्म साल होने के पूरे आसार हैं।

कब आएगा अल नीनो

अल नीनो के आने के सटीक समय और उसके प्रभाव का अंदाजा लगाना हमेशा से चुनौतीपूर्ण रहा है, इसलिए वैज्ञानिक इसके संकेतों को समझने के लिए प्रशांत महासागर के मध्य हिस्से पर लगातार नजर रख रहे हैं। दिसंबर के महीने में जहां इस क्षेत्र का पानी औसत से ठंडा था और अल नीनो का कोई नामोनिशान नहीं था, वहीं मार्च आते-आते स्थिति पूरी तरह बदल गई। मध्य प्रशांत महासागर का पानी गर्म होने लगा और दक्षिण अमेरिका के तट के पास बहुत गर्म पानी देखा गया। अप्रैल तक अल नीनो का खतरा बिल्कुल साफ हो गया, क्योंकि मुख्य निगरानी क्षेत्र का तापमान तेजी से बढ़ रहा था।

असल में अल नीनो तब बनता है, जब हवा के रुख में बदलाव के कारण गर्म पानी उष्णकटिबंधीय प्रशांत महासागर में फैल जाता है। मौसम वैज्ञानिकों को पूरा भरोसा है कि एक बड़ी मौसमी घटना आ रही है, जो अब तक का एक नया रिकॉर्ड भी बना सकती है। यदि प्रशांत महासागर के इस क्षेत्र का तापमान लंबे समय तक सामान्य से दो डिग्री सेल्सियस से ज्यादा बढ़ जाता है, तो उसे 'सुपर अल नीनो' कहा जाता है।

तोड़ सकता है सारे रिकॉर्ड

साल 1950 के बाद से ऐसे केवल कुछ ही मामले सामने आए हैं, लेकिन इस बार के पूर्वानुमान बताते हैं कि यह नया अल नीनो पुराने सभी रिकॉर्ड तोड़ सकता है। सेटेलाइट और महासागरीय उपकरणों के मुताबिक, समुद्र की सतह से सैकड़ों मीटर नीचे गर्म पानी की एक बहुत बड़ी लहर पूर्व की ओर बढ़ रही है।

समुद्र के भीतर की यह गर्मी अक्सर सतह के पानी को गर्म करने का संकेत होती है, जो बाद में ऊपर की हवा को गर्म करती है और दुनिया भर के मौसम को बिगाड़ देती है। संयुक्त राष्ट्र के महासचिव एंटोनियो गुटेरेस ने भी आगाह किया है कि अल नीनो की स्थिति पहले से ही गर्म हो रही दुनिया की आग में घी डालने का काम करेगी और इसके प्रभाव बहुत विनाशकारी होंगे।

वैसे तो कोई भी दो अल नीनो एक जैसे नहीं होते और अलग-अलग देशों पर इसका असर अलग-अलग समय पर पड़ता है, लेकिन एक मजबूत अल नीनो के सामान्य प्रभाव काफी खतरनाक होते हैं। इसके कारण दक्षिण अमेरिका, दक्षिण-पूर्वी एशिया और ऑस्ट्रेलिया के कुछ हिस्सों में मौसम बेहद गर्म और सूखा हो जाता है, जिससे सूखे और जंगलों में आग लगने का खतरा बढ़ जाता है।

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Nisarg Dixit

लेखक के बारे में

Nisarg Dixit

निसर्ग दीक्षित न्यूजरूम में करीब एक दशक का अनुभव लिए निसर्ग दीक्षित शोर से ज़्यादा सार पर भरोसा करते हैं। पिछले 4 साल से वह लाइव हिनुस्तान में डिप्टी चीफ प्रोड्यूसर के रूप में कार्यरत हैं, जहां खबरों की योजना, लेखन, सत्यापन और प्रस्तुति की जिम्मेदारी संभालते हैं। इससे पहले दैनिक भास्कर और न्यूज़18 जैसे बड़े मीडिया संस्थानों में काम कर चुके हैं, जहाँ उन्होंने ग्राउंड रिपोर्टिंग से लेकर डेस्क तक की भूमिकाएं निभाईं। उन्होंने माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय से पत्रकारिता की पढ़ाई की, जिसने उनके काम करने के तरीके को व्यावहारिक और तथ्य आधारित बनाया। निसर्ग की खास रुचि खोजी रिपोर्टिंग, ब्रेकिंग स्टोरीज़ और विज़ुअल न्यूज़ स्टोरीज़ में है। वे जटिल मुद्दों को सरल भाषा और स्पष्ट तथ्यों के साथ प्रस्तुत करने में विश्वास रखते हैं। राजनीति और जांच पड़ताल से जुड़े विषयों पर उनकी मजबूत पकड़ है। निसर्ग लोकसभा चुनावों, कई राज्यों के विधानसभा चुनावों और अहम घटनाओं को कवर कर चुके हैं। साथ ही संसदीय कार्यवाही और सुप्रीम कोर्ट की महत्वपूर्ण सुनवाइयों को नियमित रूप से कवर करते हैं। गूगल जर्नलिस्ट्स स्टूडियो में भी निसर्ग योगदान देते हैं।

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