Monsoon 2026: 26 मई को ही केरल पहुंच रहा था मॉनसून, फिर कहां अटका; क्यों ठिठका? IMD ने क्या बताया

लाइव हिन्दुस्तान, नई दिल्ली
Follow us on Google News
share

Monsoon 2026: वैज्ञानिकों के मुताबिक, अरब सागर और बंगाल की खाड़ी में हवाओं का वह दबाव नहीं बन पा रहा है, जो मॉनसून को आगे बढ़ाने के लिए जरूरी होता है।

Monsoon 2026: 26 मई को ही केरल पहुंच रहा था मॉनसून, फिर कहां अटका; क्यों ठिठका? IMD ने क्या बताया

Monsoon 2026: भारत में आम तौर पर मॉनसून एक जून को केरल तट पर दस्तक देता है लेकिन इस बार इसका इंतजार लंबा खिंच रहा है क्योंकि भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) ने पहले कहा था कि इस साल दक्षिण-पश्चिम मॉनसून 26 मई को केरल तट पहुंच जाएगा लेकिन ऐसा नहीं हो सका। दरअसल, अपने निर्धारित समय से पहले दक्षिण-पश्चिम मॉनसून ने रफ्तार पकड़ी थी और निर्धारित 22 मई से पांच-छह दिन पहले ही अंडमान निकोबार द्वीप समूह पहुंच चुकी थी लेकिन उसके कुछ दिनों के बाद ही मॉनसून बीच रास्ते ठिठक गया।

अब IMD ने सोमवार को अपने पूर्वानुमान में कहा है कि दक्षिण-पश्चिम मॉनसून के अगले दो से तीन दिनों के अंदर केरल पहुंचने की संभावना है। मौसम विभाग ने कहा, ''अगले दो- तीन दिन में दक्षिण-पश्चिम मॉनसून के दक्षिण-पश्चिम और दक्षिण-पूर्व अरब सागर के कुछ और हिस्सों, लक्षद्वीप, केरल और तमिलनाडु के कुछ हिस्सों में आगे बढ़ने के लिए अनुकूल परिस्थितियां हैं।'' IMD ने कहा कि इस अवधि के दौरान दक्षिण-पश्चिम, पश्चिम-मध्य, पूर्व-मध्य और उत्तर-पूर्व बंगाल की खाड़ी के कुछ और हिस्सों एवं दक्षिण-पूर्वी बंगाल की खाड़ी के शेष हिस्सों में भी यह आगे बढ़ सकता है और 3 जून को दस्तक दे सकता है।

पहले 26 मई, फिर 29 मई थी डेडलाइन

IMD ने इससे पहले केरल में मॉनसून के आगमन की तारीख 26 मई बताई थी। हालांकि, मॉनसून के आगे बढ़ने की प्रक्रिया में देरी हुई और विभाग ने 29 मई को कहा था कि इसका आगमन अगले सप्ताह हो सकता है। इसके बाद पिछले सप्ताह जारी अपने संशोधित पूर्वानुमान में IMD ने कहा कि इस मौसम में बारिश सामान्य से कम रहेगी। IMD ने यह भी कहा कि इस वर्ष भारत में दीर्घकालिक औसत (LPA) का 90 प्रतिशत वर्षा होने की संभावना है।

बारिश कम होने की आशंका

LPA से आशय किसी क्षेत्र में एक निश्चित अवधि, जैसे एक माह या पूरे मौसम के दौरान हुई वर्षा के उस औसत से है, जिसकी गणना आमतौर पर 30 से 50 वर्षों के दीर्घकालिक आंकड़ों के आधार पर की जाती है। वर्ष 1971 से 2020 के आंकड़ों के आधार पर पूरे भारत में मौसमी वर्षा का एलपीए 87 सेंटीमीटर निर्धारित किया गया है। यदि किसी वर्ष मॉनसून के दौरान होने वाली वर्षा एलपीए के 90 प्रतिशत से कम रहती है, तो आईएमडी उसे ''कम वर्षा वाला'' मानसून घोषित करता है। IMD के अनुसार, इस वर्ष सामान्य से कम वर्षा होने की एक प्रमुख वजह अल नीनो परिस्थितियों का विकसित होना हो सकता है। अल नीनो की स्थिति आमतौर पर भारत में दक्षिण-पश्चिम मॉनसून के दौरान वर्षा को प्रभावित करती है और बारिश कम होने की आशंका बढ़ जाती है।

कहां अटका मॉनसून, क्यों ठिठका?

मौसम वैज्ञानिकों के मुताबिक, फिलहाल दक्षिण-पश्चिम मॉनसून श्रीलंका के पास कमजोर मौसमी दबाव और चक्रवाती परिस्थितियों के कारण अटका हुआ है। वैज्ञानिकों के मुताबिक, अरब सागर और बंगाल की खाड़ी में हवाओं का वह दबाव नहीं बन पा रहा है, जो मॉनसून को आगे बढ़ाने के लिए जरूरी होता है। इसके कारण मॉनसून निर्धारित समय से करीब छह दिन पहले अंडमान निकोबार पहुंचने पहुंचने के बावजूद बंगाल की खाड़ी में आगे नहीं बढ़ पाया और वहीं ठिठक गया। दूसरे तरफ श्रीलंका के पास उसका एक शिरा अटक गया।

मौसम वैज्ञानिकों का कहना है कि इस समय उत्तर भारत में कई साइक्लोनिक सर्कुलेशन सक्रिय हैं, इस वजह से हिंद महासागर की ओर से प्रायद्वीपीय भारत की तरफ आने वाली नमी वाली हवाएं कमजोर पड़ गई हैं। इसके अलावा बंगाल की खाड़ी और अरब सागर में भी हवा का कम दबाव वाला चक्रवात मॉनसून की रफ्तार को रोक रहा है। वैज्ञानिकों के मुताबिक, प्रशांत महासागर में अल नीनो का प्रभाव भी भारतीय मॉनसून के पैटर्न को प्रभावित कर रहा है, जिससे बारिश में देरी हो रही है।

कैसा रहेगा आपके शहर का मौसम, जानें

Pramod Praveen

लेखक के बारे में

Pramod Praveen

प्रमोद कुमार प्रवीण देश-विदेश की समसामयिक घटनाओं और राजनीतिक हलचलों पर चिंतन-मंथन करने वाले और पैनी पकड़ रखने वाले हैं। ईटीवी से पत्रकारिता में करियर की शुरुआत की। कुल करीब दो दशक का इलेक्ट्रॉनिक, प्रिंट और डिजिटल मीडिया में काम करने का अनुभव रखते हैं। संप्रति लाइव हिन्दुस्तान में विगत तीन से ज्यादा वर्षों से समाचार संपादक के तौर पर कार्यरत हैं और अमूमन सांध्यकालीन पारी में बहुआयामी पत्रकारीय भूमिका का निर्वहन कर रहे हैं। हिन्दुस्तान टाइम्स ग्रुप से पहले NDTV, जनसत्ता, ईटीवी, इंडिया न्यूज, फोकस न्यूज, साधना न्यूज और ईटीवी में कार्य करने का अनुभव है। कई संस्थानों में सियासी किस्सों का स्तंभकार और लेखक रहे हैं। विश्वविद्यालय स्तर से लेकर कई अकादमिक, शैक्षणिक और सामाजिक संगठनों द्वारा विभिन्न मंचों पर अकादमिक और पत्रकारिता में उल्लेखनीय योगदान के लिए सम्मानित भी हुए हैं। रुचियों में फिल्में देखना और पढ़ना-पढ़ाना पसंद, सामाजिक और जनसरोकार के कार्यों में भी रुचि है।

अकादमिक योग्यता: भूगोल में जलवायु परिवर्तन जैसे गंभीर और संवेदनशील विषय पर पीएचडी उपाधिधारक हैं। इसके साथ ही पत्रकारिता एवं जनसंचार में स्नातकोत्तर भी हैं। पीएचडी शोध का विषय- 'मध्य गंगा घाटी में जलवायु परिवर्तन-एक भौगोलिक अध्ययन' रहा है। शोध के दौरान करीब दर्जन भर राष्ट्रीय और अंततराष्ट्रीय सम्मेलनों में शोध पत्र पढ़ने और प्रस्तुत करने का अनुभव है। भारतीय विज्ञान कांग्रेस में भी शोध पोस्टर प्रदर्शनी का चयन हो चुका है। शोध पर आधारित एक पुस्तक के लेखक हैं। पुस्तक का नाम 'मध्य गंगा घाटी में जलवायु परिवर्तन' है। पत्रकारिता में आने से पहले महाविद्यालय स्तर पर शिक्षण कार्य भी कर चुके हैं।

और पढ़ें

लेटेस्ट   Hindi News ,    बॉलीवुड न्यूज,   बिजनेस न्यूज,   टेक ,   ऑटो,   करियर , और   राशिफल, पढ़ने के लिए Live Hindustan App डाउनलोड करें।