अल नीनो के बावजूद इस साल क्यों हो रही इतनी अच्छी बारिश? मौसम विभाग ने बताया
Mausam Samachar: इस समय पूरे देश में मॉनसून सक्रिय है। ओडिशा के ऊपर बने निम्न दबाव और महाराष्ट्र के ऊपर चक्रवाती परिसंचरण के साथ अरब सागर से लगातार नमी के कारण महाराष्ट्र में बादल बार-बार बने, जिससे लगातार भारी बारिश हुई।

IMD on Monsoon Rain: इस बार अलनीनो के बावजूद मॉनसून ने जुलाई महीने में शानदार वापसी की है। जून के अंत तक पूरे देश में सामान्य से करीब 40 प्रतिशत कम बारिश दर्ज की गई थी, लेकिन जुलाई में मुंबई समेत पश्चिमी तट के कई इलाकों में हुई भारी बारिश ने स्थिति में तेजी से सुधार किया। अब देशभर में कुल बारिश की कमी घटकर मात्र 17 प्रतिशत रह गई है। मौसम विभाग के आंकड़ों के अनुसार, जुलाई के शुरुआती दिनों में पश्चिमी तट पर हुई मूसलाधार बारिश ने न केवल स्थानीय स्तर पर बाढ़ जैसे हालात पैदा किए, बल्कि राष्ट्रीय स्तर पर मॉनसून की कमी को भी काफी हद तक पूरा कर दिया।
वैज्ञानिकों का मानना है कि इस बदलाव की वजह जलवायु परिवर्तन है जिससे मानसून का स्वभाव बदल चुका है। विशेषज्ञों के मुताबिक, पहले मॉनसून में कई दिनों तक हल्की या मध्यम बारिश होती थी। अब स्थिति बदल रही है। बारिश वाले दिनों की संख्या घट रही है, लेकिन जब बारिश होती है तो बहुत कम समय में अत्यधिक मात्रा में पानी बरसता है। इसका कारण गर्म होती हवा और समुद्र हैं, जो वातावरण में पहले से अधिक नमी जमा कर रहे हैं।
मुंबई में जुलाई के पहले सप्ताह के दौरान कई बार सौ मिलीमीटर से अधिक बारिश दर्ज की गई। कोलाबा मौसम केंद्र में एक से सात जुलाई के बीच 791 मिलीमीटर बारिश हुई। यह पूरे जुलाई महीने के औसत से भी अधिक है। वहीं, सांताक्रूज इलाके में 879 मिलीमीटर बारिश दर्ज की गई, जो उसके पूरे महीने के सामान्य औसत के बराबर है।
वैज्ञानिक महेश पलावत के अनुसार, इस समय मॉनसून सक्रिय है। ओडिशा के ऊपर बने निम्न दबाव और महाराष्ट्र के ऊपर चक्रवाती परिसंचरण के साथ अरब सागर से लगातार नमी के कारण महाराष्ट्र में बादल बार-बार बने, जिससे लगातार भारी बारिश हुई।
बरसात में बढ़ोतरी
वर्ष 1981 से 2000 की तुलना में 2001 से 2024 के बीच मुंबई की औसत मानसूनी बारिश में लगभग 15 प्रतिशत और पुणे में 23 प्रतिशत की बढ़ोतरी दर्ज की गई है। भविष्य में महाराष्ट्र और गुजरात के तटीय इलाकों में भारी बारिश वाले दिनों की संख्या लगभग एक सप्ताह तक बढ़ सकती है। क्लाइमेट ट्रेंड्स की निदेशक आरती खोसला ने बताया कि भविष्य में अत्यधिक बारिश की घटनाएं और बढ़ेंगी। ऐसे में जलवायु अनुकूल बुनियादी ढांचे, बेहतर ड्रेनेज, प्रकृति आधारित समाधान और वैज्ञानिक शहरी नियोजन को विकास का हिस्सा बनाना होगा।
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लेखक के बारे में
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