एक ही कोख से जन्मीं जुड़वा बहनें, लेकिन दोनों के पिता अलग! DNA टेस्ट ने खोला 49 साल पुराना राज

Amit Kumar लाइव हिन्दुस्तान, लंदन
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ब्रिटेन में एक बेहद हैरान करने वाला दुर्लभ मामला सामने आया है। 49 साल की जुड़वा बहनों ने जब DNA टेस्ट कराया, तो पता चला कि एक ही समय एक ही मां की कोख से जन्म लेने के बाद भी दोनों के बायोलॉजिकल पिता अलग-अलग हैं।

एक ही कोख से जन्मीं जुड़वा बहनें, लेकिन दोनों के पिता अलग! DNA टेस्ट ने खोला 49 साल पुराना राज

क्या आपने कभी सुना है कि दो जुड़वा बहनों का जन्म एक ही समय पर एक ही मां के गर्भ से हुआ हो, लेकिन उनके पिता अलग-अलग हों? ब्रिटेन में एक ऐसा ही हैरान करने वाला और ऐतिहासिक मामला सामने आया है। यहां 49 साल की दो जुड़वा बहनों ने जब अपना डीएनए (DNA) टेस्ट कराया, तो उनके पैरों तले जमीन खिसक गई। पता चला कि वे दोनों असल में 'हाफ-सिस्टर्स' हैं और उनके बायोलॉजिकल पिता अलग-अलग हैं। यह मेडिकल साइंस की दुनिया में एक बेहद दुर्लभ घटना है।

आखिर कैसे खुला 49 साल पुराना राज?

मिशेल और लवीनिया ऑस्बॉर्न नाम की इन जुड़वा बहनों को लंबे समय से अपने पिता की पहचान को लेकर शक था। मिशेल को हमेशा लगता था कि उनकी शक्ल उस इंसान (जेम्स) से बिल्कुल नहीं मिलती, जिसे वह अपना पिता मानती आई हैं। अपने इसी शक को दूर करने के लिए मिशेल ने घर पर ही डीएनए टेस्ट किट मंगवाई।

जब डीएनए रिपोर्ट सामने आई, तो पता चला कि जेम्स उनके असली पिता नहीं हैं। इसके बाद लवीनिया ने भी सच्चाई जानने के लिए अपना डीएनए टेस्ट कराया। लवीनिया के टेस्ट के नतीजों ने एक और बड़े रहस्य से पर्दा उठा दिया- पता चला कि मिशेल और लवीनिया दोनों के ही पिता अलग-अलग व्यक्ति हैं।

क्या है यह दुर्लभ बायोलॉजिकल चमत्कार?

विज्ञान की दुनिया में इस घटना को बेहद दुर्लभ माना जाता है। आइए समझते हैं कि यह कैसे संभव है:

  • मेडिकल भाषा में इस प्रक्रिया को 'हेटेरोपैटरनल सुपरफेकंडेशन' कहा जाता है।
  • यह तब होता है जब एक ही मासिक धर्म के दौरान एक महिला के शरीर से दो अंडे रिलीज होते हैं।
  • यदि बहुत कम समय के अंतराल में ये दोनों अंडे दो अलग-अलग पुरुषों के स्पर्म से फर्टिलाइज हो जाएं, तो अलग-अलग पिता वाले जुड़वा बच्चों का जन्म होता है।
  • पूरी दुनिया के मेडिकल इतिहास में अब तक ऐसे 20 से भी कम मामले रिकॉर्ड किए गए हैं।
  • ब्रिटेन के इतिहास में यह अपनी तरह का पहला कानूनी और वैज्ञानिक रूप से दर्ज मामला है।

मां ने जिंदगी भर छिपाए रखा यह राज

इन दोनों बहनों की मां ने यह सच्चाई जिंदगी भर एक राज ही रहने दी। दुखद बात यह रही कि साल 2022 में जब इन डीएनए टेस्ट के नतीजे फाइनल हुए, उसी दौरान उनकी मां का निधन हो गया। बीबीसी रेडियो 4 की सीरीज 'द गिफ्ट' में अपना अनुभव शेयर करते हुए बहनों ने बताया कि उन्होंने अब अपने-अपने असली पिताओं को ढूंढ निकाला है।

मिशेल के असली (बायोलॉजिकल) पिता का नाम एलेक्स निकला, जो उनकी मां के भाई का दोस्त था। वहीं, लवीनिया के बायोलॉजिकल पिता का नाम आर्थर है।

'हम किसी चमत्कार से कम नहीं'

सालों बाद अपने असली पिताओं से मिलकर दोनों बहनें काफी खुश हैं। लवीनिया अब अक्सर महीने में कई बार अपने पिता आर्थर से मिलने जाती हैं। इस पूरी घटना पर बात करते हुए बहनों का कहना है कि वे खुद को किसी 'चमत्कार' से कम नहीं मानतीं। उनका कहना है कि डीएनए रिपोर्ट ने भले ही उनके पिता अलग होने का सच बताया हो, लेकिन इससे उनके बीच के रिश्ते और प्यार में कोई कमी नहीं आई है। वे पहले की तरह ही एक-दूसरे के बेहद करीब हैं।

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लेखक के बारे में

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डिजिटल पत्रकारिता की बदलती लहरों के बीच समाचारों की तह तक जाने की ललक अमित कुमार को इस क्षेत्र में खींच लाई। समकालीन राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय राजनीति पर पैनी नजर रखने के साथ-साथ अमित को जटिल विषयों के गूढ़ विश्लेषण में गहरी रुचि है। उत्तर प्रदेश के बरेली जिले के रहने वाले अमित को मीडिया जगत में एक दशक का अनुभव है। वे पिछले 4 वर्षों से लाइव हिन्दुस्तान में अपनी सेवाएं दे रहे हैं।


अमित न केवल समाचारों के त्वरित प्रकाशन में माहिर हैं, बल्कि वे खबरों के पीछे छिपे 'क्यों' और 'कैसे' को विस्तार से समझाने वाले एक्सप्लेनर लिखने में भी विशेष रुचि रखते हैं। डिजिटल पत्रकारिता के नए आयामों, जैसे कि कीवर्ड रिसर्च, ट्रेंड एनालिसिस और एआई-असिस्टेड कंटेंट ऑप्टिमाइजेशन को वे बखूबी समझते हैं। उनकी पत्रकारिता की नींव 'फैक्ट-चेकिंग' और सत्यापन पर टिकी है। एक मल्टीमीडिया पत्रकार के तौर पर अमित का सफर देश के प्रतिष्ठित संस्थानों के साथ रहा है। उन्होंने अमर उजाला, वन इंडिया, इंडिया टीवी और जी न्यूज जैसे बड़े मीडिया घरानों के साथ काम किया है।


अमित ने देश के प्रतिष्ठित भारतीय जनसंचार संस्थान (IIMC), दिल्ली से हिंदी पत्रकारिता में पीजी डिप्लोमा और गुरु जम्भेश्वर विश्वविद्यालय से जनसंचार में मास्टर डिग्री हासिल की है। उन्होंने यूनिसेफ और ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों से हेल्थ जर्नलिज्म का सर्टिफिकेशन भी प्राप्त किया है। एआई-असिस्टेड कंटेंट ऑप्टिमाइजेशन और एडिटोरियल प्लानिंग में उनकी विशेषज्ञता उन्हें आज के आधुनिक न्यूज रूम के लिए एक अनिवार्य स्तंभ बनाती है। पेशेवर जीवन से इतर, अमित एक जुनूनी घुमक्कड़ हैं जिन्हें हार्डकोर ट्रेकिंग और फोटोग्राफी का शौक है, साथ ही वे ऐतिहासिक और वास्तविक जीवन पर आधारित सिनेमा देखने के भी शौकीन हैं।

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