स्टार्टअप को मिली ₹5 करोड़ की फंडिंग, फाउंडर ने खरीदी लग्जरी कार और...; इन्वेस्टर ने लगा दी क्लास

लाइव हिन्दुस्तान, मुंबई
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मुंबई के प्रमुख वेंचर कैपिटलिस्ट और Ice VC के फाउंडिंग पार्टनर मृणाल झावेरी ने एक युवा एंटरप्रेन्योर की खुलकर आलोचना की है। फंडिंग मिलते ही फाउंडर द्वारा लग्जरी खर्च करने को उन्होंने अनुचित बताते हुए कहा कि स्टार्टअप फंडिंग को सैलरी हाइक की तरह नहीं लेना चाहिए।

Mrinal Jhaveri

स्टार्टअप को सीड फंडिंग में ₹5 करोड़ मिलते ही फाउंडर ने लग्जरी कार खरीद ली और शहर के महंगे इलाके में बड़े अपार्टमेंट में शिफ्ट हो गए। इस खबर ने मुंबई के इन्वेस्टमेंट सर्किल में तहलका मचा दिया है। Ice VC के फाउंडिंग पार्टनर मृणाल झावेरी ने इस घटना पर खुलकर नाराजगी जताते हुए कहा कि फंडिंग का पैसा बिजनेस ग्रोथ के लिए है, न कि फाउंडर की व्यक्तिगत लग्जरी लाइफस्टाइल के लिए। झावेरी के इस बयान ने सोशल मीडिया पर तूफान खड़ा कर दिया है और पूरे स्टार्टअप इकोसिस्टम में फाउंडर्स के वेतन, खर्च और फंड यूज को लेकर जोरदार बहस शुरू हो गई है।

झावेरी ने अपने पोस्ट में क्या लिखा है?

झावेरी ने अपने लिंक्डइन पोस्ट में इस घटना का जिक्र करते हुए लिखा कि पिछले साल एक फाउंडर को सीड फंडिंग में ₹5 करोड़ मिले। सबसे पहले उसने एक नई लग्जरी कार खरीद ली और एक बड़े, महंगे अपार्टमेंट में रहने चला गया। इसके बाद मुझे उसके साथ बहुत अजीब और असहज बातचीत करनी पड़ी। उन्होंने आगे कहा कि इस तरह के खर्चे न सिर्फ फंड की बर्बादी हैं बल्कि इन्वेस्टर्स के भरोसे को भी तोड़ते हैं। झावेरी के इस पोस्ट ने सोशल मीडिया पर बहस छेड़ दी है, जहां फाउंडर्स, इन्वेस्टर्स और स्टार्टअप कम्युनिटी के लोग फाउंडर्स को खुद को कितना वेतन देना चाहिए, इस मुद्दे पर चर्चा कर रहे हैं।

फाउंडर्स के लिए गाइडलाइंस

मृणाल झावेरी ने अपने पोस्ट में विभिन्न फंडिंग स्टेज के अनुसार फाउंडर्स के लिए वेतन की स्पष्ट गाइडलाइंस की भी जानकारी दी है। उनका मानना है कि फाउंडर्स को सैलरी तय करते समय स्टार्टअप की वर्तमान स्थिति, ट्रैक्शन और भविष्य की जरूरतों को ध्यान में रखना चाहिए।

  • सीड स्टेज (₹4 से 12 करोड़ फंडिंग): इस शुरुआती चरण में फाउंडर को खुद को ₹60,000 से ₹1.2 लाख प्रतिमाह की सैलरी देनी चाहिए। झावेरी ने साफ कहा कि बिजनेस में पैसा बर्बाद हो रहा है और आपने अभी तक कुछ भी साबित नहीं किया है। ऐसे में लग्जरी खर्चे बिल्कुल गलत हैं।
  • सीरीज A (₹20 से 35 करोड़ फंडिंग): इस स्टेज पर फाउंडर्स कुछ ठोस परिणाम दिखा चुके होते हैं। इसलिए वे खुद को ₹3 लाख से ₹5 लाख मासिक सैलरी दे सकते हैं।
  • सीरीज B (₹50 से 100 करोड़ फंडिंग): यहां फाउंडर्स को ₹5 लाख से ₹7 लाख प्रतिमाह बेस सैलरी मिलनी चाहिए, साथ ही बिजनेस माइलस्टोन्स पर आधारित अतिरिक्त परफॉर्मेंस लिंक्ड इनसेंटिव भी दिए जा सकते हैं।
  • सीरीज C और उससे आगे: सफल फाउंडर्स जो अपने टारगेट्स पूरा करते हैं, वे सालाना ₹3 करोड़ से ₹4 करोड़ या उससे भी ज्यादा कमा सकते हैं। झावेरी इस स्टेज पर फाउंडर्स को अपनी कुछ इक्विटी बेचकर 'कुछ पैसा निकालने' की सलाह भी देते हैं ताकि उनका व्यक्तिगत वित्तीय दबाव कम हो।

झावेरी ने अपने पोस्ट में आगे लिखा कि मैं साफ कर दूं कि मैं नहीं चाहता कि मेरे फाउंडर्स किराए या स्कूल फीस को लेकर तनाव में रहें। यह सबके लिए बुरा है। लेकिन आराम से रहने और VC फंडिंग को अपनी सैलरी हाइक या लग्जरी लाइफस्टाइल का जरिया मानने में बहुत बड़ा फर्क है। उन्होंने नए एंटरप्रेन्योर्स को चेतावनी देते हुए कहा कि फंडिंग को व्यक्तिगत खर्चों के लिए इस्तेमाल करने से कंपनी की ग्रोथ रुक सकती है और इन्वेस्टर्स का विश्वास टूट सकता है।

लॉन्ग-टर्म वैल्यू पर जोर

पोस्ट के अंत में झावेरी ने फाउंडर्स को मुख्य संदेश दिया कि इक्विटी में बढ़त असली है। एग्जिट पे-डे असली है, लेकिन तभी जब कंपनी पहले असल में जीत जाए। अगर आपको अभी मोटी सैलरी चाहिए तो कॉर्पोरेट जॉब उसके लिए सही जगह है। स्टार्टअप इक्विटी में पेमेंट करते हैं और यह डील पहले दिन से ही तय होती है।

Devendra Kasyap

लेखक के बारे में

Devendra Kasyap

देवेन्द्र कश्यप पिछले 13 वर्षों से पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय हैं। अगस्त 2025 से वह लाइव हिन्दुस्तान (हिन्दुस्तान टाइम्स ग्रुप) में चीफ कंटेंट प्रोड्यूसर के पद पर कार्यरत हैं। संस्थान की होम टीम का वह एक अहम हिस्सा हैं। राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय घटनाक्रमों पर उनकी पैनी नजर रहती है। वायरल कंटेंट के साथ-साथ लीक से हटकर और प्रभावशाली खबरों में उनकी विशेष रुचि है।

देवेन्द्र ने अपने पत्रकारिता करियर की शुरुआत वर्ष 2013 में महुआ न्यूज से की। करियर के शुरुआती दौर में उन्होंने बिहार की राजधानी पटना में रिपोर्टिंग की। इस दौरान राजनीति के साथ-साथ क्राइम और शिक्षा बीट पर भी काम किया। इसके बाद उन्होंने जी न्यूज (बिहार-झारखंड) में अपनी सेवाएं दीं। वर्ष 2015 में ईनाडु इंडिया के साथ डिजिटल मीडिया में कदम रखा। इसके बाद राजस्थान पत्रिका, ईटीवी भारत और नवभारत टाइम्स ऑनलाइन जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों में कार्य किया।

मूल रूप से बिहार के भोजपुरी बेल्ट रोहतास जिले के रहने वाले देवेन्द्र कश्यप ने अपनी प्रारंभिक और उच्च शिक्षा पटना से प्राप्त की। उन्होंने पटना विश्वविद्यालय से राजनीति विज्ञान में स्नातक की डिग्री हासिल की और MCU भोपाल से पत्रकारिता में डिप्लोमा किया। वर्तमान में वह उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में प्रवास कर रहे हैं।

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