कॉर्पोरेट की नौकरी छोड़ बन गया डिलीवरी एजेंट, सैलरी को लेकर इंटरनेट पर छिड़ी बहस
एक 22 साल ये युवक ने एक कंपनी में ऐडमिन स्टाफ की नौकरी छोड़कर डिलीवरी एजेंट बनना पसंद किया। बॉस के समझाने पर भी वह नहीं माना। इसको लेकर सोशल मीडिया पर भी बहस चल रही है कि आखिर उसे इतनी कम सैलरी क्यों दी जा रही थी।

डिलीवरी एजेंट का काम करने के लिए एक शख्स ने अपनी कॉर्पोरेट की नौकरी छोड़ दी। सोशल मीडिया पर जब यह मामला सामने आया तो नौकरी को लेकर बहस छिड़ गई। सीको वेल्थ के फाउंडर अक्षत जैन ने सोशल मीडिया पर बताया कि उनकी ऐडमिनिस्ट्रेशन टीम में काम करने वाले 22 साल के युवक ने डिलीवरी एजेंट का काम करने के लिए नौकरी से इस्तीफा दे दिया।
जैन ने बताया कि उनकी कंपनी के कर्मचारी के तौर पर युवक को किताबें उपलब्ध करवाती थी और भविष्य में एआई टूल्स के लिए भी तैयार कर रही थी। इसके अलावा तीन से पांच साल में वह अच्छा प्रमोशन ले सकता था। इसके बाद भी उसने डिलीवरी एजेंट बनना स्वीकार किया और इस्तीफा दे दिया।
जैन ने बताया कि युवक को लगता है कि वह महीने के 35 से 40 हजार रुपये कमाएगा जो कि उसकी मौजूदा सैलरी से ज्यादा है। उन्होंने उसे बार-बार समझाने की कोशिश की लेकिन उसने नौकरी छोड़ दी। फाउंडर ने कहा कि हो सकता है कि डिलीवरी का काम करके वह कुछ दिनों तक अच्छा कमाए लेकिन लंबे समय के लिए यह फायदेमंद नहीं होगा। इसके अलावा ज्यादा काम करने से वह बीमार भी हो सकता है।
सोशल मीडिया पर अक्षत जैन की पोस्ट सामने आने के बाद लोग तरह-तरह के कॉमेंट करने लगे। एक यूजर ने कहा, यह तो अच्छा तरीका है कि आप कह रहे हैं कि हम कर्मचारी को निखार रहे हैं जबकि उसको अच्छा वेतन नहीं मिल रहा है। अगर उसने 35 हजार के लिए नौकरी छोड़ी है तो अंदाजा लगाया जा सकता है कि उसका वेतन कितना रहो होगा। खाना और कपड़ा एआई और किताबों से ज्यादा जरूरी है।
एक अन्य यूजर ने कहा कि Lmao के ऐडमिन स्टाफ से अच्छा जीवन डिलीवरी वालों का है। एक अन्य यूजर ने कहा, आपको पता है कि वह प्रतिभाशाली है इसके बाद भी 15 से 20 हजार से ज्यादा नहीं दे रहे होगे। हालांकि यह उसकी गलती हो सकती है कि वह किसी और कंपनी में ना जाकर डिलीवरी एजेंट का काम करने जा रहा है।
लेखक के बारे में
Ankit Ojhaविद्यालयी जीवन से ही कलात्मक अभिव्यक्ति, विचारशील स्वभाव और मिलनसार व्यक्तित्व और सामान्य के अंदर डुबकी लगाकर कुछ खास खोज लाने का कौशल पत्रकारिता के लिए अनुकूल साबित हुआ। अंकित ओझा एक दशक से डिजिटल पत्रकारिता के क्षेत्र में लगातार सक्रिय हैं। उत्तर प्रदेश के बाराबंकी के रहने वाले अंकित ओझा समाचारों की दुनिया में तथ्यों के महत्व के साथ ही संवेदनशीलता के पक्ष को साधने में निपुण हैं। पिछले चार साल से हिन्दुस्तान टाइम्स ग्रुप के 'लाइव हिन्दुस्तान' के लिए चीफ कॉन्टेंट प्रड्यूसर पद पर कार्य कर रहे हैं। इससे पहले 'टाइम्स ऑफ इंडिया' और 'इंडियन एक्सप्रेस' ग्रुप के साथ भी कार्य कर चुके हैं।
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अकादमिक योग्यताः अंकित ओझा ने प्रारंभिक शिक्षा नवोदय विद्यालय से पूरी करने के बाद जामिया मिल्ल्लिया इस्लामिया से पत्रकारिता में ही ग्रैजुएशन किया है। इसके बाद भारतीय जनसंचार संस्थान (IIMC) से पोस्ट ग्रैजुएट डिप्लोमा और कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय से मास कम्युनिकेशन में एमए किया है। जामिया में अध्ययन के दौरान ही इटैलियन और उर्दू भाषा में भी कोर्स किए हैं। इसके अलावा पंजाबी भाषा की भी अच्छी समझ रखते हैं। विश्वविद्यालय में NCC का 'C सर्टिफिकेट' भी प्राप्त किया है। IIMC और ऑक्सफर्ड से स्वास्थ्य पत्रकारिता का सर्टिफिकेट भी प्राप्त किया है।
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