सूअर के वीर्य से बने आईड्रॉप से कैंसर का इलाज, चूहों पर किया गया प्रयोग सफल होने का दावा

Ankit Ojha लाइव हिन्दुस्तान
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एक शोध रिपोर्ट के मुताबिक सूअर के वीर्य का इस्तेमाल कर ऐसा आई ड्रॉप बनाया गया है जिसका इस्तेमाल आंख के कैंसर के इलाज में किया जा सकता है। चूहों पर इसका सफल प्रयोग किया गया है। 

सूअर के वीर्य से बने आईड्रॉप से कैंसर का इलाज, चूहों पर किया गया प्रयोग सफल होने का दावा

कैंसर आज भी ऐसी बीमारियों में से एक है जिसके इलाज की पूरी गारंटी नहीं दी जा सकती है। आंखों के कैंसर का इलाज और भी कठिन माना जाता है। यह कैंसर आंखों के आसपास की कोशिकाओं में शुरू होता है। इस दिशा में वैज्ञानिकों को बड़ी सफलता हाथ लगी है। साइंस एडवांसेज में छपी एक रिसर्च के मुताबिक शोधकर्ताओं ने सूअर के वीर्य से एक आईड्रॉप बनाया है। यह दवा ट्यूमर के ग्रोथ को रोक सकती है। इससे आंखों की रोशनी भी बचाई जा सकती है। अब तक इसका प्रयोग चूहों पर किया गया है।

बच्चों की आंख के इलाज में भी हो सकता है इस्तेमाल

शोध रिपोर्ट में दावा किया गया है कि बच्चों में रेटिनोब्लास्टोमा के इलाज के लिए भी इस दवा का इस्तेमाल किया जा सकता है। आम तौर पर आंखों के कैंसर का इलाज दवाइयों के इंजेक्शन, कीमोथेरपी या फिर लेजर थेरेपी के जरिए किया जाता है। वहीं इस रिपोर्ट में बताया गया है कि सूअर के वीर्य से बनी दवाई रेटिना के पिछले हिस्से तक पहुंच जाती है। इसका साइडइफेक्ट भी नहीं होता है।

कैंसर के इलाज के साइडइफेक्ट

जानकारों का कहना है कि आंखों के कैंसर का इलाज करने में अगर लेजर या फिर कीमो थेरपी का इस्तेमाल कियाजाता है तो आंख के अन्य हिस्सों को नुकसान पहुंचता है और रोशनी जाने का खतरा बना रहता है। चीन के एक विश्वविद्यालय ने कहा है कि वह इस दिशा में प्रयास कर रहा है कि ऐसी दवा बनाई जाए जो कि रेटिना तक पहुंच भी जाए और किसी अन्य हिस्से को नुकसान भी ना पहुंचाए।

चूहों में सफल हो गया इलाज

रिपोर्ट में दावा किया या है कि इस आई ड्रॉप में एक्जोसोम होते हैं जो कि कैंसर को खत्म करने वाले कणों को अपने साथ अंदर तक ले जाते हैं। चूहों पर किए गए प्रयोग से पता चला है कि यह ड्रॉप ट्यूमर को बढ़ने से रोकता है। इस तकनीक से दवा को संबंधित अंग तक पहुंचाने में मदद मिलती है। इससे अलजाइमर का भी इलाज किया जा सकता है। यह एक दिमाग से संबंधित बीमारी है जो कि याददाश्त और सोचने-समझने की शक्ति को बुरी तरह प्रभावित करती है।

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लेखक के बारे में

Ankit Ojha

विद्यालयी जीवन से ही कलात्मक अभिव्यक्ति, विचारशील स्वभाव और मिलनसार व्यक्तित्व और सामान्य के अंदर डुबकी लगाकर कुछ खास खोज लाने का कौशल पत्रकारिता के लिए अनुकूल साबित हुआ। अंकित ओझा एक दशक से डिजिटल पत्रकारिता के क्षेत्र में लगातार सक्रिय हैं। उत्तर प्रदेश के बाराबंकी के रहने वाले अंकित ओझा समाचारों की दुनिया में तथ्यों के महत्व के साथ ही संवेदनशीलता के पक्ष को साधने में निपुण हैं। पिछले चार साल से हिन्दुस्तान टाइम्स ग्रुप के 'लाइव हिन्दुस्तान' के लिए चीफ कॉन्टेंट प्रड्यूसर पद पर कार्य कर रहे हैं। इससे पहले 'टाइम्स ऑफ इंडिया' और 'इंडियन एक्सप्रेस' ग्रुप के साथ भी कार्य कर चुके हैं।


राष्ट्रीय, अंतरराष्ट्रीय, राज्य और सामाजिक सरोकारों की खबरों के संपादन में लंबा अनुभव होने के साथ ही अपने-आसपास की घटनाओं में समाचार तत्व निकालने की अच्छी समझ है। घटनाओं और समाचारों से संबंधित फैसले लेने और त्वरित समाचार प्रकाशित करने में विशेष योग्यता है। इसके अलावा तकनीक और पाठकों की बदलती आदतों के मुताबिक सामग्री को रूप देने के लिए निरंतर सीखने में विश्वास करते हैं। अंकित ओझा की रुचि राजनीति के साथ ही दर्शन, कविता और संगीत में भी है। लेखन और स्वरों के माध्यम से लंबे समय तक आकाशवाणी से भी जुड़े रहे। इसके अलावा ऑडियन्स से जुड़ने की कला की वजह से मंचीय प्रस्तुतियां भी सराही जाती हैं।


अकादमिक योग्यताः अंकित ओझा ने प्रारंभिक शिक्षा नवोदय विद्यालय से पूरी करने के बाद जामिया मिल्ल्लिया इस्लामिया से पत्रकारिता में ही ग्रैजुएशन किया है। इसके बाद भारतीय जनसंचार संस्थान (IIMC) से पोस्ट ग्रैजुएट डिप्लोमा और कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय से मास कम्युनिकेशन में एमए किया है। जामिया में अध्ययन के दौरान ही इटैलियन और उर्दू भाषा में भी कोर्स किए हैं। इसके अलावा पंजाबी भाषा की भी अच्छी समझ रखते हैं। विश्वविद्यालय में NCC का 'C सर्टिफिकेट' भी प्राप्त किया है। IIMC और ऑक्सफर्ड से स्वास्थ्य पत्रकारिता का सर्टिफिकेट भी प्राप्त किया है।

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