दो बार नौकरी से निकाला गया यह शख्स, फिर किया ऐसा काम कि अब कमा रहा 1.3 करोड़ रुपये महीना

Amit Kumar लाइव हिन्दुस्तान, न्यूयॉर्क
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जानिए कैसे 2 बार नौकरी से निकाले जाने के बाद जीशान बखरानी ने मैनहट्टन में अपना रेस्टोरेंट 'निशान' खोला और आज वे अपने फ्यूजन फूड से हर महीने 1.3 करोड़ रुपये की शानदार कमाई कर रहे हैं। पढ़ें यह प्रेरणादायक सफलता की कहानी।

दो बार नौकरी से निकाला गया यह शख्स, फिर किया ऐसा काम कि अब कमा रहा 1.3 करोड़ रुपये महीना

कॉर्पोरेट जॉब की अनिश्चितता ने एक बार फिर साबित कर दिया कि जुनून और मेहनत से सपने हकीकत बन सकते हैं। पाकिस्तानी-अमेरिकी मूल के 34 वर्षीय जीशान बखरानी न्यूयॉर्क में प्रोडक्ट मैनेजर के रूप में करीब एक दशक तक काम कर चुके थे। लेकिन दो बार लेऑफ होने के बाद उन्होंने कॉर्पोरेट की दुनिया को अलविदा कह दिया और अब अपने रेस्टोरेंट से हर महीने 1.3 करोड़ रुपये की कमाई कर रहे हैं। उन्होंने अपनी नौकरी जाने की निराशा को एक शानदार अवसर में बदल दिया है। आइए उनकी इस अनोखी कहानी को जानते हैं।

कौन हैं जीशान बखरानी और क्या है उनकी कहानी?

सीएनबीसी की एक रिपोर्ट के अनुसार, पाकिस्तानी-अमेरिकी उद्यमी जीशान बखरानी ने कॉर्पोरेट सेक्टर में लगभग 10 साल तक काम किया। जब उन्हें प्रोडक्ट मैनेजर की नौकरी से दो बार निकाल दिया गया, तो उन्होंने हार मानने के बजाय कुकिंग की दुनिया में कदम रखने का फैसला किया। अगस्त 2025 में, जीशान ने अपनी बचत के 70,000 डॉलर (करीब 58 लाख रुपये) लगाकर मैनहट्टन में 'निशान' नाम से अपना रेस्टोरेंट खोला। इसमें उन्होंने दुकान के किराये, उपकरणों और सजावट का खर्च उठाया।

बचपन और खाना पकाने की प्रेरणा

जीशान शिकागो के डेवोन इलाके में पले-बढ़े हैं, जहां हर तरह के लोग रहते हैं। बचपन से ही उन्होंने भारतीय, पाकिस्तानी, मैक्सिकन और पूर्वी यूरोपीय जैसे कई तरह के खाने का स्वाद चखा था। जीशान बताते हैं कि उनकी मां खाना पकाने में बहुत प्रयोग करती थीं। उनके लिए खाना पकाने का कोई तय नियम नहीं था। जब जीशान टीनेजर थे, तब वे टीवी पर कुकिंग शो देखकर वही डिश बनाने की कोशिश करते थे, लेकिन उसमें अपना देसी तड़का (जैसे- जीरा, धनिया और लाल मिर्च पाउडर) जरूर मिलाते थे।

'निशान' का खास मेन्यू

जीशान का मानना है कि वह पाकिस्तानी भी हैं और अमेरिकी भी, इसलिए उन्होंने दोनों संस्कृतियों को अपने खाने में मिला दिया है। उनके रेस्टोरेंट में दोनों देशों के स्वाद का एक बेहतरीन फ्यूजन देखने को मिलता है।

कुछ प्रमुख डिशेज:

  • पाकिस्तानी चॉप्ड चीज सैंडविच
  • बिहारी-स्टाइल बारबाकोआ टैकोस
  • बफेलो तंदूरी चिकन सैंडविच
  • मैंगो फिज रिफ्रेशर्स (ड्रिंक)
  • चॉकलेट पराठा फनल केक (डेजर्ट)

सफलता का सफर और सबसे बड़ा टर्निंग पॉइंट

यह सब रातों-रात नहीं हुआ। जीशान ने फुल-टाइम नौकरी करते हुए ही अपने इस सपने पर काम करना शुरू कर दिया था।

पहला लेऑफ (2023): जब 2023 में उनकी पहली नौकरी गई, तो उन्होंने अपनी बचत के पैसों से डलास और शिकागो जैसे शहरों में खाने के छोटे स्टॉल (फूड पॉप-अप) लगाए। बाद में उन्हें दूसरी नौकरी मिल गई, लेकिन उन्होंने खाना पकाने का अपना साइड-बिजनेस जारी रखा।

टर्निंग पॉइंट: उनका आत्मविश्वास तब और बढ़ गया जब उन्होंने फूड नेटवर्क के मशहूर शो 'द ग्रेट फूड ट्रक रेस' के सीजन 18 में हिस्सा लिया। तजुर्बा न होने के बावजूद उनकी टीम ने यह शो जीता और 50,000 डॉलर के इनाम का एक हिस्सा हासिल किया। इसी जीत ने उन्हें अपना खुद का रेस्टोरेंट खोलने की हिम्मत दी।

1.3 करोड़ की कमाई और आगे का रास्ता

जीशान बताते हैं कि उनका रेस्टोरेंट अब मुनाफे में चल रहा है, लेकिन वे अभी रेस्टोरेंट की कमाई से खुद को सैलरी नहीं दे रहे हैं। वे अपना गुजारा पुरानी बचत और कंपनी से निकाले जाने पर मिले पैसों से कर रहे हैं।

नवंबर की सफलता और दूसरा लेऑफ: नवंबर का महीना उनके बिजनेस के लिए बहुत शानदार रहा, जब उनके रेस्टोरेंट ने करीब 1,40,000 डॉलर (1.3 करोड़ रुपये) की कमाई की। दिलचस्प बात यह है कि इसी दौरान उन्हें उनकी दूसरी कॉर्पोरेट नौकरी से भी निकाल दिया गया।

जीशान ने इस दूसरे लेऑफ को दुख के बजाय एक अच्छे संकेत के रूप में लिया। उन्होंने कहा- यह एक संकेत है कि मैं अब कॉर्पोरेट दुनिया के लिए नहीं बना हूं। जीशान अब 'निशान' के मेन्यू को और बढ़ाना चाहते हैं। उनकी योजना शिकागो सहित कई अन्य जगहों पर अपने रेस्टोरेंट की और भी ब्रांच खोलने की है ताकि वे अपने स्वाद को अमेरिका में और ज्यादा मशहूर कर सकें।

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लेखक के बारे में

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डिजिटल पत्रकारिता की बदलती लहरों के बीच समाचारों की तह तक जाने की ललक अमित कुमार को इस क्षेत्र में खींच लाई। समकालीन राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय राजनीति पर पैनी नजर रखने के साथ-साथ अमित को जटिल विषयों के गूढ़ विश्लेषण में गहरी रुचि है। उत्तर प्रदेश के बरेली जिले के रहने वाले अमित को मीडिया जगत में एक दशक का अनुभव है। वे पिछले 4 वर्षों से लाइव हिन्दुस्तान में अपनी सेवाएं दे रहे हैं।


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अमित ने देश के प्रतिष्ठित भारतीय जनसंचार संस्थान (IIMC), दिल्ली से हिंदी पत्रकारिता में पीजी डिप्लोमा और गुरु जम्भेश्वर विश्वविद्यालय से जनसंचार में मास्टर डिग्री हासिल की है। उन्होंने यूनिसेफ और ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों से हेल्थ जर्नलिज्म का सर्टिफिकेशन भी प्राप्त किया है। एआई-असिस्टेड कंटेंट ऑप्टिमाइजेशन और एडिटोरियल प्लानिंग में उनकी विशेषज्ञता उन्हें आज के आधुनिक न्यूज रूम के लिए एक अनिवार्य स्तंभ बनाती है। पेशेवर जीवन से इतर, अमित एक जुनूनी घुमक्कड़ हैं जिन्हें हार्डकोर ट्रेकिंग और फोटोग्राफी का शौक है, साथ ही वे ऐतिहासिक और वास्तविक जीवन पर आधारित सिनेमा देखने के भी शौकीन हैं।

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