कबाड़ में पड़ा था 105 साल पुराना जर्मन ट्रैक्टर, 1.25 करोड़ रुपये में बिका; इंटरनेट पर वायरल

Feb 23, 2026 08:03 am ISTAnkit Ojha लाइव हिन्दुस्तान
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जालंधर की एक बाजार में दशकों से एक ट्रैक्टर कबाड़ में पड़ा हुआ था। यह इंटरनेट पर वायरल हुआ तो लोग कीमत लगाने लगे। अमेरिका के एक खरीदार ने इसे 1.25 करोड़ रुपये में खरीद लिया है। 

कबाड़ में पड़ा था 105 साल पुराना जर्मन ट्रैक्टर, 1.25 करोड़ रुपये में बिका; इंटरनेट पर वायरल

कई बार कबाड़ में भी ऐसी कीमती चीज मिल जाती है जिसकी कीमत लाखों में होती है। जालंधर में दशकों से कबाड़ में पड़े एक ट्रैक्टर दुनियाभर में फेमस हो गया है। 105 साल पुराने इस जर्मन ट्रैक्टर को अमेरिका के एक खरीदार ने 1.25 करोड़ रुपये में खरीद लिया है। जानकारी के मुताबिक जालंधर के बाजार में यह दशकों में कबाड़ की तरह पड़ा हुआ था। बताा जाता है कि यह 1921 में बना लैंड बुल्डॉग एचएल 12 जर्मन ट्रैक्टर है।

लैंज बुल्डॉग कंपनी जर्मनी में कृषि उपकरण बनाने के लिए जानी जाती है। बताया जाता है कि इस कंपनी के संस्थापक हेनरिक लैंज एजी ने इस ट्रैक्टर को बनाया था। 1921 से 1950 तक बुल्डॉग सीरीज के ट्रैक्टर बनते रहे। ये ट्रैक्टर काफी महंगे होते थे और पूरी दुनिया में इनकी सप्लाई थी।

जालंधर में हीद भगत सिंह चौक के पास यह ट्रैक्टर दशकों से पड़ा हुआ था। पूरे ट्रैक्टर में जंग लग गई थी। हालांकि ट्रैक्टर के साइड पैनल और पीछे की ओर 'हेनरिक लैंज मैनहीम' लिखा हुआ था। ट्रैक्टर के मालिक के पड़ोसी पार्षद पुनीत वाधेरा ने बताया कि अब लोग दूर-दूर से इस ट्रैक्टर को देखने आ रहे हैं। इस ट्रैक्टर को अमेरिकी खरीदार के हाथों बेच दिया गया है।

वाधेरा ने कहा, इस ट्रैक्टर के मालिक लगभग 40 साल पहले ही अमेरिका में शिफ्ट हो गए हैं। हमने इसे ऐसे ही पड़ा देखा है। हम जब बच्चे थे तो ट्रैक्टर पर चढ़कर खेला करते थे। दो महीने पहले एक यूट्यूबर ने इसका वीडियो बनाया था। इसके बाद इसको लेकर फोन आने लगे। हमें पता चला कि अंग्रेजों ने इस ट्रैक्टर को मंगवाया था। इस ट्रैक्टर के मालिक भी अब कहां हैं, कुच पता नहीं है।

वाधेरा ने कहा, मुंबई में रहने वाले मेरे एक दोस्त ने इसकी कीमत दो लाख लगाई थी। अगल ही रात तक इसके दाम 28 लाख तक लग गए। वहीं 17 फरवरी को अमेरिका के एक शख्स ने कहा ट्रैक्टर की कीमत 1.25 करोड़ लगा दी। फिर इसे बेच दिया गया. 18 फरवरी को इसे क्रेन से उठाया गया और मुंबई पोर्ट पहुंचा दिया गया। यह कैलिफोर्निया भेजा जाएगा। कैलिफोर्निया के एग्रीकल्चर म्यूजियम में इस ट्रैक्टर को जगह दी जाएगी। वाधेरा ने कहा कि अभी ठीक से पता नहीं है कि इस ट्रैक्टर का खरीदार कौन है।

बता दें कि ऐतिहासिक पहचान, इंजीनियरिंग और लंबे समय तक चलने के लिए विंटेज हेनरिक लैंज ट्रैक्टर पूरी दुनिया में मशहूर हैं। जर्मनी में औद्योगिकीकरण की शुरुआत में ही इस तरह के ट्रैक्टर बनने शुरू हो गए थे। कहा जाता है कि यह ट्रैक्टर ही पहली ऐसी मशीन थी जिसमें कच्चे तेल का इस्तेमाल किया जाताथा। इसे किसी भी ईंधन से चलाया जा सकता था। वनस्पति तेल से लेकर वेस्ट तेल तक का इस्तेमाल इसमें हो जाता था। इसका आगे का हिस्सा बुल्डॉग से मिलता-जुलता था और इसीलिए इसके नाम में बुल्डॉग भी जोड़ा गया था।

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लेखक के बारे में

Ankit Ojha

विद्यालयी जीवन से ही कलात्मक अभिव्यक्ति, विचारशील स्वभाव और मिलनसार व्यक्तित्व और सामान्य के अंदर डुबकी लगाकर कुछ खास खोज लाने का कौशल पत्रकारिता के लिए अनुकूल साबित हुआ। अंकित ओझा एक दशक से डिजिटल पत्रकारिता के क्षेत्र में लगातार सक्रिय हैं। उत्तर प्रदेश के बाराबंकी के रहने वाले अंकित ओझा समाचारों की दुनिया में तथ्यों के महत्व के साथ ही संवेदनशीलता के पक्ष को साधने में निपुण हैं। पिछले चार साल से हिन्दुस्तान टाइम्स ग्रुप के 'लाइव हिन्दुस्तान' के लिए चीफ कॉन्टेंट प्रड्यूसर पद पर कार्य कर रहे हैं। इससे पहले 'टाइम्स ऑफ इंडिया' और 'इंडियन एक्सप्रेस' ग्रुप के साथ भी कार्य कर चुके हैं।


राष्ट्रीय, अंतरराष्ट्रीय, राज्य और सामाजिक सरोकारों की खबरों के संपादन में लंबा अनुभव होने के साथ ही अपने-आसपास की घटनाओं में समाचार तत्व निकालने की अच्छी समझ है। घटनाओं और समाचारों से संबंधित फैसले लेने और त्वरित समाचार प्रकाशित करने में विशेष योग्यता है। इसके अलावा तकनीक और पाठकों की बदलती आदतों के मुताबिक सामग्री को रूप देने के लिए निरंतर सीखने में विश्वास करते हैं। अंकित ओझा की रुचि राजनीति के साथ ही दर्शन, कविता और संगीत में भी है। लेखन और स्वरों के माध्यम से लंबे समय तक आकाशवाणी से भी जुड़े रहे। इसके अलावा ऑडियन्स से जुड़ने की कला की वजह से मंचीय प्रस्तुतियां भी सराही जाती हैं।


अकादमिक योग्यताः अंकित ओझा ने प्रारंभिक शिक्षा नवोदय विद्यालय से पूरी करने के बाद जामिया मिल्ल्लिया इस्लामिया से पत्रकारिता में ही ग्रैजुएशन किया है। इसके बाद भारतीय जनसंचार संस्थान (IIMC) से पोस्ट ग्रैजुएट डिप्लोमा और कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय से मास कम्युनिकेशन में एमए किया है। जामिया में अध्ययन के दौरान ही इटैलियन और उर्दू भाषा में भी कोर्स किए हैं। इसके अलावा पंजाबी भाषा की भी अच्छी समझ रखते हैं। विश्वविद्यालय में NCC का 'C सर्टिफिकेट' भी प्राप्त किया है। IIMC और ऑक्सफर्ड से स्वास्थ्य पत्रकारिता का सर्टिफिकेट भी प्राप्त किया है।

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