एक शख्स का आरोप है कि सालों इश्योरेंस का प्रिमियम भरा और जब उन्हें जरूरत पड़ी कंपनी ने हाथ खड़े कर दिए क्लेम रिजेक्ट कर दिया… नौबत यह आ गई कि अस्पताल वाले छुट्टी देने को राजी नहीं थे… आखिरकार उन्हें 5 रु सैकड़ा ब्याज पर पैसा लेना पड़ा तब जाकर अस्पताल से घर लौट सके