काले मोटे धुएं ने पूरी बिल्डिंग को अपनी चपेट में ले लिया था..हर तरफ से सांस आना बंद हो रही थी..वो गनीमत रही कि बिल्डिंग में रह रहे कुछ भारतीय मजदूर सुबह नमाज़ के लिए उठे थे..जिन्होने हमें जगाया..वरना हम भी दूसरों की तरह सोते के सोते ही रह जाते..ये कहना है चिन्नपन विश्वनाथ का जो कुवैत के उस हादसे के गवाह हैं जिसमें 49 मजदूरों की जान चली गई...इनमें से 42 मजदूर इंडियन थे..कुवैत में हुई इस वारदात ने गल्फ कंट्री में काम कर रहे हिन्दुस्तानी लोगों को हिफाज़त...उनके रहन सहन और वहां के लोगों के रवैये को लेकर सवाल खड़े कर दिए...