अमेरिका ने नई दिल्ली की मांग को अंतत: स्वीकार कर लिया है। अब उसकी अफ-पाक नीति पाक-अफ नीति में तब्दील हो गई है। भारत का शुरू से ही मानना था कि समस्या की जड़ पाकिस्तान में है, लिहाजा अमेरिका को पाकिस्तान पर ज्यादा ध्यान देना चाहिए।हाल में पश्चिमी पाकिस्तान में तालिबान के ताजा हमलों ने ओबामा प्रशासन को पाकिस्तान पर नजरं टिकाने के लिए मजबूर कर दिया है। अमेरिका के एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा है, ‘अब हम यह नहीं देख रहे हैं कि पाकिस्तान किस तरह अफगानिस्तान की मदद कर सकता है।इसकी बजाय हमारा ध्यान इस बात पर है कि हम किस तरह पाकिस्तान को इस संकट से उबारने में मददगार हो सकते हैं।’ आजकल राष्ट्रपति बराक ओबामा और उनके शीर्ष सलाहकार पाकिस्तान के हालात पर चर्चा के लिए रो बैठकें कर रहे हैं। हालांकि इस बीच ओबामा प्रशासन के भीतर पाकिस्तान के सैन्य और असैन्य अधिकारियों के प्रति संदेह भी गहराता नजर आ रहा है।गरुवार को अमेरिका की विदेश मंत्री हिलेरी क्िलंटन और रक्षा सचिव राबर्ट गेट्स ने अमेरिकी कांग्रेस में कहा कि पाकिस्तान को जब तक अमेरिकी सैन्य सहायता नहीं दी जाती तब तक उसके पास आतंकवादियों के खिलाफ लड़ाई में धन की कमी बनी रहेगी। पिछले दिनों अमेरिकी कांग्रेस ने पाक को आर्थिक मदद देने के साथ ही कई शर्ते जोड़ दी थीं।ं