काम की बात: उत्तराखंड में विधवा और दिव्यांग पेंशन 1875 रुपए हुई, इनकम लिमिट भी 6000 रुपए किया जाएगा

Apr 17, 2026 08:10 pm ISTSubodh Kumar Mishra लाइव हिन्दुस्तान, देहरादून
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उत्तराखंड सरकार समाज कल्याण महकमे की विभिन्न योजनाओं में आय सीमा के साथ पेंशन की राशि में बढ़ोतरी करने जा रही है। मंत्री ने बताया कि विधवा और दिव्यांग पेंशन 1500 रुपये से बढ़ाकर 1875 रुपये कर दी गई है। बौना पेंशन और तीलू रौतेली पेंशन को 1200 रुपये से बढ़ाकर 1500 रुपये करने का प्रस्ताव है।

उत्तराखंड में विधवा और दिव्यांग पेंशन 1875 रुपए हुई, इनकम लिमिट भी 6000 रुपए किया जाएगा

उत्तराखंड सरकार समाज कल्याण महकमे की विभिन्न योजनाओं में आय सीमा के साथ पेंशन की राशि में बढ़ोतरी करने जा रही है। समाज कल्याण मंत्री खजान दास ने गुरुवार को विधानसभा सभागार में हुई समीक्षा बैठक में अफसरों को इस बाबत प्रस्ताव तैयार करने के निर्देश दिए।

मंत्री ने बताया कि विधवा और दिव्यांग पेंशन 1500 रुपये से बढ़ाकर 1875 रुपये कर दी गई है। बौना पेंशन और तीलू रौतेली पेंशन को 1200 रुपये से बढ़ाकर 1500 रुपये करने का प्रस्ताव है। इसके अलावा दिव्यांग भरण-पोषण अनुदान 700 रुपये से बढ़ाकर 1000 रुपये किया जाएगा।

पेंशन योजनाओं के लिए पात्रता से जुड़ी आय सीमा भी 4000 रुपये से बढ़ाकर 6000 तक करने की तैयारी है। मसूरी में बालिका इंटर कॉलेज के छात्रावास का पुनर्निर्माण तीन महीने में पूरा कर सितंबर से संचालन का लक्ष्य भी तय किया गया। इस दाैरान सचिव श्रीधर बाबू, अपर सचिव प्रकाश चंद्र, निदेशक संदीप तिवारी और निदेशक-जनजातीय कल्याण संजय टोलिया समेत कई अफसर मौजूद रहे।

एससी-एसटी बहुल क्षेत्र के लिए ठोस कार्ययोजना

मंत्री ने स्पष्ट किया कि अटल वयो अभ्युदय योजना के तहत निर्धन बुजुर्गों को निशुल्क सहायक उपकरण उपलब्ध कराना धामी सरकार की प्राथमिकताओं में शामिल है। साथ ही, एससी-एसटी बहुल क्षेत्रों के विकास के लिए जिलेवार विशेष कार्ययोजना बनाई जाएगी।

अंतरजातीय विवाह की समयसीमा में बदलाव

अंतरजातीय विवाह योजना में सहायता राशि की समय सीमा में भी संशोधन किया जा रहा है। अब सामान्य वर्ग की विधवा और एससी-एसटी परिवारों को यह सहायता वित्तीय वर्ष की बाध्यता की बजाय विवाह की तिथि से एक साल के भीतर प्रदान की जा सकेगी।

शिक्षा और बुनियादी ढांचे पर भी फोकस करेंगे

इस अवसर पर मंत्री खजान दास ने अफसरों को छात्रवृत्ति योजनाओं के सत्यापन में पारदर्शिता सुनिश्चित करने के निर्देश भी दिए। पूरे उत्तराखंड में सरकारी आश्रम पद्धति विद्यालय और औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थानों में नए ट्रेड शुरू करने के साथ ही अनुभवी प्रशिक्षकों की नियुक्ति पर भी विशेष जोर दिया गया।

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सुबोध कुमार मिश्रा पिछले 19 साल से हिंदी पत्रकारिता में योगदान दे रहे हैं। वर्तमान में वह 'लाइव हिन्दुस्तान' में स्टेट डेस्क पर बतौर चीफ कंटेंट प्रोड्यूसर अपनी सेवाएं दे रहे हैं। दूरदर्शन के 'डीडी न्यूज' से इंटर्नशिप करने वाले सुबोध ने पत्रकारिता की विधिवत शुरुआत 2007 में दैनिक जागरण अखबार से की। दैनिक जागरण के जम्मू एडीशन में बतौर ट्रेनी प्रवेश किया और सब एडिटर तक का पांच साल का सफर पूरा किया। इस दौरान जम्मू-कश्मीर को बहुत ही करीब से देखने और समझने का मौका मिला। दैनिक जागरण से आगे के सफर में कई अखबारों में काम किया। इनमें दिल्ली-एनसीआर से प्रकाशित होने वाली नेशनल दुनिया, नवोदय टाइम्स (पंजाब केसरी ग्रुप), अमर उजाला और हिन्दुस्तान जैसे हिंदी अखबार शामिल हैं। अखबारों के इस लंबे सफर में खबरों को पेश करने के तरीकों से पड़ने वाले प्रभावों को काफी बारीकी से समझने का मौका मिला।

ज्यादातर नेशनल और स्टेट डेस्क पर काम करने का अवसर मिलने के कारण राजनीतिक और सामाजिक विषयों से जुड़ी खबरों में दिलचस्पी बढ़ती गई। कई लोकसभा और विधानसभा चुनावों की खबरों की पैकेजिंग टीम का हिस्सा रहने के कारण भारतीय राजनीति के गुणा-भाग को समझने का मौका मिला।

शैक्षणिक योग्यता की बात करें तो सुबोध ने बीएससी (ऑनर्स) तक की अकादमिक शिक्षा हासिल की है। साइंस स्ट्रीम से पढ़ने के कारण उनके पास चीजों को मिथ्यों से परे वैज्ञानिक तरीके से देखने की समझ है। समाज से जुड़ी खबरों को वैज्ञानिक कसौटियों पर जांचने-परखने की क्षमता है। उन्होंने मास कम्यूनिकेशन में पोस्ट ग्रेजुएट डिप्लोमा किया है। इससे उन्हें खबरों के महत्व, खबरों के एथिक्स, खबरों की विश्वसनीयता और पठनीयता आदि को और करीब से सीखने और लिखने की कला में निखार आया। सुबोध का मानना है कि खबरें हमेशा प्रमाणिकता की कसौटी पर कसा होना चाहिए। सुनी सुनाई और कल्पना पर आधारित खबरें काफी घातक साबित हो सकती हैं, इसलिए खबरें तथ्यात्मक रूप से सही होनी चाहिए। खबरों के चयन में क्रॉस चेकिंग को सबसे महत्वपूर्ण कारक मानने वाले सुबोध का काम न सिर्फ पाठकों को केवल सूचना देने भर का है बल्कि उन्हें सही, सुरक्षित और ठोस जानकारी उपलब्ध कराना भी है।

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