कौन थे रामदत्त चौबे? 19 की उम्र में देश के लिए शहीद, 80 साल बाद कहानी सामने आई

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Ramdutt Chaubey: देश के लिए अपने प्राण न्यौछावर कर देने वाले रामदत्त चौबे की कहानी 80 साल बाद सामने आई है। 17 की उम्र में सेना में भर्ती हुए थे और 19 वर्ष की आयु में देश के लिए बलिदान हो गए।

Ramdutt Chaubey Martyred age of 19
रामदत्त चौबे कौन थे

योगेश जोशी, चम्पावत

देश के लिए शहीद होने वाले रामदत्त चौबे की कहानी 80 साल बाद सामने आई है। उत्तराखंड के चंपावत में सुंई निवासी शहीद रामदत्त चौबे ने द्वितीय विश्व युद्ध में शहादत दी थी। वर्ष 1945 में कुमाऊं रेजीमेंट ने शहादत का दर्जा दिया था। उनका नाम म्यांमार म्यांमार के रंगून मैमोरियल दीवार में भी दर्ज है। अब परिजनों की खोजबीन के बाद सेना ने शहादत के दस्तावेज दिए हैं।

चंपावत के लोहाघाट के सुंई गांव निवासी वीर नायक रामदत्त चौबे की शहादत की गाथा 80 साल बाद इतिहास के पन्नों से बाहर निकली है। शहीद के भतीजे खिलानंद चौबे ने बताया कि रामदत्त चौबे पुत्र भवानी दत्त चौबे 16 अप्रैल 1943 को 17 वर्ष की उम्र में सेना में भर्ती हुए थे। उन्होंने दूसरे विश्व युद्ध के दौरान म्यांमार में दुश्मनों से लोहा लेते हुए एक मार्च 1945 को शहादत दी थी। उनके इस सर्वोच्च बलिदान पर सेना ने रामदत्त चौबे को मरणोपरांत 1939-45 स्टार, वर्मा स्टार और वार मैडल से सम्मानित किया था। इसी दौरान कुमाऊं रेजीमेंट ने उनकी शहादत से संबंधित दस्तावेज परिजनों को दिए थे। इस दौरान परिवार में कोई भी जिम्मेदार व्यक्ति नहीं होने के कारण उनकी शहादत को हर स्तर पर भूला दिया गया।

कुमाऊं रेजिमेंट ने दस्तावेज परिजनों को सौंपे

खिलानंद चौबे ने बताया कि कुछ समय पूर्व उन्हें चाचा की शहादत के दस्तावेज सुंई स्थित घर में सफाई के दौरान मिले। दस्तावेजों को लेकर उन्होंने कुमाऊं रेजीमेंट से संपर्क किया। अब सेना ने राम दत्त चौबे की शहादत के दस्तावेज शहीद के परिजनों को सौंपे हैं। उन्होंने बताया कि रामदत्त की शहादत की जानकारी 80 साल तक दबी रही। इधर, वर्ष 1945 में कुमाऊं रेजीमेंट ने शहादत का दर्जा दिया था। अब परिजनों की खोजबीन के बाद सेना ने शहादत के दस्तावेज दिए हैं।

रंगून मैमोरियल की दीवार पर दर्ज है नाम

चम्पावत। द्वितीय विश्व युद्ध में शहीद हुए सुंई के रामदत्त चौबे का नाम म्यांमार के ऐतिहासिक 'रंगून मेमोरियल' की दीवार पर दर्ज है। रामदत्त चौबे के भतीजे खिलानंद चौबे ने बताया कि म्यांमार की फेस 43 में उनका नाम खुदा हुआ है।

स्पोर्ट्स कॉलेज शहीद के नाम पर रखने की मांग

परिजनों ने छमनिया में निर्माणाधीन बालिका स्पोर्ट्स कॉलेज का नाम शहीद रामदत्त चौबे के नाम पर रखने की मांग की है। खिलानंद चौबे ने बताया कि इस संबंध में डीएम मनीष कुमार के अलावा शासन को ज्ञापन दिया है। उन्होंने बताया कि इस संबंध में उचित कार्यवाही करने का आश्वासन मिला है।

Gaurav Kala

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