जब चारधाम जाने से राज्यपाल को रोका, माफी भी मांगनी पड़ी; ऐसे तय होते हैं कपाट खुलने के दिन
चारधाम यात्रा का आगाज हो गया है। चारधाम में कभी भी किसी के लिए परंपरा नहीं तोड़ी गई। यहां तक कि राज्यपाल को भी रोका गया। जानिए कि कपाट खुलने के दिन कैसे तय होते हैं।

Chardham Yatra: उत्तराखंड चार धाम यात्रा 19 अप्रैल को गंगोत्री और यमुनोत्री धाम के कपाट खुलने के साथ शुरू हो गई है। पिछले एक दशक से चार धाम यात्रियों की संख्या में लगातार बढ़ोतरी हो रही है । वर्ष 2014 में जहां तीन लाख से भी कम यात्री चार धाम यात्रा में बदरी-केदार और गंगोत्री-यमुनोत्री के साथ ही हेमकुंड साहिब के दर्शन के लिए पहुंचे थे वहीं 2023 में यह 54 लाख की संख्या को भी पार कर गई। इस बार यात्रा जल्दी शुरू होने से यात्रियों की संख्या में और भी बढ़ोतरी होने की उम्मीद है।
कभी नहीं टूटी परंपरा राज्यपाल को भी रोका
गंगोत्री के रावल सुभाष सेमवाल ने बताया कि कुछ वर्ष पहले तत्कालीन राज्यपाल को गंगोत्री के दर्शन को जाना था। लेकिन अक्षय तिथि न होने के कारण राज्यपाल को रोका गया। जिलाधिकारी ने गंगोत्री के शिष्टमंडल को बुला कर अनुरोध किया कि गंगोत्री धाम के कपाट राज्यपाल के लिए खोले जाने अति आवश्यक हैं। शिष्टमंडल ने साफ इंकार कर दिया कि जब तक अक्षय तृतिय का पावन पर्व नहीं आता, कपाट नहीं खुलेंगे। राज्यपाल ने शिष्टमंडलों से माफी मांगी। कहा कि परंपराओं को बरकरार रखना जरूरी है। इसके बाद शुभ मुहुर्त अक्षय तृतीय के बाद ही गंगोत्री के दर्शन किए गए।
ऐसे तय होते हैं कपाट खुलने के दिन
चारधाम यात्रा के प्रथम पड़ाव यमुनोत्री और गंगोत्री धाम के कपाट आदिकाल से ही शुक्ल पक्ष की अक्षय तृतीय के पर्व पर खोले जाते हैं। अक्षय तृतीय दिन से यमुनोत्री और गंगोत्री के कपाट श्रद्धालुओं के लिए खोले जाते हैं। केदारनाथ के कपाट शिवरात्रि के दिन और बदरीनाथ धाम के कपाट टिहरी नरेश की कुंडली देख कर बसंत पंचमी के दिन निकाला जाता है।
मां यमुना के दर्शन से शुरू होती है यात्रा
उत्तरकाशी। चारधाम यात्रा के प्रथम पड़ाव यमुनोत्री, गंगोत्री धाम है। दोनों धामों के कपाट अक्षय तृतीया पर खोले जाते हैं। केदार खंड, स्कंद पुराण में भी यात्रा का विधि विधान से शुभारंभ यमुनोत्री से शुरू होने का जिक्र है। चारधाम यात्रा का प्रथम दर्शन उत्तरकाशी जिले के यमुनोत्री धाम की यात्रा से शुरू होता है। पुराणों में उल्लेख है कि सर्वप्रथम पृथ्वी लोक में यमुना नदी का उदगम हुआ है। जो कि यमतत्व की प्रधानता मानी जाती है। यमुनोत्री यम की बहन हैं। इससे मनुष्य को यमलोक में सर्वोच्च स्थान प्राप्त होता है। इसलिए श्रद्धालु अपने पापों को तारने को पहले यमुनोत्री पहुंच कर मां यमुना के दर्शन करते हैं। इसके बाद गंगोत्री की यात्रा पर निकलते हैं।
19.52 लाख तक पहुंचा पंजीकरण का आंकड़ा
चारधाम यात्रा के लिए रविवार तक 19 लाख 52 हजार 809 श्रद्धालुओं ने पंजीकरण कराया। इसमें यमुनोत्री धाम के लिए तीन लाख 33 हजार 698 श्रद्धालुओं ने रजिस्ट्रेशन कराया है। गंगोत्री धाम के लिए तीन लाख 43 हजार 358, बाबा केदार के दर्शनों के लिए छह लाख 80 हजार 92 जबकि बदरीनाथ धाम के लिए पांच लाख 75 हजार 797 पंजीकरण हो चुके हैं। साथ ही श्री हेमकुंड साहिब के दर्शनों के लिए 19 हजार 864 श्रद्धालुओं ने पंजीकरण कराया है।
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