दीपावली पर आर्य समाज मंदिर में विशेष हवन किया
आर्य समाज मंदिर में दीपावली पर्व पर विशेष यज्ञ का आयोजन किया गया। श्रद्धालुओं ने हवन कुंड में आहुति देकर अज्ञान को दूर करने और शाश्वत प्रकाश को प्रज्वलित करने का प्रयास किया। दीपावली पर्व का मूल नाम...
आर्य समाज मंदिर में दीपावली पर्व पर विशेष यज्ञ का आयोजन किया गया। श्रद्धालुओं ने मन से अज्ञान को दूर कर शाश्वत प्रकाश को प्रज्वलित करने के लिए हवन कुंड में आहुति डाली। आर्य उप प्रतिनिधि सभा की प्रधान सोनिका वालिया ने श्रद्धालुओं को बताया कि दीपावली पर्व का मूल नाम शारदीय नवसस्येष्टि पर्व है। शरद ऋतु में उत्पन्न नई फसल के अन्न द्वारा किया जाने वाला यज्ञ। इस अवसर पर खरीफ की फसल का अन्न घर में आता है तथा रबी की फसल की बुवाई प्रारम्भ होती है। ये दोनों फसलें आर्यावर्त (भारत) की मुख्य फसलें हैं। भारतीय वैदिक संस्कृति में भोजन ग्रहण करने से पहले उसे यज्ञ में आहुत करने की परम्परा रही है।

यह पर्व शरद ऋतु के समापन व हेमन्त ऋतु के आगमन के संगम के काल में आता है। इस समय अनेक रोगों का संक्रमण भी होने की पूरी आशंका रहती है। इस कारण भी इस पर्व पर बड़े सामूहिक यज्ञ की भी परम्परा रही है। बताया कि पर्यावरण शोधन का यज्ञ से अधिक उत्तम अन्य कोई वैज्ञानिक उपाय नहीं है। उन्होंने बताया कि वेद मंत्र ब्रह्माण्ड में व्याप्त सूक्ष्म तरंगों का बैखरी रूप है। इसी दिन इस युग के महान वेदवेत्ता, समाज सुधारक एवं स्वतंत्रता संग्राम के प्रथम प्रणेता महर्षि देव दयानन्द सरस्वती ने नाश्वर शरीर का त्याग किया था। इस दौरान पं. चंदन शास्त्री, नरेंद्र वर्मा, विवेक कुमार, हरि किशोर महेंद्रू, सतेंद्र सैनी, प्रवीन अग्रवाल, प्रवेश गुप्ता, जितेंद्र कौशिक आदि मौजूद रहे।

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