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अकीदत के साथ पढ़ी गई रमजान के पहले जुमे की नमाज

 अकीदत के साथ पढ़ी गई रमजान के पहले जुमे की नमाज

अल्लाह की रहमतों और नेमतों से भरे पाक रमजान माह के पहले जुमे की नमाज पूरी अकीदत के साथ अदा की गई। मस्जिदों के बाहर और छतों पर भी नमाजी नमाज पढ़ते नजर आए। मुख्य बाजार स्थित जामा मस्जिद में नमाजियों की संख्या अधिक होने पर मुख्य मार्ग पर नमाज की व्यवस्था कराई गई। इस दौरान पुलिस प्रशासन ने भी व्यवस्था बनाने में सहयोग निभाया। रमजान के पहले जुमे की नमाज अदा करने को मस्जिदों में रोजेदारों की खासी भीड़ रही। शुक्रवार को अजान होते ही नमाजी मस्जिदों की और दौड़ पड़े। रमजान के पहले जुमे की नमाज दोपहर 1 बजे से लेकर ढाई बजे तक पढ़ाई गयी। पूरे अकीदत के साथ रोजेदारों ने नमाज अदा की। इससे पहले उलेमाओं ने जकात फितरा गरीब बेसहारा की मदद करने की बात कही। साथ ही रमजान को बरकतों का और रहमतों का महीना बताते हुए इसकी तफसील से फजीलत बयान की। जामा मस्जिद के मौलाना कलीम अहमद ने कहा कि यह रमजान शरीफ का महीना है, जो रहमत मगफिरत और जहन्नम से निजात का माह है। कहा कि जो इंसान जान बूझकर रोजा छोड़ता है, जिंदगी भर भी अगर वह रोजा रखे तो उसके नुकसान की भरपाई नहीं होती। बताया कि इस्लाम की बुनियाद पांच चीजों पर कायम है। पहला कलमा पढ़ना, दूसरा नमाज, तीसरा रमजान में रोजे रखना, चौथा जकात अदा करना और पांचवां हज करना। बताया कि नमाज, जकात और हज का सवाब तो सबको मालूम है, लेकिन रोजे का सवाब केवल अल्लाह ही जानते हैं। इस मौके पर सुल्तान, खालिद, नसीर, जमशेद खान, मुनीर अहमद, गुलफाम अली, नफीस कुरैशी, शमशाद खान, इरशाद आदि रोजेदार मौजूद रहे।

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  • Web Title: Jumayi Namaz of Ramzan, read with Akedat