
पछुवादून में सरसों और गेहूं की फसल पर पड़ी मौसम की मार
नवंबर माह में बारिश न होने के कारण अभी तक ज्यादा सर्दी नहीं हुई है। मौसम के इस बदले मिजाज का असर सरसों की खेती करने वाले किसानों पर भी पड़ रहा है।
नवंबर में बारिश नहीं होने के कारण अभी तक ज्यादा सर्दी नहीं हुई है। मौसम के इस बदले मिजाज का असर सरसों की खेती करने वाले किसानों पर भी पड़ रहा है। सरसों की खेती करने वाले किसानों को न सिर्फ सिंचाई के लिए करीब दो हजार रुपये प्रति एकड़, बल्कि कई जगह दोबारा बीजाई के लिए करीब पांच से सात हजार रुपये प्रति एकड़ का अतिरिक्त खर्च वहन करना पड़ा है। पछुवादून के साथ ही जौनसार बावर में भी नवंबर माह में बारिश नहीं हुई। जिससे तापमान में गिरावट नहीं आई। इसके कारण सरसों की बिजाई के बाद होने वाला फुटाव (जर्मिनेशन) नहीं हो पाया।
इससे कई जगहों पर किसानों को सरसों की फिर से बिजाई करनी पड़ी। बारिश न होने के कारण सिंचाई का भी अतिरिक्त खर्च वहन करना पड़ा। छरबा के किसान रूमीराम जायसवाल, भोजावाला के किसान रमन ठाकुर, दीवान सिंह लखरवाल ने बताया कि सरसों की फसल खराब होने के साथ ही गेहूं की बुआई नहीं हुई है। जहां बुआई की गई थी, वहां गेहूं की फसल की सेहत खराब हो गई है। कृषि विज्ञान केंद्र ढकरानी के वैज्ञानिक डॉ. संजय राठी ने बताया कि इस बार पश्चिमी विक्षोभ के सक्रिय नहीं होने के कारण नवंबर में बारिश नहीं हो पाई। इसके कारण तापमान भी सामान्य से कुछ ज्यादा रहा। इसका सीधा असर सरसों और गेहूं की फसल पर पड़ा है। सरसों की बिजाई 25 सितंबर के बाद शुरू हो जाती है, लगभग सभी किसानों ने इसकी बिजाई कर दी थी। इसके बाद बारिश न होने और तापमान न गिरने के कारण फुटाव नहीं हो पाया, इससे किसानों को फिर से बिजाई करनी पड़ी। उन्होंने बताया कि गेहूं की खेती करने वाले किसान अक्सर सिंचाई पर ही निर्भर रहते हैं, लेकिन तापमान सामान्य से ज्यादा रहने के कारण गेहूं की फसल पर भी विपरीत असर हुआ है।

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