विदाई की बेला में श्रद्धालुओं के छलके आंसू

विदाई की बेला में श्रद्धालुओं के छलके आंसू

संक्षेप:

जितेंद्र पंवार साहिया के अनुसार, छत्रधारी चालदा महाराज की दसऊ से विदाई के दौरान श्रद्धालुओं के मन में गम और खुशी का मिश्रण था। खत पशगांव के बाशिंदों ने दो साल से अधिक समय तक देवता का सानिध्य प्राप्त किया। विदाई के समय श्रद्धालु भावुक हो गए, जैसे राम के वनगमन के समय अयोध्यावासियों ने विलाप किया था।

Dec 10, 2025 05:53 pm ISTNewswrap हिन्दुस्तान, विकासनगर
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जितेंद्र पंवार साहिया। छत्रधारी चालदा महाराज के दसऊ से विदाई के दौरान आस्था का सैलाब उमड़ा। यहां आए श्रद्धालुओं के मन में कहीं चालदा महाराज से बिछुड़ने का गम तो कहीं मिलने की खुशी में आंखें नम रहीं। हिमाचल प्रदेश के सिरमौर से आए श्रद्धालुओं के मन में छत्रधारी चालदा महाराज का सानिध्य मिलने की खुशी थी। खत पशगांव के श्रद्धालुओं के मन में देवता से बिछुड़ने का गम था। आखिर हो भी क्यों नहीं। ढाई साल की लंबी अवधि तक देवता ने खत पशगांव के दसऊ में प्रवास किया। स्थानीय बाशिंदों ने अपने सुख-दुख आराध्य देव के सामने साझा किए।

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हर दिन सैकड़ों श्रद्धालु मंदिर में देव दर्शन के लिए आते रहे। इससे गांव में चहल-पहल बनी रहती थी। लिहाजा बुधवार को जब खत पशगांव के बाशिंदे अपने आराध्य देव से बिछड़ रहे थे तो वे अपने आंसुओं को रोक नहीं पाए। खत पशगांव के लोगों ने बताया कि छत्रधारी चालदा महाराज के सानिध्य में 17 माह कैसे बीते, पता ही नहीं चला। ---- देव प्रवास के दौरान दसऊ की व्यवस्था बनी नजीर देव प्रवास के दौरान दसऊवासियों की व्यवस्था शांटीबील और पांशीबील के बाशिंदों ने नजीर बन गई है। ढाई साल के प्रवास के दौरान मंदिर में आने वाले श्रद्धालुओं के लिए हर दिन भंडारा दिए जाने के साथ मंदिर में दर्शन के लिए आने वाले श्रद्धालुओं के लिए सुविधाएं विकसित की गई थी। इन व्यवस्थाओं को लेकर छत्रई स्याणा समेत शांटी, पांशी बील के बाशिंदों ने नजीर बताते हुए हर प्रवास स्थल पर ऐसी ही व्यवस्थाएं करने की बात कही। ------ दसऊ में राम के वनगमन जैसा था भावुक माहौल छत्रधारी चालदा महाराज को मुलुकपति राजा रघुनाथ माना जाता है, जो सभी लोगों पर छत्र-छाया रखते हैं। विख्यात रंगकर्मी नंदलाल भारती ने कहा कि धार्मिक मान्यता के अनुसार मुलुकपति राजा रघुनाथ ही सबको सुख समृद्धि प्रदान करते हैं। मुलुकपति की दसऊ से विदाई के दौरान स्थानीय बाशिंदे वैसे ही विलाप कर रहे थे, जैसे राम के वन गमन के दौरान अयोध्यावासियों ने विलाप किया था। ---- छत्रई स्याणा शेर सिंह ने की प्रवास की अगुआई छत्रधारी चालदा महाराज की प्रवास यात्रा की अगुआई छत्रई स्याणा शेर सिंह ने की। धार्मिक परंपरा के अनुसार चार भाई महासू महाराज के छत्रई स्याणा होते हैं, जो देव प्रवास के दौरान यात्रा की अगुआई करते हैं। छत्रधारी महाराज की प्रवास यात्रा के दौरान सबसे आगे छत्र लेकर छत्रई स्याणा चल रहे थे।