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22 सितम्बर, 2020|7:07|IST

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पितृ विसर्जन पर किया दान पुण्य

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सोलह दिवसीय श्रद्धा पक्ष गुरुवार को अमावस्या के दिन सम्पन्न हुआ। अंतिम दिन श्रद्धालुओं ने अज्ञात तिथि और भूले बिसरे पितरों को नमन करते हुए तर्पण और दान-पुण्य किया। कोरोना के चलते कई स्थानों पर लोगों ने ऑनलाइन तर्पण भी कराए। शहर से लेकर गांव-गांव तक लोग अपने पित्रों का ध्यान करते दिखाई दिये। पंडित आचार्य नितेश जगुड़ी ने बताया कि बताया कि हर वर्ष श्राद्ध पक्ष में हमारे पितृ पृथ्वीलोक में आकर हमारी ओर से श्राद्ध और तर्पण को ग्रहण करते हैं। अंतिम दिन भूले बिसरे और अज्ञात तिथि वाले पितरों को तर्पण दिया जाता है। जिसके बाद समस्त पितृ अपने लोक को लौट जाते हैं। बताया कि संक्रमण के चलते कई श्रद्धालुओं ने ऑनलाइन तर्पण भी कराया है।

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  • Web Title:Donated charity on ancestral immersion