हिमालय की सांस्कृतिक विरासतों का संरक्षण जरूरी
मल्टीपल एक्शन ग्रुप फॉर इंटीग्रेटेड रूरल डेवलपमेंट सोसाइटी ने हिमालय की सांस्कृतिक विरासतों का संरक्षण विषय पर कार्यक्रम आयोजित किया। कार्यक्रम में लोक कलाकारों ने स्थानीय संस्कृति को प्रस्तुत किया। मुख्य अतिथि पीडी बहुखंडी ने संस्कृति के संरक्षण को जरूरी बताया और हिमालयन इंटरनेशनल स्कूल की चेयरपर्सन ने पर्यावरणीय संकटों का समाधान सामुदायिक भागीदारी से करने की बात की।

मल्टीपल एक्शन ग्रुप फॉर इंटीग्रेटेड रूरल डेवलपमेंट सोसाइटी की ओर से रविवार को ब्लॉक सभागार में ‘हिमालय की सांस्कृतिक विरासतों का संरक्षण’ विषय पर कार्यक्रम आयोजित किया गया। कार्यक्रम में स्थानीय लोक कलाकारों ने लोकगीतों और लोकनृत्यों के माध्यम से स्थानीय संस्कृति से रूबरू कराया। मुख्य अतिथि पीडी बहुखंडी ने हिमालय की सांस्कृतिक विविधता के संरक्षण को जरूरी करार देते हुए कहा कि उत्तराखंड संस्कृति का कस्टोडियन है। प्रशासन, जनप्रतिनिधि व समाज संस्कृति के दीपों को समेट कर एक सूत्र में पिरोएं। उन्होंने प्राकृतिक सौंदर्य के साथ संस्कृति के समावेश को विकास के लिए मील का पत्थर बताया। हिमालयन इंटरनेशनल स्कूल की चेयरपर्सन अनामिका पाराशर ने कहा कि पर्यावरणीय संकट, जलवायु परिवर्तन, अत्यधिक पर्यटन और संसाधनों की कमी विरासत के लिए चुनौती हैं।
इनके समाधान हेतु सामुदायिक भागीदारी, सतत वित्त पोषण और सामूहिक सहयोग आवश्यक हैं।
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